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लाइव इंडिया में हलचल, सतीश के सिंह के जाने की चर्चा

'लाइव इंडिया' न्यूज चैनल आपको याद होगा. वही जिसे पहले जनमत नाम से अधिकारी ब्रदर्स ने शुरू किया था. बाद में इसे एचडीआईएल ने खरीद लिया. फिर इसे महाराष्ट्र की एक चिटफंड कंपनी ने खरीद लिया. यह चैनल दुर्भाग्य का मारा रहा है. जिसके भी पास गया, उसका नाश कर आगे निकल गया.

'लाइव इंडिया' न्यूज चैनल आपको याद होगा. वही जिसे पहले जनमत नाम से अधिकारी ब्रदर्स ने शुरू किया था. बाद में इसे एचडीआईएल ने खरीद लिया. फिर इसे महाराष्ट्र की एक चिटफंड कंपनी ने खरीद लिया. यह चैनल दुर्भाग्य का मारा रहा है. जिसके भी पास गया, उसका नाश कर आगे निकल गया.

यानि चैनल तो नहीं बंद होता, लेकिन हां, जो इसका मालिक होता है, वह जरूर भारी परेशानी में पड़ जाता है. यही कारण है कि यह चैनल जिसके पास जाता है, कुछ ही दिनों बाद वह चैनल के इंद्रजाल में फंसकर या फिर चैनल से मुक्ति पाने की चाहत लिए छटपटाने लगता है. इन दिनों लाइव इंडिया न्यूज चैनल की मालिक कंपनी 'समृद्ध जीवन' नामक कंपनी है जो महाराष्ट्र बेस्ड है. इनका चिटफंड का कारोबार है और जनता से उगाहा हुआ ढेर सारा पैसा है. कुछ नेताओं की ब्लैकमनी के सहयोग से इस चैनल को एचडीआईएल से खरीदा गया.

जी न्यूज के संपादक रहे सतीश के सिंह को चैनल का संपादक बनाया गया. अब खबर है कि चैनल के अंदरखाने काफी उठापटक चल रही है. सतीश के सिंह से प्रबंधन बुरी तरह नाराज है. कई तरह के घपलों-अनियमितताओं का प्रकरण अंदरखाने चल रहा है. डिस्ट्रीव्यूशन का खेल यहां भी खेला गया है. टीआरपी धड़ाम है. जब चैनल खरीदा था इन चिटफंडियों ने तो टीआरपी चार के आसपास थी. अब तो बिलकुल टीआरपी नहीं है. बताया जाता है कि खफा प्रबंधन अब सतीश के सिंह के लोगों पर भी गाज गिरा रहा है. एक सज्जन जी न्यूज से आए थे और बाद में उनको यहां से भी जाना पड़ा. ताजी गासिप के मुताबिक सतीश के सिंह की बातचीत नवीन जिंदल वाले मीडिया हाउस में हो गई है. जिंदल ने मतंग सिंह के पाजिटिव मीडिया ग्रुप में मेजारिटी स्टेक खरीद लिया है और चैनलों को पूरी गंभीरता से खड़ा करने में जुटे हुए हैं.

सतीश के सिंह जी न्यूज में रहे हैं और उन्हें जी ग्रुप के सारे राज मालूम है इसलिए इन दिनों जी ग्रुप को निपटाने में जुट जिंदल के लिए सतीश के सिंह काफी काम के आदमी लगते हैं. चर्चा तो पिछले महीने ही थी कि 31 जुलाई सतीश के सिंह का लाइव इंडिया में लास्ट दिन होगा, पर ऐसा हुआ नहीं. देखना है कि लाइव इंडिया में सतीश के सिंह को प्रबंधन कितने दिन और रख पाता है. हालांकि चिटफंडियों के चैनलों की एक खास बात यह होती है कि अगर किसी ने इनके धंधे और कारनामों का ब्योरा इकट्ठा कर लिया तो ये चिटफंडिये फिर तुरंत उसके दबाव में आ जाते हैं और आफिस से विदा देने के बाद भी लोगों को सेलरी देते रहते हैं.

सतीश के सिंह वैसे भी टीवी के उस गैंग के सदस्य हैं जिसका दावा है कि उनके बिना हिंदी न्यूज इंडस्ट्री का पत्ता भी नहीं खड़क सकता और हिंदी टीवी न्यूज इंडस्ट्री में ये जो चाहे करा सकते हैं. अजीत अंजुम, विनोद कापड़ी, सतीश के सिंह आदि इस पंथ के सक्रिय पथिक हैं. ऐसे में लाइव इंडिया मैनेजमेंट का सतीश के सिंह से पार पा पाना आसान नहीं लगता क्योंकि इन संपादकों की एकजुटता से दबाव पाने की ताकत पीएमओ तक है और कोई भी मालिक पीएमओ को झेलना नहीं चाहेगा, खासकर वो तो और भी जिसके धंधे चिटफंड के हों. ऐसे में सतीश के सिंह को लेकर जो कानाफूसी हो रही है, उसका असल सच क्या है, यह तो खुद सतीश के सिंह और लाइव इंडिया चैनल के मालिक बता सकते हैं. फिलहाल मीडिया मार्केट में सतीश के सिंह को लेकर तरह-तरह के चर्चे जारी हैं. (कानाफूसी)

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