रोहतक । हरियाणा में इन दिनों पत्रकारों की हर रोज दिवाली है। हर रोज किसी न किसी को तोहफा मिल रहा है। बेशक किसी को दस दिन पहले मिला हो या फिर पंद्रह दिन पहले। पर खास बात यह है कि मिल सो काल्ड पत्रकारों को ही रहा है। सो काल्ड का प्रयोग आजकल मैं इसलिए करता हूं क्योंकि इससे सीधे तौर पर मकसद सवाल उठाना है। वरना सो काल्ड कह लो या फिर तथाकथित बात एक ही है, हालांकि इन सो काल्ड की संख्या काफी कम है।
हुड्डा सरकार ने अपना पिटारा इन सो काल्ड के लिए पूरी तरह खोल दिया है। तभी तो हाल के दिनों में दो पत्रकारों को सूचना आयुक्त बना दिया गया और एक सप्ताह पहले एक को मीडिया समन्वयक की जिम्मेदारी दे दी गई। अभी इन तीन से तो तीन हजार हजार खुश होने से रहे, इसलिए हुड्डा सरकार ने बाकी को खुश करने का नया तरीका निकला है। दिवाली नजदीक है, उससे भी खास बात यह है कि चुनावी साल है, इसलिए सब को खुश करके चलना है।
रोहतक में दिवाली तोहफे के नाम पर सीएम सिटी में पत्रकारों को सैमसंग के मोबाइल फोन सीएम और उनके एमपी पुत्र की ओर से बांटे गए। लोकसभा चुनाव तो छह सात माह बाद होने ही हैं, हो सकता है विधानसभा भी हुड्डा साहिब साथ करवा लें। इसलिए हुड्डा साहिब को मीडिया मालिकान के साथ-साथ उनके पालतुओं की भी याद आ गई। पर इन फोननुमा बिस्कुट ने रोहतक में खलबली मचा दी, उनमें जिन्हें यह नहीं मिले। एकदम से आपस में फोन गड़गड़ा उठे। उसके बाद तो खलखली मचना तय है। जिसके पास यह नहीं पहुंचा, वह जुगत में है और जिसके पास पहुंच गया, वह खुद को खुशकिस्मत समझ रहा है। पता नहीं यह सलाह किसने दी कि छह हजार को फोन दो, अब बिना बात तीस को खुश कर नब्बे की नाखुश कर दिया ना। अच्छा होता सबको दे देते चाहे एक हजार का ही। उससे समानता का अहसास तो होता।
बता दूं कि फोन मेरे पास भी पहुंचा है। मैं क्रांतिकारी तो हूं नहीं, इसलिए इंकार नहीं किया। पहले पता भी नहीं था, क्योंकि पैकेट बहुत छोटा लग रहा था। पता होता भी तो क्या इंकार कर पाता। शायद हां और नहीं भी। अब दोनों बात हैं। अगर खुद के बारे में यह बात सार्वजनिक नहीं करता तो सवाल उठना लाजिमी था। इसलिए पहले खुद को ही नंगा कर डाला। अच्छा है अब नंगे को कोई नंगा करने की नहीं सोचेगा। ये नहीं पता कि फोन बाकी हरियाणा के पत्रकारों को भी दिए गए हैं या नहीं।
मेरा यह मानना है कि अगर पत्रकार किसी पत्रकार वार्ता में कोई पैन या डायरी लेता है तो वो भी सही नहीं है, फिर इस प्रकार फोन लेना तो पूरी तरह गलत है। अब यह गलती बरसों से हो रही है तो फिर आसानी से ठीक होना मुश्किल है। इसलिए चुनावी साल में यह तोहफा स्वीकार कर ही लिया। इंकार करता तो भी क्रांतिकारियों की सूची में नाम आने वाला नहीं था। चलो एक बात तो अच्छी हुई, यह बात जितना बाजार में फैलेगी, बाकी पार्टियां भी इससे प्रेरणा लेगी। कम से कम चुनावी साल में तो पत्रकारों की मौज रहेगी।
रोहतक से दीपक खोखर की रिपोर्ट. संपर्क: 09991680040






