राजस्थान के पाली-मारवाड़ में हुए एक ट्रेन हादसे में लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर के छोटे भाई सूर्यकांत त्रिपाठी उर्फ अनिल की हत्या हो गयी। 40 वर्षीय सूर्यकांत त्रिपाठी उर्फ अनिल अहमदाबाद से लखनऊ लौट रहे थे। सूर्यकांत का अंतिम संस्कार कल बुधवार को कानपुर के गंगा नदी के किनारे गंगाघाट में होगा।
खबर के मुताबिक सूर्यकांत एक निजी में काम करता था। काम के सिलेसिले में वह पिछले पांच दिनों से अहमदाबाद में था। 13 तारीख को उसे वापस लौटना था। लौटते समय आरक्षण न मिलने के कारण वह अहमदाबाद-भुज एक्सप्रेस से जनरल डिब्बे में सवार हुआ। रास्ते में उसने लखनऊ, बस्ती और गोरखपुर समेत कई रिश्तेदारों से बातचीत भी की।
बताते हैं कि जोधपुर के निकट पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन से आगे बढ़ने के बाद ही इस ट्रेन के जनरल डिब्बे में कुछ बदमाशों ने लूटपाट शुरू की थी। उस समय सुबह का तीन बज गया था। अनिल ने लखनऊ रेल में काम करने वाले अपने बहनोई को फोन करते बताया था कि ट्रेन में बदमाश सवार हो गये हैं और लूटपाट कर रहे हैं। अनिल ने अपने बहनोई से आग्रह किया था कि वे फौरन रेलवे पुलिस को इसकी खबर कर दें।
हैरत की बात है कि ट्रेन लूट के इस हादसे की खबर पुलिस को तब ही पता चल सकी, जब अनिल का शव रेल पटरी पर बरामद हुआ। लगता है कि शायद बदमाशों ने उसे फोन पर बात करते हुए उसे देखा और फिर पीटा। बाद में सुबह अनिल की लाश मारवाड़ जंक्शन के आगे जवाली स्टेशन के पास रेल पटरी के किनारे बरामद हुई। रक्त-रंजित अनिल के शव पर पीटने के निशान थे।
बाद में शव की तलाशी में मिले कागजों से अनिल के घरवालों को खबर दी गयी और पोस्टमार्टम के लिए शव को भिजवा दिया गया। खबर मिलने पर अनिल के भाई चंद्रकांत त्रिपाठी उर्फ चंदू पाली पहुंचे और शव पुलिस से हासिल की।
पत्रकार कुमार सौवीर ने बताया कि हमारे चाचा ओंकारनाथ त्रिपाठी मूलतः बहराइच के पयागपुर में वैनी-खुरथुआ के निवासी हैं और बस्ती के गौर के कृषक इंटर कालेज में 25 साल पहले सेवानिवृत होकर लखनऊ में रह रहे हैं। मेरे पिता के बाद मेरे परिवार के मुखिया चाचा ही हैं।





