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लखनऊ के अंग्रेजी अखबारों में गलत कवरेज से मुस्लिम नाराज

लखनऊ में एक ही वर्ग के दो समुदायों के बीच हुई हिंसक घटनाओं में अंग्रेजी अखबारों की रिपोर्टिंग से मुस्लिम समुदाय के तमाम लोग नाराज हैं. रिपोर्टिंग में अंग्रेजी अखबारों ने सही तथ्‍यों को प्रकाशित करने की बजाय पुलिस द्वारा बताई गई कहानी को ही खबर बना दिया. इस समुदाय के लोगों ने खासकर हिंदुस्‍तान टाइम्‍स और टाइम्‍स आफ इंडिया की रिपोर्टिंग पर नाराजगी जताई है. गलत व एकपक्षीय खबर प्रकाशित करने वाले अखबारों के संपादकों तथा पत्रकारों के यहां नाराज लोगों ने मेल, फोन, एसएमएस आदि के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है.

लखनऊ में एक ही वर्ग के दो समुदायों के बीच हुई हिंसक घटनाओं में अंग्रेजी अखबारों की रिपोर्टिंग से मुस्लिम समुदाय के तमाम लोग नाराज हैं. रिपोर्टिंग में अंग्रेजी अखबारों ने सही तथ्‍यों को प्रकाशित करने की बजाय पुलिस द्वारा बताई गई कहानी को ही खबर बना दिया. इस समुदाय के लोगों ने खासकर हिंदुस्‍तान टाइम्‍स और टाइम्‍स आफ इंडिया की रिपोर्टिंग पर नाराजगी जताई है. गलत व एकपक्षीय खबर प्रकाशित करने वाले अखबारों के संपादकों तथा पत्रकारों के यहां नाराज लोगों ने मेल, फोन, एसएमएस आदि के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है.

 लखनऊ में जुलूस निकालने के आपसी विवाद के बाद माहौल बिगड़ गया था, जिसमें पुलिस-प्रशासन की भारी चूक शामिल थी. परन्‍तु अंग्रेजी अखबारों ने इस पूरे विवाद एवं झड़प को छेड़खानी का मामला बता दिया. इसके चलते असली विवाद के कारण दब गए. पुलिस अपनी असफलता को छुपाने के लिए छेड़खानी की बात को प्रसारित कराया, जिसमें अंग्रेजी अखबारों ने पूरा साथ दिया. मुस्लिम समुदाय के लोग इसी एकपक्षीय खबरों के चलते नाराज हुए.

अल्‍पसंख्‍यक वर्ग के कई लोग इन दोनों अखबारों के लखनऊ कार्यालय में फोन करके अपनी शिकायत दर्ज कराई तथा रिपोर्टिंग पर नाखुशी जाहिर की. कुछ लोगों ने सीधे संपादकों को फोन करके इस तरह की रिपोर्टिंग की भर्त्‍सना की. मुस्लिम वर्ग के लोगों का कहना है कि अंग्रेजी अखबारों के रिपोर्टर मौके पर जाकर सही खबर लाने की बजाय, सही रिपोर्ट लिखने की बजाय, पुलिस द्वारा बताई गई एक पक्षीय बातों के आधार पर गलत स्‍टोरी प्रकाशित कर देते हैं. इससे एक वर्ग के लोगों की भावनाएं आहत होती हैं. कुछ लोगों ने तो हिंदुस्‍तान की संपादक सुनीता एरन को भी फोन करके अपनी नाराजगी जताई. कुछ लोग पत्र लिखकर भी इन अखबारों के प्रति अपनी नाराजगी जता रहे हैं.

उल्‍लेखनीय है कि लखनऊ के पुराने इलाके में हिंसक झड़प में एक युवक की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे. ये हिंसक झड़पें लगातार दो दिन तक चली. पुलिस के सामने भी पत्‍थरबाजी की घटनाएं हुईं. पुराने इलाके में भारी संख्‍या में पुलिस-पीएसी तथा अर्द्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए हैं. इसके बावजूद वहां तनाव बना हुआ है. लिहाजा इस समुदाय के लोगों को डर है कि मीडिया की इस तरह की खबरें माहौल को और बिगाड़ सकती हैं. नीचे अखबार में प्रकाशित खबर. 

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