गोरखपुर से प्रकाशित राष्ट्रीय सहारा का कोई मुकाबला नहीं कर सकता. सहारा में बैठे लोग पता नहीं क्या करते रहते हैं. जिस विधायक को हमेशा यह अखबार विधायक लिखता था, अब पूर्व विधायक बना दिया है. सहारा ने भाटपार रानी के सपा विधायक कमेश्वर उपाध्याय को विधायक होते हुए भी भूतपूर्व बना दिया. आश्चर्य इस बात का भी है कि अगर भाटपार रानी के संवाददाता से गलती हुई तो उप संपादक और संपादक की नजर में यह बात क्यों नहीं आई.
इससे जाहिर होता है कि राष्ट्रीय सहारा में खबरों के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई जाती. राष्ट्रीय सहारा के नौ नवम्बर के देवरिया संस्करण में पेज छह की लीड खबर लगी है 'पूर्व विधायक ने प्रशस्ति पत्र दिया'. अब यह सहारा की गलती है या जानबूझकर ऐसा किया गया है बताना मुश्किल है. क्योंकि इसके पहले सहारा कमेश्वर उपाध्याय को आए दिन विधायक ही छापता रहा है इस स्थिति में उन्हें अचानक भूतपूर्व बना देना समझ से परे हैं.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






