Abhishek Srivastava : ये देखिए, हमारे समय की सबसे ज़रूरी तस्वीर.. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ तहलका के संपादक तरुण तेजपाल और उनकी टीम। बताते हैं कि जिसे छत्तीसगढ़ में तहलका की फ्रैंचाइजी मिली है, वह एस्सार कंपनी का अधिकारी है।
यह सच हो या झूठ, लेकिन यह इकलौती तस्वीर सोनी सोरी नाम की आदिवासी महिला के साथ सबसे बड़ा अन्याय है- एसपी अंकित गर्ग और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए अन्याय से भी बड़ा- जिसे बेचकर तहलका ने अपनी छवि को लगातार चमकाया था और आज अपनी समूची क्रांतिकारिता को उसने राज्य के हाथों गिरवी रख दिया है। धंधा करने में भी एक लिहाज होता है। लगता है तहलका सब शर्म लिहाज घोल कर पी गया है। जियो शोमा चौधरी, जुग-जुग जियो तेजपाल जी…

Chandan Kumar सर रोटी किसे नहीं चाहिए. यह अलग बात है कि किसी का काम सूखी रोटी से चल जाता है, तो किसी को कुछ और चाहिए…
Sushant Jha देखिये, आप 'सरोकार' की आलोचना करते जा रहे हैं। कहीं आप दक्षिण तो नहीं हो गए हैं..
Rahul Kumar तहलका बिक गया है या नहीं, इस निष्कर्ष पर तहलका के कंटेंट से पहुंचिए, फोटो में शोमा और तरुण किसके साथ खड़े हैं, इससे नहीं.
Mahtab Alam ओ वुमनिया की जगह ओ तहलका सुने ! http://www.youtube.com/watch?v=PBqaM8txf9I
Akash K. Prasad दुर्भाग्यपूर्ण! सोनी सूरी के केस के लिए मीडिया में बस तहलका से ही एक उम्मीद थी. अब तो वो भी न रही…
Mahtab Alam ye bhi dekha jay: http://kafila.org/2011/10/12/everybody-loves-a-good-war-tehelka-and-essar-bobby-kunhu/
Mohammad Anas पत्रिका चलाने के लिए विज्ञापन ज़रूरी होता है,सरकार के पास पैसा जनता का है रमन सिंह का पुश्तैनी नहीं ।तहलका का साथ रमन सिंह को चाहिए वह भी विज्ञापन तक ही ,तहलका को रमन सिंह या अंकित गर्ग नहीं और यह तहलका की ख़बरों में आसानी से देखा जा सकता है ।
Mahtab Alam aur ye bhi: http://kafila.org/2011/11/03/an-open-letter-to-tarun-tejpal-hartman-de-souza/
Rahul Kumar @ akash – आप बहुत अधीर हैं, किसी ने कहा और आप मान गए कि अब सोनी सूरी मीडिया से गायब हो जाएगी… उम्मीद रखिए… तहलका एक मात्र ऐसी संस्था है जो विज्ञापन के प्रभाव या लोभ में आकर खबरें हजम नहीं करती…
Mahtab Alam @Rahul- sir aap upar wala post padh lijiyega aur ye bhi, sara bharam door ho jayega: http://blogs.wsj.com/indiarealtime/2011/11/11/food-for-thought-thinkfests-bitter-aftertaste-2/
भूपत शूट तहलका और रमन सरकार का तालमेल हैं. तहलका को धन चाहिए, जो विज्ञापन से मिलता हैं और रमन को एक और प्रचार का अलग घोड़ा !
Mohammad Anas भाई फिर इस तरह से तो हो चुकी पत्रकारिता … थोड़ी बहुत लचक मटक सब जगह होती है ,हम इंसान भी पुरी तरह से बेहतर नहीं .कम से कम तहलका के साथ ऐसा बर्ताव तो न ही करें आप लोग
Akash K. Prasad हाँ राहुल जी बिलकुल उम्मीद रखे हुए हैं हम तो! बस रमन सिंह को इनके साथ में देखकर थोडा शॉक में आ गए…
Mahtab Alam is photo ke sath background me ye gana sunana achcha rahega : http://www.youtube.com/watch?v=WlfXDBu6AOg
राकेश कुमार सिंह किसी के साथ खड़ा होकर फोटो खिचवा लेने से वह उसका अनुयायी या गुलाम नहीं हो जाता, छत्तीसगढ़ में तहलका की फ्रैंचाइजी मिलने से क्या तहलका की धार कुंठित हो जाएगी कभी नहीं आज की तिथि में तहलका जैसा निर्भीकता किसी के पास नहीं है। आपने "ये देखिए हमारे समय की सबसे ज़रूरी तस्वीर" तो देख ली किन्तु रास्त्र गौरव /शान से जुड़े रूपये के प्रतीक चिन्ह चयन में व्यापक भ्रस्ताचार को उजागर करने वाली न्यूज़ शायद नहीं पढी है। दिसम्बर १ ० इस मुद्दे पर लडाई चल रही थी बाद में डेल्ही हाई कोर्ट में ३ याचिकाए चली किसी ने लॉ न्यूज़ रिपोर्टिंग नहीं की जिसने शुरू की तुरंत चुप हो गया, बड़े से बड़े चैनलों के हाथ पाँव फूल गए किन्तु तहलका ने इसे छापा डंके की चोट पर जो तहलका को "किसी परिधि" में बंधा हुआ मानते है वह खबर पढ़े और अपनी धारणा पर पुनर्विचार करे। और इंतना ही नहीं जिस मीडिया घराने को स्वतंत्र मानते हो उनके मुखिया से पूछ लीजीयेगा की इस खबर की खबर आपको थी की नहीं। पढिये साहसिक खबर और तहलका का आभार जतायिए–राहुल कोटियाल की रिपोर्ट "तहलका" http://www.tehelkahindi.com/index.php?news=1726
Vishnu Sharma shameful act. I am feeling betrayed. What to do next?
Salman Rizvi तहलका का शुरुआत से पाठक हूँ जबसे वो शुरू हुयी है और छत्तीसगढ़ और रमन सिंह के ऐड उसमे बराबर आया करतें हैं ये कोई नयी बात नहीं है/लेकिन मैंने कभी न देखा की इससे तहलका ने कभी भी ख़बरों में कोई कमी रखी हो सच्चाई को लेकर! ये शायद एक हिस्सा भर है उनके छत्तीसगढ़ को लेकर!
Mahtab Alam Salman Rizvi sahab, upar maine kuch link post kiye hain.
Salman Rizvi जी भाई गौर किया मैंने/See Translation
Mahtab Alam aur bhi bahut sari cheezen hain.
Salman Rizvi भाई सभी को देख रहा हूँ/ हा हा हा/…
Ranjit Verma kuchh log krantikari chhavi banate hi isliye hain taki bazaar se achchhi keemat vasool saken… ye kisi bhi dhara ke lag sakte hain… facebook ke aane ke baad yeh kaam aur aasan ho gaya hai… hing lage na fitkari aur rang chokha
Abhishek Srivastava Ranjit Verma हींग नहीं हर्र… परंपरा में ज़रा सा लटपट विश्वसनीय से विश्वसनीय विचार को लटपटा सकता है।
पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.






