लखनऊ : उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में पहले से ही भ्रष्टाचार का बोल बाला था, अब सारी सीमाएँ लांघ कर नया कीर्तिमान स्थापित किया जा रहा है. समाचार पत्रों के ग़ैर व्यक्तियों को मुख्यालय की मान्यता दी जा रही है. उर्दू के विभिन समाचार पत्रों के पत्रकारों को मान्यता के स्थान पर मैनेजर मान्यता की दौड़ में आगे हैं. दिलचस्प बात यह है कि यह मैनेजर सीना ठोंक कर यह घोषणा भी कर रहे हैं कि उन्होंने १०,०००-१०००० रुपए सूचना विभाग की एक डिप्टी डायरेक्टर को देकर अपनी मान्यता कराई है.
अब जिन पत्रकारों की मान्यता नहीं हो सकी है, उनमें रोष व्याप्त है और वो अपने समाचार पत्र के मैनेजमेंट से व्यथा कहते डर रहे हैं. सूचना विभाग पहले से ही इस गोरखधंधे में बुरी तरह लिप्त है. पत्रकारों ने अपना नाम न छपने की शर्त पर बताया कि मैनेजर को मान्यता देकर सूचना विभाग ने इंसाफ नहीं किया है. आक्रोशित पत्रकारों ने उम्मीद जताई है कि मान्यता प्राप्त संवादाता समिति के कर्मठ पत्रकार नेता इस विवाद को उठायेंगे और जिन ग़ैर पत्रकारों की मान्यता दी गयी है, उनको तुरंत कैंसिल कराएंगे. एसके शुक्ल ने एक आपात काल बैठक में कहा कि सूचना विभाग पत्रकारों की जगह अब दलालों को मान्यता दे रहा है. ताकि ये मैनेजर हर समय मंत्रियों और अफसरशाहों से ताल मेल रखकर अपने समाचार पत्र के लिए विज्ञापन का धंधा कर सकें. (कानाफूसी)





