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”रोहित गुप्ता के कृत्यों से पत्रकार समाज शर्मिंदा हो रहा है”

आदरणीय यशवंत जी, आपका यह मंच निश्चय तौर पर पत्रकारों की समस्याओं और मीडिया से जुडी खबरों को प्रमुखता देता है. यह मंच हमेशा पत्रकारों में प्रिय रहा है. किन्तु बिना कोई छानबीन किये एक नितांत झूठी खबर (भदोही में पैसे पर बिका प्रेस क्लब, पत्रकार को पीटने वाले को किया सम्मानित) पढ़कर इस मंच की विश्वनीयता पर संदेह हो रहा है. मैं आपको और सभी पाठकों को सच्चाई से अवगत करना चाहूँगा. आशाराम बापू द्वारा या उनके समर्थकों पर जो आरोप लगाया गया था, उसी के आधार पर प्रेस क्लब ने एकजुटता दिखाई और मुकदमा दर्ज कराया. जब पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाही करने का आश्वासन दिया तो आन्दोलन बंद किया गया. आवश्यक धाराओं के अंतर्गत पुलिस ने चार्जशीट लगाया, किन्तु आप भी जानते हैं कि पुलिस कितने वर्ष की सजा के आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकती है.

आदरणीय यशवंत जी, आपका यह मंच निश्चय तौर पर पत्रकारों की समस्याओं और मीडिया से जुडी खबरों को प्रमुखता देता है. यह मंच हमेशा पत्रकारों में प्रिय रहा है. किन्तु बिना कोई छानबीन किये एक नितांत झूठी खबर (भदोही में पैसे पर बिका प्रेस क्लब, पत्रकार को पीटने वाले को किया सम्मानित) पढ़कर इस मंच की विश्वनीयता पर संदेह हो रहा है. मैं आपको और सभी पाठकों को सच्चाई से अवगत करना चाहूँगा. आशाराम बापू द्वारा या उनके समर्थकों पर जो आरोप लगाया गया था, उसी के आधार पर प्रेस क्लब ने एकजुटता दिखाई और मुकदमा दर्ज कराया. जब पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाही करने का आश्वासन दिया तो आन्दोलन बंद किया गया. आवश्यक धाराओं के अंतर्गत पुलिस ने चार्जशीट लगाया, किन्तु आप भी जानते हैं कि पुलिस कितने वर्ष की सजा के आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकती है.

क्या आन्दोलन करने से संत को गिरफ्तार किया जा सकता है. हकीकत से आप भी वाकिफ हैं. दूसरी बात हम आन्दोलन करके न्यायपालिका पर दबाव नहीं बना सकते यदि यह संभव होता तो शायद कितने वर्षों से न्यायालय में पड़े मामले लंबित नहीं होते. आज रोहित गुप्त को ABP न्यूज़ का पत्रकार बताया जा रहा है, उन्हें घटना के बाद महुआ न्यूज़ लाइन अपना पत्रकार बता रहा रहा था.

दूसरी बात घटना के तीन दिन तक महुआ न्यूज़ ने इस मामले को जोरशोर से उठाया और इसके बाद अचानक चुप हो गया, ऐसा क्यों, क्या उसने भी पैसा लिया था. न्यूज़ चैनल लाल बत्ती मामले पर कार्यवाही करने की बात कर रहा था फिर उसने कार्यवाही क्यों नहीं कराई. यही नहीं घटना के तीसरे दिन से रोहित गुप्ता ने खुद ही प्रेस क्लब से संपर्क नहीं किया, यहाँ तक कि उन्होंने फ़ोन करना भी मुनासिब नहीं समझा. जब उनसे  संपर्क करने की कोशिश मैंने की तो उन्होंने व्यस्त रहने का बहाना बनाया, जबकि हमें पता चला कि वे गोपीगंज में जाकर आरोपियों से संपर्क करने में जुटे हैं. लिहाजा उन्हें प्रेस क्लब की सदस्यता से बाहर कर दिया गया. हम किसी पर आरोप नहीं लगाते पर इस तरह की बातें कहीं न कहीं पत्रकार समाज को बदनाम करती हैं. दूसरी तरफ यदि वादी नहीं चाहेगा तो किसी भी आपराधिक मामले में सुलह नहीं हो सकती. और इस मामले के वादी रोहित गुप्ता हैं.

रही ३० मई को आसाराम के साधक को सम्मानित करने की बात तो मैं आपसे यह कहने चाहूँगा की यह आरोप नितांत झूठा है, यह आसमान पर पत्थर मारने के सामान है. पत्रकारिता दिवस पर हमारे जनपद के उन वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित किया गया जो २५ से ४० वर्षों तक पत्रकारिता से जुड़े रहे या फिर जुड़े हैं. उन पत्रकारों में श्री हरीन्द्रनाथ उपाध्याय, हाजी अमजद अली अंसारी, बालगोविन्द यादव, वाजिद अली अंसारी, प्रभुनाथ शुक्ल, मिथिलेश द्विवेदी शामिल है. बेस्ट फोटोग्राफी अवार्ड रविन्द्र पाण्डे व सलीम खान को दिया गया, विशिष्ट पत्रकार का अवार्ड साजिद अंसारी को दिया गया. इसके अलावा किसी को सम्मानित नहीं किया गया.

समारोह में करीब 70 पत्रकारों को स्मृति चिन्ह दिया गया. जिस बालकृष्ण द्विवेदी को संत का साधक बताया जा रहा है, वे मोढ़ से पत्रकार हैं, जो एक हिंदी राष्ट्रिय दैनिक के अलावा हिंदी साप्ताहिक और दो पत्रिकाओं से भी जुड़े हैं. देखा जाय तो जनपद में एक अख़बार के ब्यूरो चीफ के अलावा करीब एक दर्ज़न पत्रकार संत के साधक हैं, उनके घरों में संत की फोटो भी लगी होगी, जनपद में करीब हजारों की संख्या में संत के साधक होंगे, जो किसी न किसी व्यवसाय या सामाजिक कार्य से जुड़े होंगे. क्या एक घटना को लेकर सभी का बहिष्कार कर देना संभव है.. शायद नहीं.. कोई पत्रकार यदि संत से जुड़ा है तो वह उसकी व्यक्तिगत आस्था है. यदि वह पत्रकार है तो उसे बहिष्कृत नहीं किया जा सकता.

समारोह के दौरान रोहित गुप्ता के मामले को जोरदार तरीके से उठाया गया. यहाँ तक निर्णय लिया गया कि यदि रोहित गुप्ता मुकदमा नहीं लड़ सकते तो प्रेस क्लब अपने खर्च पर उन्हें मुकदमा लड़ायेगा, यह निर्णय समारोह के दौरान ही लिया गया. इसकी वीडियो भी हम आपको भेजेंगे. संत के किसी साधक को समारोह के दौरान न तो सम्मानित किया गया और न ही प्रेस क्लब चुप्पी साध कर बैठा है. बल्कि श्री गुप्ता के कृत्यों से पत्रकार समाज भी शर्मिंदा हो रहा है. पत्रकारिता के नाम पर दलाली करने वाले चंद लोगों के साथ मिलकर प्रेस क्लब को बदनाम कर रहे हैं. जबकि मुकदमा लड़ने के लिए क्लब उन्हें आर्थिक सहायता की पेशकश कर चुका है. पर वे चाहते हैं कि पत्रकार संत की गिरफ्तारी के लिए आन्दोलन करे. जो संभव नहीं है. यदि संभव है तो देश का कोई भी संगठन गिरफ़्तारी के लिए आन्दोलन शुरू करे, दोनों प्रेस क्लब उसके साथ खड़े होंगे. पर ऐसा पहला मामला होगा जो न्यायपालिका के खिलाफ होगा.

यशवंत जी आप एक सुलझे हुए व्यक्ति है फिर एकतरफा समाचार प्रकाशित कर खुद की विश्वनीयता पर अंगुली उठाने को विवश कर रहे हैं. यदि किसी ने यह समाचार भेजा तो आपने यह छानबीन करने के कोशिश क्यों नहीं की कि दूसरे पक्ष का भी बयान लिया जाय जबकि पहले ऐसा ही आप के मंच पर होता रहा है. क्या हम आप की विश्वसनीयता पर यकीन करना छोड़ दें. वैसे भी हम आपको कार्यक्रम की पूरी विडियो भेजेंगे, बिना कुछ एडिट किये. फिर आप स्वयं निर्णय ले क्या सच है क्या झूठ.

धन्यवाद सहित

आपका

हरीश सिंह

अध्यक्ष

पूर्वांचल प्रेस क्लब

मो. 7860754250

[email protected]

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