Chandan Srivastava : ये जो दूसरा बच्चा आया है "जीनियस" मृगेन्द्र राज (इंडिआ न्यूज पर), इस पर स्टोरी लगभग 4 साल पहले कर चुका हूं. "आज का अभिमन्यू" नाम के स्लग से. क्योंकि तब इसके माता-पिता का दावा था कि बचपन मे जब बच्चा कोख में था तभी उसके पिता उसे ब्यूरोक्रेट बनाने का सपना पाल चुके थे और उसके कोख मे रहते ही उसे जनरल स्टडीज का ज्ञान दिया करते थे.
एक बार इस बच्चे को किसी स्टेज पर भी ले जाया गया था, तब इसकी उम्र महज ढाई-तीन साल थी. बच्चे की तबियत खराब हो गई थी. आज भी बच्चे के साथ जो सर्कस हो रहा है, उसके जिम्मेदार बच्चे के माता-पिता ज्यादा हैं. पहले तो एक अबोध मन पर इस तरह के स्टडीज का दबाव और फिर ये ड्रामा. मृगेन्द्र की भी अपनी सीमाएं हैं.
उसके पिता ने जितना उसे रटाया है उतना ही जवाब बच्चा दे सकता है. बच्चे के पिता जी ने दिल्ली से फ्राईडे को ही मुझे फोन भी किया था, पहले बच्चे कौटिल्य को देखते हुए मेरा एक बार मन हुआ कि मैं उन्हें राय दूं कि क्यों बच्चे को सर्कस की रिंग मे उतार रहे हो जिसके रिंग मास्टर दीपक चौरसिया हैं लेकिन फिर सोचा उन्हें लगेगा कि मैं इर्ष्यावश कह रहा हूं. इसलिए बधाई देकर ही शांत हो गया.
ये भी पता चला कि इंडिया न्यूज ने उसे "विशेष सुरक्षा सेल" में रखा हुआ है. यानि जिस होटल पर वो रुका है उसका पता किसी को भी बताने पर मनाही है. किसी इंडिया न्यूजकर्मी को भी नहीं. जो ड्राईवर उन्हें स्टूडिओ के लिए ले जाने आता है उसे उनका रूम नम्बर भी बताने पर रोक है. और तो और फैज़ाबाद मे इस बच्चे को अपने अपने स्टूडिओ ले जाने के लिए मीडियाकर्मियों मे वो मार मची कि बच्चे के अभिभावक दिल्ली की ट्रेन के समय से तीन घंटा पहले ही स्टेशन पर भाग गए.
खैर अगर बच्चा इंडिआ न्यूज पर ना होता तो किसी और पर होता, प्रयास सभी ने किया था बाजी इंडिआ न्यूज ने मारी. हां प्रोग्राम देखने से एक बात और लगती है कि दीपक चौरसिया बच्चों के साथ बिल्कुल भी सहज नहीं हैं. खुद पर लिखी कविता सुनवाने को इशारे इशारे मे कहते हैं. (पत्रकार चंदन श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से)
Vikas Kumar : भाजपा के लोग पर्दे के पीछे से बलात्कार के आरोप से बुरी तरह घिरे आशाराम की मदद कर रहे हैं। वे कड़ी मेहनत करके उँचाई पर पहुंचे पत्रकार दीपक चौरसिया पर अर्नगल आरोप लगाकर एक तरह से उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं। क्योंकि भाजपावालों के आरोप से घबड़ाकर दीपक चौरसिया अपने न्यूज चैनल पर 'ठरकी' आसाराम की करतूतों को उजागर करने के अभियान को विराम दे दें। (पत्रकार विकास कुमार के फेसबुक वॉल से)
ये भी पढ़ सकते हैं…
कहीं इन जीनियस बच्चों का भी हाल महाबली खली वाला न हो जाए!






