Sandeep Verma : सन 2004 में लखनऊ दूरदर्शन के तत्कालीन निदेशक प्रभु झिंगरन एक लाख दस हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किये जाते हैं. आज दस साल बाद उन्हें तीन साल की कैद और रिश्वत के बराबर रकम का जुर्माना अदा करने की सजा दी जाती है.
मुझे लगता है जैसे डाकू अपनी लूट की रकम से मंदिर में प्रसाद और भेंट चढ़ाकर अपने पापों से मुक्त हो जाता है, उसी भांति हमारी न्याय व्यवस्था और देश भी इतना करके ही ऐसे लोगों को उनके आपराधिक कृत्यों को उनके पुण्य में बदलने का काम करते हैं. देश का कोई भी क़ानून ऐसे अपराधी सरकारी कर्मचारियों को उनकी शेष आपराधिक कमाई को सरकारी खजाने में जमा करने से रोकता है… क्या फिर भी जन-लोकपाल जैसे किसी सख्त क़ानून की आवश्यकता आपको महसूस नहीं होती.
संदीप वर्मा के फेसबुक वॉल से.






