पटना : 2 सितंबर को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जनता दरबार अन्य दिनों से अलग था। मंत्री के नाम पर बस दो मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और रमई राम उपस्थित थे। बाकी अन्य सीटों पर जनता की समस्याओं के निराकरण के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी मौजूद थे। इस दौरान एक आईपीएस अधिकारी से अनौपचारिक बातचीत का मौका मिला। हमारे साथ एक और साथी पत्रकार थे। मैंने अपना परिचय दिया- मेरा नाम वीरेंद्र यादव है। आइपीएस ने कहा- आज से 20 पहले एक यादव पत्रकार मिला था रांची में, महेंद्र यादव और आप दूसरे यादव पत्रकार हैं, जिनसे मेरी मुलाकात हो रही है।
बातचीत का सिलसिला चल रहा था। फिर पुलिस व मीडिया में जाति को लेकर भी चर्चा हुई। इसके बाद हमारे साथ वाले पत्रकार से उस आईपीएस अधिकारी ने पूछा- आप किस जाति के हैं? पत्रकार ने कहा- ओबीसी में आते हैं, एनेक्चर वन में हैं। इतना सुनने के बाद पुलिस अधिकारी ने कहा- हम आपको कायस्थ समझते थे, इसलिए फोन पर खुलकर बातचीत नहीं करते थे। बातों का सिलसिला आगे बढ़ा और बात जाति पर केंद्रित हो गयी। उन्होंने कहा- '''लालू, नीतीश, पासवान सब भूमिहार परस्त हैं। जब भी मौका मिलता है तो भूमिहारों को ही प्राथमिकता देते हैं। लालू यादव ने अपने कार्यकाल में भूमिहार को डीजीपी बनाया। नीतीश कुमार ने भी दोनों शीर्ष पदों पर भूमिहार को बैठा रखा है। आंख में थोड़ी भी शर्म नहीं है। जिस समाज की राजनीति करते हैं, उसका थोड़ा भी ख्याल नहीं रखते हैं। लालू यादव के कार्यकाल में एक आइपीएस उनके साथ संबंधों को लेकर बदनाम हुआ, उसकी भी मदद लालू यादव ने नहीं की।''
बात को प्रशासनिक चर्चा से हटाते हुए उन्होंने सामाजिक चर्चा की ओर मोड़ा। उन्होंने कहा, सब यादव भूमिहार बनना चाहता है। लालू यादव ने भी एक बार कहा था कि यादव-भूमिहार में रोटी-बेटी का संबंध होना चाहिए। सबका आईकॉन भूमिहार ही है। आइपीएस अधिकारी ने बात को आगे बढ़ाया। नालंदा का अधिकांश कुर्मी हरिजन का जाति प्रमाणपत्र बनाकर इंजीनियर, डॉक्टर बना हुआ है। वह भी हरिजनों को सम्मान नहीं देता है। मीडिया, समाज और सरकारी सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में हुई चर्चा से बात स्पष्ट हुई कि सामाजिक उत्पीड़न, शोषण और उपेक्षा के खिलाफ समाज में आक्रोश व्याप्त है। लेकिन इसका कोई विकल्प भी नहीं दिखता है।
पटना से पत्रकार वीरेंद्र यादव की रिपोर्ट. संपर्क: [email protected]






