यशवंतजी बहुत बहुत धन्यवाद इस बात के लिए आगाह करने के लिए कि जल्द ही पूरी मीडिया इंडस्ट्री भयानक मंदी की चपेट में आने वाली है.. अर्थशास्त्रियों का तो यहां तक कहना है कि इस बार की मंदी भारत के लिए 2008 की मंदी से भी ज्यादा घातक साबित होगी.. मंदी की मार का जिन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर होता है उनमें मीडिया उद्योग भी शामिल है.. इस उद्योग में कई आंख के अंधे और गांठ के पूरे फायदा उठाने की होड़ में कूद पड़ते हैं और उनकी इसी बेवकूफी का शिकार सैकड़ों पत्रकार और अन्य मीडियाकर्मी होते हैं जो ऐसे संस्थानों में नौकरी करने के लिए मजबूर हैं..
2014 लोकसभा चुनाव का वर्ष है.. यही वजह है कि इस समय कई चैनल और अखबार खम ठोक कर मैदान में उतरने का ऐलान कर रहे हैं.. लेकिन ऐसे चैनल और अखबारों के बारे में अच्छी तरह से मालूमात करने के बाद ही पत्रकार साथियों को कोई फैसला करना चाहिए.. मैं 2008 की मंदी का शिकार रहा हूं.. जब एक बड़े समूह के अखबार में अच्छे पैकेज पर जाने के बाद ही आठ महीने के भीतर ही फिर दूसरी नौकरी तलाशने के लिए मजबूर हुआ था.. मैं अपने सभी साथियों से भड़ास के जरिए अनुरोध करना चाहूंगा कि लोकसभा चुनाव और मंदी की समाप्ति के बाद ही नौकरी बदलने के बारे में विचार करें..
आशीष तिवारी
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