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लखनऊ के पत्रकारों को मिलेगा घर, होगा मुफ्त इलाज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पत्रकारों की चांदी होने वाली है। प्रदेश सरकार ने राजधानी के पत्रकारों के लिए आवासीय योजना शुरू करने की घोषणा की है। पीजीआई में अब पत्रकारों का निशुल्क इलाज भी हो सकेगा। इस मांग को माने जाने के बाद उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, श्रम मंत्री डॉ. वकार अहमद और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता विधान परिषद सदस्य राजेन्द्र चौधरी का आभार व्यक्त किया है। उपजा ने श्रम दिवस (एक मई) के मौके पर प्रदेश सरकार को 13 सूत्री मांग पत्र दिया था जिसमें ये दोनों मांगें शामिल थीं।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पत्रकारों की चांदी होने वाली है। प्रदेश सरकार ने राजधानी के पत्रकारों के लिए आवासीय योजना शुरू करने की घोषणा की है। पीजीआई में अब पत्रकारों का निशुल्क इलाज भी हो सकेगा। इस मांग को माने जाने के बाद उ.प्र.जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, श्रम मंत्री डॉ. वकार अहमद और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता विधान परिषद सदस्य राजेन्द्र चौधरी का आभार व्यक्त किया है। उपजा ने श्रम दिवस (एक मई) के मौके पर प्रदेश सरकार को 13 सूत्री मांग पत्र दिया था जिसमें ये दोनों मांगें शामिल थीं।

     उपजा द्वारा आयोजित श्रमिक दिवस समारोह में राज्य सरकार के सामने तेरह सूत्री मांगे रखी थी। समारोह के अतिथि श्रम मंत्री डॉ. वकार अहमद शाह तथा समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने पत्रकारों को आश्वस्त किया था कि तेरह सूत्री मांग पत्र गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने इस मांग को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात कर पूरा कराने का आश्वासन भी दिया था। उपजा के प्रदेश अध्यक्ष रतन कुमार दीक्षित तथा लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक मिश्र ने पत्रकारों की दो महत्वपूर्ण मांगे माने पर प्रदेश सरकार एवं समाजवादी पार्टी का आभार व्यक्त किया है। श्री दीक्षित ने बताया कि तेरह सूत्री मांग पत्र में प्रमुख मांग पीजीआई में मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए निशुल्क चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध कराने संबंधी थी। जबकि राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में नई पत्रकार कालोनी की मांग क्रमांक दस पर थी। श्री दीक्षित ने आशा व्यक्त की है कि प्रदेश सरकार यथाशीघ्र मांग पत्र की अन्य 11 मांगों को भी पूरा करेगी।
 
उपजा की तेरह सूत्रीय मांगे-  

1. पत्रकारों को राजधानी के संजय गांधी स्नातकोत्तर एवं चिकित्सा शिक्षा संस्थान (एसजीपीजीआई) तथा समस्त मेडिकल कॉलेजों में नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाए। साथ ही समस्त दवाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। जनप्रतिनिधियों एवं सरकारी कर्मचारियों की भांति ही पत्रकारों के इलाज के लिए पीजीआई में स्थायी निधि की व्यवस्था करायी जाए। इसके लिए सूचना विभाग को नोडल विभाग के रूप में नामित किया जाए।

2. गंभीर बीमारी की स्थिति में राज्य के बाहर प्रख्यात चिकित्सा संस्थानों यथा एम्स नई दिल्ली, टाटा कैंसर इंस्टीट्यूट मुम्बई और मेदान्ता, गुड़गांव में इलाज कराने की स्थिति में पत्रकारों के चिकित्सा व्यय की धनराशि सीधे संस्थानों को भेजी जाए अथवा प्रतिपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर तत्काल कराने की व्यवस्था की जाए।

3. जिला मुख्यालयों पर स्थित संयुक्त एवं जिला चिकित्सालयों में पूर्व की भांति नि:शुल्क चिकित्सा, नि:शुल्क प्राइवेट वार्ड आबंटन और दवाओं की लोकल परचेज की व्यवस्था पुन: प्रदान करायी जाए। इस हेतु नवीन शासनादेश जारी कराया जाए।

4.  गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों एवं प्रेस कर्मचारियों की चिकित्सा सुविधा हेतु सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ.प्र. एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा संयुक्त रूप से चिकित्सा कार्ड जारी कराया जाए। (उक्त प्रकृति के कार्ड की पूर्व में व्यवस्था थी) मान्यता प्राप्त पत्रकारों के परिचय पत्र पर नि:शुल्क चिकित्सा का उल्लेख किया जाए।
5. पत्रकार उत्पीड़न की घटनाओं को तत्काल रोकने तथा मीडिया और प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने हेतु जिला स्तर पर सात सदस्यीय सौहार्द समितियों (स्थायी समतियों) का पुन: गठन कराया जाए। समिति में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, सूचना अधिकारी, पत्रकारों की ट्रेड यूनियनों का एक-एक प्रतिनिधि, इलेक्ट्रानिक मीडिया का एक प्रतिनिधि (मान्यता प्राप्त पत्रकार) को शामिल किया जाए।
6. राज्य स्तर पर पत्रकार उत्पीड़न के मामलों के निस्तारण तथा अन्य समस्याओं पर विचार हेतु पत्रकार बन्धु का गठन किया जाए। पत्रकार बन्धु में गृह सचिव, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था), सूचना निदेशक, श्रम सचिव, स्वास्थ्य सचिव, पत्रकारों की राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त दोनों ट्रेड यूनियनों के दो-दो प्रतिनिधियों को सम्मिलित किया जाए।
7. उ.प्र.राज्य प्रेस मान्यता समिति एवं उ.प्र.राज्य विज्ञापन मान्यता समिति का तत्काल गठन कराया जाए। प्रेस मान्यता समिति के गठन हेतु पूर्व निर्धारित मानक ही अपनाए जाएं तथा अंतिम अधिसूचित मान्यता नियमावली (2003) को लागू किया जाए।
8. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उ.प्र. की सूचना निदर्शिनी (सूचना डायरी) का पुन: प्रकाशन आरम्भ कराया जाए।
9. उत्तर प्रदेश के पत्रकारों की पेंशन और जीवन बीमा के लिए प्रेस इंफारमेशन ब्यूरो नई दिल्ली की तर्ज पर राज्य में व्यवस्था की जाए। (केन्द्र सरकार पीआईबी मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए निशुल्क चिकित्सा, पेंशन और बीमा सुविधा प्रदान करती है। साथ ही कई अन्य राज्यों ने इस दिशा में सार्थक पहल की है।)
10. मीडिया के व्यापक विस्तार को दृष्टिगत रखते हुए श्रमजीवी पत्रकारों के लिए राजधानी में नई पत्रकार कालोनी तथा सभी जिलों में पत्रकार कालोनियों का निर्माण कराया जाए। समस्त आवासीय प्राधिकरणों एवं आवास विकास परिषद की आवासीय योजनाओं में पत्रकारों को जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों की भांति प्राथमिकता एवं रियायती दरों पर आवास एवं भूखण्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
11. उत्तर प्रदेश पर्यटन निगम के प्रदेश में निर्मित अतिथि गृहों एवं होटलों में पत्रकारों को प्रवास के दौरान 75 प्रतिशत रियायत पर अल्पकालिक आवासीय सुविधा उपलब्ध करायी जाए।
12. राज्य के समस्त श्रम न्यायालयों एवं श्रम न्यायाधिकरणों (लेबर ट्रिब्यूनल) में स्थायी एवं पूर्णकालिक पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। पीठासीन अधिकारी का कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व ही पीठ पर नियुक्ति की जाए। ताकि श्रमिकों से जुड़े मामलों की सुनवाई एवं न्याय में विलंब न हो।
13. मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू कराने हेतु त्रि-पक्षीय समिति का अतिशीघ्र गठन कराया जाए। समिति में समाचार पत्र उद्योग के प्रतिनिधि, शासन के प्रतिनिधि एवं पत्रकार यूनियनों के प्रतिनिधियों को सम्मिलित किया जाए।
 
 

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