: बड़े अफसर के दफ्तर वाली आग पर पानी फेंक रहे हैं बड़े-बड़े पत्रकार :
लखनऊ से कुमार सौवीर की रिपोर्ट
आप इंडिया टीवी देखते हैं ना। हां, तो फिर ठीक है। उप्र सूचना विभाग में इसी तर्ज में आग लगी है। रहस्यमयी आगजनी। आग भयावह थी। पूरा दफ्तर भस्म हो गया। सारा सामान भस्मीभूत हो गया। अलमारी में रखी फाइलें तक फुंक गयीं। कमरे में रखा कम्यूटर-टीवी तक राख हो गया। लेकिन कमरे के पर्दे पर कोई भी शिकन तक नहीं हुई। दरवाजा भी पूरी तरह सुरक्षित रहा।
अब सूचना निदेशालय के कमरों से लेकर बाहर चाय-पकौड़ी की दूकानों और शौचालयों तक पर यह चर्चा शुरू हो गयी है कि आखिर यह कैसी सीमित, लेकिन भयावह आग थी। बहस-मुबाहिसों में यह भी पूछा-जाना जा रहा है कि इस आगजनी ने किसका पेट संतुष्ट कर दिया। जाहिर है कि आग चाहे कोई भी हो, हमेशा किसी न किसी का पेट बुझाती जरूर है। फिर ऐसे में यह पूछना लाजमी है कि सूचना विभाग की इस आग के दम पर किसका तवा गरम हुआ, किसकी रोटी सिंकी और कौन-कौन लोगों-अफसरों के पेट के बीच यह रोटी बंट गयी।
यह हादसा करीब एक हफ्ता पुराना है। अचानक लोगों को पता चला कि सूचना विभाग के एक बड़े अफसर के कमरे में आग लग गयी है और इस घटना में यह साहब का दफ्तर पूरी तरह फुंक गया है। आग ने इस कमरे में रखी मेज-कुर्सी और उस पर रखी फाइलों को तो अपने आगोश में ले लिया था, साथ ही कमरे में रखे कम्यूटर और टीवी तक को राख बना डाला था। इतना ही नहीं, इस कमरे की अलमारियों में रखी फाइलें भी आग की भेंट चढ़ गयी थीं।
यह आग बेहद रहस्यमय थी। आप कह सकते हैं कि यह बेहद नियंत्रित या फिर बाकायदा प्रयोजित थी। कारण यह कि यह जितनी जल्दी फैली, उतनी ही तेजी से खत्म हो गयी। चूंकि यह विभाग के एक चर्चित अफसर का मामला था, इसलिए आनन-फानन उस पर पानी फेंकने की कवायद शुरू हो गयी। अब सूचना विभाग के बड़े अफसर इस आगजनी को दबाने में जुटे हैं, जबकि सूचना विभाग से विज्ञापन हासिल करने वाले पत्रकारों ने इस आग को छिपाने-दबाने का अभियान छेड़ दिया है। लेकिन अब यह सवाल तो भड़क ही उठने लगा है कि आखिरकार इस आग में आखिरकार ऐसा क्या बर्बाद हुआ, जिसे बड़े अफसरों ने आनन-फानन धो-साफ करा दिया। पूर्वांचल के एक माध्यम श्रेणी के अखबार के एक मालिक का सवाल है कि इस आगजनी की जांच तो तत्काल होनी चाहिए, वरना सूचना विभाग अब जल्दी ही आगजनी विभाग बन जाएगा।
कुमार सौवीर यूपी के वरिष्ठ और बेबाक पत्रकार हैं.






