Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal

सुख-दुख...

ललितपुर में फर्जी पत्रकारों के आगे घुटने टेकने को मजबूर होते जा रहे असली पत्रकार

ललितपुर : बुन्देलखण्ड का ललितपुर जिला भले ही विकास के मामले में नई इबारत न लिख पाये किन्तु फर्जी पत्रकारों के मामले में इस छोटे से जिले ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ को भी पीछे छोड़ दिया है। जहां देखों फर्जी पत्रकारों का गैंग जनता को ठगने के लिए मौजूद है। बुन्देलखण्ड जहां पिछले तीन-चार वर्षों से सूखे की मार से होकर गुजर रहा है, वहीं ललितपुर में अगर देखा जाये तो इस जिले में फर्जी पत्रकारों की बाढ़ सी आ गई है। यहां तक कि ललितपुर में अपराधिक किस्म के लोग भी पत्रकारिता का नकाब ओढ़कर खुले आम इस पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे है।

ललितपुर : बुन्देलखण्ड का ललितपुर जिला भले ही विकास के मामले में नई इबारत न लिख पाये किन्तु फर्जी पत्रकारों के मामले में इस छोटे से जिले ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ को भी पीछे छोड़ दिया है। जहां देखों फर्जी पत्रकारों का गैंग जनता को ठगने के लिए मौजूद है। बुन्देलखण्ड जहां पिछले तीन-चार वर्षों से सूखे की मार से होकर गुजर रहा है, वहीं ललितपुर में अगर देखा जाये तो इस जिले में फर्जी पत्रकारों की बाढ़ सी आ गई है। यहां तक कि ललितपुर में अपराधिक किस्म के लोग भी पत्रकारिता का नकाब ओढ़कर खुले आम इस पवित्र पेशे को बदनाम कर रहे है।

जिले के महरौनी तहसील में झांसी के एक प्रमुख अखबार के एक वरिष्ठ पत्रकार को पत्रकारिता का ऐसा नशा है कि वह महीने भर जिला कारागार में बंद रहने के बाद भी इस शौक को बंद नहीं कर पा रहे हैं। अखबार द्वारा बाकायदा उनकी बर्खास्तगी की विज्ञप्ति प्रकाशित करने के बाद भी वह न तो खुद को पत्रकार बताने में गुरेज कर रहे हैं, और न ही पत्रकारिता बंद कर रहे हैं। ठीक यही स्थिति ललितपुर शहर की बनी हुई है। ज्यादातर फर्जी पत्रकार प्रिंट से जुड़कर जनता को गुमराह कर रहे हैं।

एक पत्रकार महोदय खुद की ही अपहरण की साजिश में जेल की सजा काट आये है, किन्तु उनका पत्रकारिता से मोह भंग नहीं हो रहा है। जिस वाहन पर देखो प्रेस लिखा हुआ है। ऐसा नहीं है कि ललितपुर के वास्तविक पत्रकारों ने फर्जी पत्रकारों का विरोध न किया हो किन्तु जब भी विरोध किया, हमेशा काम करने वालों को ही मुंहकी खानी पड़ी। अधिकारियों पर भी फर्जी पत्रकार ऐसा जादू करते हैं कि मीडिया के मुख्य कर्ता धर्ता उन्हें वहीं नजर आते हैं, वहीं कुछ अधिकारियों का फर्जी पत्रकारों को संरक्षण भी है। अब भला इस स्थिति में वास्तविक पत्रकारों के समक्ष हालात से समझौता करने के अलावा और कोई चारा शेष नहीं है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadas … मोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia  …

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...