संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने पिछले साल कहा था कि नए साल में सेल फोन रोमिंग फ्री हो जाएंगे। पिछले महीने उन्होंने कहा कि फरवरी में रोमिंग फ्री हो जाएगा। फरवरी का महीना बीत गया। कहीं रोमिंग फ्री होने की सुगबुगाहट तक नहीं है। क्या केंद्रीय मंत्री सिब्बल भूलने लगे हैं। यह एक महत्वपूर्ण वादा है। देश भर के लोग रोमिंग फ्री घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। देश के विभिन्न समाचार पत्रों को इसकी याद दिलानी चाहिए। इलेक्ट्रानिक मीडिया को इसकी याद दिलानी चाहिए।
कुछ जगहों पर तो यह लिखा गया है कि बजट लोकलुभावन है। कहां से लोकलुभवन है यह आम बजट? अगले ही दिन पेट्रोल १.४० रुपए महंगा हो गया। जो लोग यह लिख रहे हैं कि बजट लुभावना है,वे किस दुनिया में रहते हैं? क्या वे बाजार नहीं जाते? चीजें नहीं खरीदते? या कि वे केंद्र सरकार की तरफ से नियुक्त किए गए हैं। ऐसे हास्यास्पद लेख और बयान अक्सर अखबारों में छप रहे हैं। जो बजट की तारीफ करते अघा रहे हैं, क्या उन्हें नहीं पता कि आम आदमी महंगाई से कराह रहा है? धन्य हैं ऐसे विश्लेषक। हां, रोमिंग फ्री का वादा क्या खटाई में पड़ गया?
लेखक विनय बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं.






