बधाई यशवंत जी, भड़ास ४ मी़डिया के पांच साल पूरे होने पर यशवंत जी और उनकी टीम को असीम बधाइयां। इसमें शक नहीं कि पूरी लगन और मेहनत से इस विशिष्ट वेब साइट ने हिंदी में एक नया शिखर और कीर्तिमान स्थापित किया। कई तमाम रिस्क उठाए। लड़ाइयां लड़ीं। दुख झेला। इससे बचपन में प्राइमरी स्कूल में पढ़ी कवि श्याम नारायण पांडेय (अब तो इस कवि का नाम कई लोग नहीं जानते) याद आती है-
वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।
सामने पहाड़ हो, सिंह की दहाड़ हो।
….. वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।।
सचमुच अगर भड़ास नहीं होता तो हम अखबारी दुनिया की खबरें नहीं जान पाते। यह पोर्टल हमें एक दूसरे से जोड़ देता है। भड़ास की टीम के अनिल सिंह की सक्रिय उपस्थिति के बारे में हम सभी जानते ही हैं। अनिल में पूरी ऊर्जा है, मेधा है औऱ मेहनती हैं। बाकी सदस्यों से भी धीरे- धीरे परिचय होगा ही। भड़ास पर कई वे खबरें पढ़ने को मिलती हैं जो अन्यत्र नहीं मिल पातीं। कहां क्या गड़बड़ है, भड़ास के माध्यम से हम यह जान पाते हैं। बेबाक। स्पष्ट। नीचे टिप्पणी में यशवंत भाई लिख भी देते हैं- यदि किसी को इसके विरोध में लिखना है या इसका खंडन करना है तो उसका भी स्वागत है। क्या गजब। पुराने जमाने की पत्रकारिता याद आ जाती है।
लेकिन यशवंत भाई, मेरा एक विनम्र सुझाव है। भाई, ईमानदार काम के अनेक शत्रु होते हैं। बल्कि ज्यादा शत्रु होते हैं। आजकल तो कई लोग मानते हैं कि ईमानदार आदमी बकवास प्राणी होता है और उसका कोई भविष्य नहीं है। वे कहते हैं- जय बोलो बेईमान की। आज समाज के एक तबके में धन की इज्जत है। कोई चाहे लाख चोरी, डकैती, नीचतापूर्ण काम करता हो। नीचता और भ्रष्टाचार में वह भले ही आकंठ डूबा हो लेकिन उसके पास धन है तो वह पूज्यनीय बन जाता है। श्रद्धेय बन जाता है। कोई व्यक्ति चाहे लाख ईमानदार, मेहनती. मेधावी और काबिल हो, लेकिन यदि उसके पास धन नहीं है तो वह दो कौड़ी की भी इज्जत नहीं पाता। लेकिन आप चिंता न करें। भगवत गीता हमेशा ताकत देती है और देती रहेगी। गीता एक उपनिषद है। उसका कहना है- झूठ की कोई सत्ता नहीं होती और सत्य का अभाव नहीं है। यानी जीत हमेशा सच की ही होती है।
भाई सावधान रहिए। खुड़पेंचिए प्राणी हर युग में रहे हैं। उनका काम ही है खुड़पेंच करते रहना। षड्यंत्र करते रहना। यह उनके चरित्र में ही होता है। तो इनसे भी सावधान रहिए। हालांकि आप सावधान होंगे ही। लेकिन फिर भी मैं लिख रहा हूं क्योंकि मन में जो आया उसे लिख ही देना चाहिए। हर युग में लीक से हट कर अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वालों को लगातार जंग लड़नी पड़ती है। मजा यह है कि ऐसी जंग लड़ने वाले इसे जंग मानते ही नहीं। वे तो इसे अपना धर्म मानते हैं। इसलिए आगे बढ़िए। मैं ही नहीं अनेक लोग आपके साथ हैं। आगे बढ़ते रहिए। औऱ बीच- बीच में सन्यास का जो राग आप छेड़ते रहते हैं, वह मत कीजिए। अभी डटे रहिए। आगे बढ़ते रहिए। यह समय की मांग है। आप जैसे व्यक्ति की समाज को जरूरत है।
यार यह सब मैं इसलिए नहीं लिख रहा हूं कि मुझे आपसे कोई स्वार्थ है। जब तक आप इसी तरह ईमानदारी से आगे बढ़ेंगे, मैं इसी तरह आपको बधाई देता रहूंगा। लेकिन जब लगेगा कि कुछ गड़बड़ है तो आपको खरी- खोटी भी लिख भेजूंगा। जो मन में था उसे व्यक्त कर दिया। आभार, बधाई और दीर्घ जीवन की कामना।

विनय बिहारी सिंह
वरिष्ठ पत्रकार
कोलकाता
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