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इलाहाबाद

लिपिक का वेतन 20 वर्षों से एक हजार

अम्बेडकरनगर : उत्तर प्रदेश के जपनद अम्बेडकरनगर स्थित सहायक महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय में एक शिविर सहायक पिछले दस वर्षों से भी अधिक समय से नियत वेतन पर सेवारत है, उसके साथ के नियुक्त सभी कर्मचारियों को तो नियमित शिविर सहायक के रूप में नियुक्त कर दिया गया है, किन्तु सभी औपचारिकताएं एवं अर्हताएं पूरी करने के बावजूद एक शिविर सहायक को विनियमितीकरण के लिए भटकना पड़ रहा है।

अम्बेडकरनगर : उत्तर प्रदेश के जपनद अम्बेडकरनगर स्थित सहायक महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय में एक शिविर सहायक पिछले दस वर्षों से भी अधिक समय से नियत वेतन पर सेवारत है, उसके साथ के नियुक्त सभी कर्मचारियों को तो नियमित शिविर सहायक के रूप में नियुक्त कर दिया गया है, किन्तु सभी औपचारिकताएं एवं अर्हताएं पूरी करने के बावजूद एक शिविर सहायक को विनियमितीकरण के लिए भटकना पड़ रहा है।

उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने 15 फरवरी 2000 को इस कर्मचारी को विनियमितीकरण करने एवं वेतनमान दिये जाने का आदेश पारित किया था, किन्तु उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन विभाग में नही हो रहा है, इस कर्मचारी ने थक हार कर एक बार फिर से महानिरीक्षक निबंधन उत्तर प्रदेश इलाहाबाद से विनियमितीकरण एवं शासन द्वारा मान्य वेतनमान देने की मांग की है। मामला अतुल कुमार द्विवेदी का है। वे वर्तमान में शिविर सहायक नियत वेतनमान पर कार्यालय सहायक महानिरीक्षक निबंधन अम्बेडकरनगर में तैनात है। उनकी नियुक्ति निबंधन विभाग में महानिररीक्षक निबंधन द्वारा दिनांक 3 नवम्बर 1990 को लिपिक के पद पर मुख्यालय इलाहाबाद में की गयी थी। नियुक्ति की तिथि से समाचार लिखे जाने तक द्विवेदी निरन्तर विभाग द्वारा दिये गए दायित्वों का उत्तरदायित्वपूर्ण ढंग से निर्वहन कर रहे है। दुर्भाग्यवश अभी तक उन्हें नियत वेतनमान एक हजार रू. मात्र मासिक वेतन विभाग द्वारा दिया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि द्विवेदी को 23 नवम्बर 1990 को लिपिक पद पर तैनात किया गया था। आदेश थे कि द्विवेदी को लिपिक पद पर दिनांक 17 फरवरी 1991 या नियमित चयन तक जो भी पहले हो मुख्यालय में नियुक्त किया जाता है। इसी तिथि से वह समाचार लिखें जाने तक कार्य कर रहा था दिनांक 30 जुलाई 1991 को सहायक महानिरीक्षक निबंधन बाराबंकी के कार्यालय में शिविर सहायक के पद पर उन्हें 950/1500 के वेतनमान पर नियमित शिविर सहायक के रूप में कर दिया गया, किन्तु उनका नियमित चयन विभाग द्वारा नहीं किया गया। जबकि उसके साथी अभिनन्दन मिश्रा का चयन नियमित कर दिया गया जबकि द्विवेदी मिश्रा की ही भांति सभी अर्हताएं रखता था। अतुल कुमार द्विवेंदी की नियुक्ति की तरह ही विनोद कुमार श्रीवास्तव, कृपा सिन्धु मिश्र, धनेश्वर प्रसाद, प्रमोद नारायण शुक्ल एवं उपेन्द्र नाथ सिन्हा, मुरारी लाल शर्मा, द्विवेश प्रसाद तिवारी, राम अभिलाष तिवारी को तदर्थ वेतन पर छह माह अथवा एक वर्ष के लिए रखा गया। इनमें से सभी कर्मचारी महानिरीक्षक निबंधन द्वारा नियमित किये जा चुके है, किन्तु द्विवेदी को आज तक नियमित नहीं किया गया।

विनियमितीकरण न होने के कारण अतुल कुमार द्विवेदी ने एक रिट याचिका न्यायालय में योजित की जिस पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने द्विवेदी को हटाये जाने पर रोक लगा दी, जिसके आधार पर वह अभी भी सेवाएं दे रहा है। द्विवेदी वर्ष 1990 से आज तक निरंतर शिविर सहायक के पद पर कार्यकर रहा है, किन्तु विभाग द्वारा नियत वेतनमान मात्र एक हजार रुपये मात्र ही दिया जा रहा है, जबकि वह नियमित लिपिक के रूप में पूरा कार्य सम्पादित कर रहा है। मजेदार बात यह है। कि समय-समय पर महानिरीक्षक निबंधन द्वारा उसका स्थानान्तरण भी किया जाता रहा है। उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने 15 फरवरी 2000 को अतुल कुमार द्विवेदी को विनियमितीकरण करने एवं वेतनमान दिये जाने का आदेश पारित किया, किन्तु उच्च न्यायालय के आदेशों का अनुपालन विभाग में नहीं हो रहा है। आखिर यह कर्मचारी जाए तो जाए कहा?

इलाहाबाद से मोहित कुमार द्विवेदी की रिपोर्ट.

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