टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने मीडिया को लोकपाल से बाहर रखने की वकालत करते हुए कहा कि इसके लिए प्रेस काउंसिल सक्षम संस्था है। फिर भी अगर काम नहीं चल रहा है तो उसके लिए अलग से कानून बनाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि तमाम सामाजिक संस्थाओं और मीडिया में भ्रष्टाचार है। उन्होंने सीबीआई को भी सरकार के नियंत्रण से बाहर रखने की मांग उठाई।
'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' के कौशांबी स्थित कार्यालय में मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि सरकार चाहती है कि गांव स्तर की रामलीला कमेटियों, खेलकूद प्रतियोगिता कराने वाली संस्थाओं को लोकपाल के दायरे में लाया जाए। जबकि सरकारी संस्थाओं को लोकपाल के दायरे में लाना ज्यादा जरूरी है, क्योंकि उनमें भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर है। समूह ग तक के कर्मचारी भ्रष्ट हैं। उदाहरण के तौर पर एक डाकिया भी अगर गांव में कोई मनीआर्डर, पासपोर्ट लेकर जाता है तो वह उसके बदले में कुछ न कुछ धन अवश्य लेता है। ऐसे भ्रष्टाचार से गरीब तबका पीड़ित है। किसी कार्यालय में की गई शिकायत पर सुनवाई न होने पर उसे बड़े अधिकारी के समक्ष ले जाया जाता है, फिर भी सुनवाई नहीं होती है। इस स्थिति को देखते हुए ब्लाक स्तर पर न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए। ताकि न्याय के लिए लोगों को अधिक परेशानी न उठानी पड़े। उन्होंने कहा कि सीबीआइ को सरकार के नियंत्रण से बाहर रखने की जरूरत है। इस जांच एजेंसी का सभी सत्ताधारी दलों ने अपने लिए इस्तेमाल किया है। साभार : जागरण






