एनडीटीवी में काम कर चुके पत्रकार रीतेश कुमार साहू ने बड़े अरमान और सपनों के साथ रायपुर से एक सांध्य दैनिक 'जनदखल' का प्रकाशन शुरू किया था. पर यह सपना अब टूट चुका है. अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया गया है. करीब दो दर्जन लोग बेरोजगार हो चुके हैं. कहा तो ये गया है कि पांच छह महीने बाद फिर से यह अखबार शुरू होगा लेकिन जानने वाले जानते हैं कि बंद हो चुका यह अखबार अब नहीं शुरू होने वाला.
अखबार के लांचिंग के वक्त इससे जुड़े रहे देशपाल सिंह पंवार कबका यह अखबार छोड़ चुके हैं. जनदखल अखबार ने पहले ही अंक से छत्तीसगढ़ सरकार पर प्रहार शुरू कर दिया था. इसका छत्तीसगढ़ में जमकर स्वागत किया गया. आरकेएस इम्प्रैसिव मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले पहली बार दस्तक देते ही 'जनदखल' ने
अपने नाम के मुताबिक जनता के दिलों को झकझोरने की कोशिश की. जिस राज्य में सारा मीडिया सत्ता के गुणगान करने में मस्त रहा हो वहां जनदखल ने पहले दिन से ही रमन सरकार की बैंड बजाने का काम शुरू कर दिया था.
इसके कारण जनदखल को कई तरीके के सरकारी मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा. अखबार के प्रवेशांक के अवसर पर संपादक देशपाल सिंह पंवार, प्रबंध संपादक रीतेश साहू, खेल संपादक कमलेश गोगिया, सह संपादक संजय खरे, फीचर संपादक मिस जुलेखा जबीं, फोटो एडिटर प्रदीप ढढ़सेना, चीफ रिपोर्टर संजय पांडेय समेत जनदखल का सारा परिवार मौजूद था. लेकिन बंद होते वक्त कौन कहां है, यह किसी को नहीं पता.






