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लक्ष्‍मी की मेहरबानी : चलता-फिरता ऑटो स्‍टैण्‍ड बना गोदौलिया चौराहा

वाराणसी। शहर भर में कई अवैध चलते-फिरते आटो स्टैण्ड खाकी की मेहरबानी से चल रहे हैं। जिसके चलते न र्सिफ लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है, बल्कि जाम भी लग जाता है। शहर का सबसे महत्वपूर्ण चौराहा गोदौलिया भी इनमें से एक है, जहां खाकी की मेहरबानी से नो इन्ट्री में भी बकायदा आटो स्टैण्ड चल रहा है।

वाराणसी। शहर भर में कई अवैध चलते-फिरते आटो स्टैण्ड खाकी की मेहरबानी से चल रहे हैं। जिसके चलते न र्सिफ लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है, बल्कि जाम भी लग जाता है। शहर का सबसे महत्वपूर्ण चौराहा गोदौलिया भी इनमें से एक है, जहां खाकी की मेहरबानी से नो इन्ट्री में भी बकायदा आटो स्टैण्ड चल रहा है।

गुरुवार को शाम पांच बजे के करीब चौराहे के पास आटो वालों ने बेतरतीब ढंग से आटो खड़ा कर रखा था, तो दूसरी तरफ पुलिस के सिपाही बड़े आराम के साथ हाथ पर हाथ धरे खड़े हुए थे। इतने में जब कैमरे ने यहां की तस्वीर उतारनी शुरू की पलक झपकते ही चौराहे पर अब तक हाथ बांधे खड़े सिपाही हरकत में आ गए। देखते ही देखते आटो वाले धकिया दिए गए। और पल भर में सड़क साफ दिखने लगी।

गौर करने की बात ये है कि पुलिस कप्तान ने चंद रोज पहले ही गौदौलिया से दशाश्वमेध तक पैदल चल कर स्थिति का जायजा लिया था। इस दौरान सड़क के दोनों किनारे बेतरतीब खड़े वाहनों को देख उन्होंने स्थानीय पुलिसवालों को कड़ी फटकार लगाते हुए जाम न लगे इस बात की कड़ी हिदायत दी थी। लेकिन इधर कप्तान साहब गए उधर पुलिस वाले अपनी पुरानी हरकत पर उतर आए। और जगहों को तो छोड़ दीजिए इन्होंने तो चौराहे के पास ही आटो स्टैण्ड लगाने का ठेका ले लिया है। सुबह से लेकर रात तक इस चौराहे पर दर्जनों आटो खड़े रहते है। जाहिर सी बात है कि बिना सुविधा शुल्क दिए ये काम नहीं होता होगा।

गौरतलब है कि दशाश्‍वमेध घाट से महज कुछ ही दूर गोदौलिया चौराहे को शहर का हृदय स्थल कहा जाता है। हजारों की तादाद में देसी-विदेशी सैलानी यहीं से होकर गुजरते रहते हैं। ऐसे में यहां लगने वाले जाम की स्मृति भी वो अपने साथ बनारस से वापस जाते समय ले जाते होंगे। वैसे एक बात तो तय है कि यह चौराह पुलिस वालों के लिए वसूली का सबसे बड़ा केन्द्र बन चुका है। यहां आप बनारस पुलिस की एक झलक पाकर समझ सकते हैं कि शहर में पुलिस किस काम में लगी है।

… माजरा क्या है खुद देख लिजिए

शाम के पांच बजे शहर का सबसे व्यस्तम चौराहे के पास नो इन्ट्री में एक आटो आकर खड़ा होता है। पलक झपकते ही एक खाकी वर्दी धारी इधर का रूख करता है। उधर खाकी धारी आटो के पास पहुंचता है, इधर आटो चालक अपनी शर्ट के जेब में हाथ डालकर कुछ निकालता है उधर हाथ आगे बढ़ता है और फिर बंद हाथ जेब में जाकर शायद कुछ सरका देता है। ये सारी गतिविधिया बड़े आराम के साथ होती हैं। अब आप खुद समझ-बूझ लीजिए कि कानून के रक्षक किस तरह से अपनी ड्यूटी को अंजाम तक पहुंचा रहे बनारस की सड़कों पर!

बनारस से भास्‍कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट.

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