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राष्ट्रीय सहारा, पटना के यूनिट हेड ने पूछा- विकास मुझसे क्यों मिलने आया है?

कल पटना गया था बिजनेस संबंधी काम से। पटना पहुंचकर पता लगा कि एक मीडिया हाउस जहां मैं पूर्व में काम कर चुका हूं वहां के मार्केटिंग मैनेजर अब यूनिट हेड बना दिये गये हैं। हलांकि उन्होंने पूर्व में अपने पावर का दुरुपयोग करते हुए बेहतर प्रदर्शन के बावजूद भी मेरा गला घोंट दिया था लेकिन फिर भी मेरी ईच्छा हुई कि सर से मिलकर उन्हें प्रमोशन की बधाई दे दूं। ऐसा सोचते हुए मैं उन्हें बधाई देने उनके कार्यालय पहुंचा और रिसेप्शन काउंटर पर औपचारिकता पूरी की लेकिन श्रीमान् यूनिट हेड ने यह कहते हुए अपनी औकात दिखा दी कि विकास मुझसे क्यों मिलने आया है?

कल पटना गया था बिजनेस संबंधी काम से। पटना पहुंचकर पता लगा कि एक मीडिया हाउस जहां मैं पूर्व में काम कर चुका हूं वहां के मार्केटिंग मैनेजर अब यूनिट हेड बना दिये गये हैं। हलांकि उन्होंने पूर्व में अपने पावर का दुरुपयोग करते हुए बेहतर प्रदर्शन के बावजूद भी मेरा गला घोंट दिया था लेकिन फिर भी मेरी ईच्छा हुई कि सर से मिलकर उन्हें प्रमोशन की बधाई दे दूं। ऐसा सोचते हुए मैं उन्हें बधाई देने उनके कार्यालय पहुंचा और रिसेप्शन काउंटर पर औपचारिकता पूरी की लेकिन श्रीमान् यूनिट हेड ने यह कहते हुए अपनी औकात दिखा दी कि विकास मुझसे क्यों मिलने आया है?

मैं उनके हां या ना के इंतजार में बैठा रहा और वहां के लोग दबी जुबान से मेरा उपहास उड़ाते रहे। बहुत बुरा लगा कि क्या बड़े पद पर जाने के बाद लोग अपने पुराने दिन और संघर्ष के दिनों के सहयोगियों को भूल जाते हैं। वैसे श्रीमान् उस मीडिया हाउस में हैं जहां एक गलती पकड़ में आने पर बड़े-बड़ ओहदेवालों को औकात का अहसास करा दिया जाता है। सिन्हा जी यूनिट हेड तो जरूर बन गये लेकिन उनकी पूरी टीम प्रबंधन की नजरों में घूल झोंकते हुए अखबार को पतन के मार्ग पर ले जा रहे है। विज्ञापन वाले महाशय को यूनिट हेड जैसी बड़ी जिम्मेवारी सौंपकर सहारा समूह बिहार में सिर्फ दिन काट रहा है। ‘राष्ट्रीय सहारा’ पटना यूनिट किस प्रकार सहाराश्री की आंखों में धूल झोंक रहा हैं, इस पर विस्तृत रिपोर्ट मैं एक-दो दिनों में भड़ास4मीडिया को प्रेषित करूंगा। अगर भड़ासवालों ने मदद कर दिया तो पटना यूनिट में प्रबंधन द्वारा व्यापक पैमाने पर फेरबदल किया जा सकता है।

लेखक विकास कुमार राष्ट्रीय सहारा, पटना में कार्य कर चुके हैं.

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