Sanjeev Chandan : हिन्दी विश्वविद्यालय को नये कुलपति मिल गये हैं… गिरीश्वर मिश्र… दिल्ली विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के प्रोफेसर हैं. कल ही जनसत्ता में Om Thanvi जी ने हिन्दी विवि के बौद्धिक उत्पाद की हकीकत सामने रखी है. अब नये कुलपति के हवाले है पतवार….. विकल्प उनके पास है.. वे किन चीजों का चुनाव करते हैं… विश्वविद्यालय के ग़ुट और ग़ोटियां उन्हें अपने नियंत्रण में ले लेंगे या वे इससे मुक्त होंगे…..
वैसे कुछ बांछे उनका इंतजार कर रही हैं…..! विभूति राय तमाम कोशिशों के बावजूद दुबारा नियुक्त नहीं हो सके. हमारी लडाई को यहां पर थोड़ा विराम मिल गया है. कानूनी संघर्ष अपनी नियति प्राप्त करेंगे. फिलहाल, जिन -जिन लोगों ने हमारी लडाई में साथ दिया, उन्हें धन्यवाद.
संजीव चंदन के फेसबुक वॉल से.
Ashok Kumar Pandey : यानि इस यूनिवर्सिटी की कुंडली में ही दोष है. अब जो साहब कुलपति बन के आये हैं उनका कुल योगदान हिंदी में इतना ही है कि वे विद्या निवास मिश्र जी के अनुज हैं. पक्के तीन वाले पंडत जी. नोट कर लीजिये पहला मौक़ा मिलते ही नमो गान में संलग्न होंगे. मुझे लगता है इन्हें विभूति नारायण राय को बेहतर साबित करने के लिए लाया गया है. हम जैसों का बहिष्कार तो ख़त्म हुआ लेकिन लगता नहीं कि वहाँ जाने का मन होगा.
अशोक कुमार पांडेय के फेसबुक वॉल से.
अंबेडकर स्टूडेंट्स फोरम : वर्धा हिन्दी विश्वविद्यालय के 'अ'भूतपूर्व कुलपति 'दुर्गति' नारायण राय अब अपनी ज़िंदगी में दुबारा कभी वर्धा के कुलपति होने का सपना नहीं देख पाएंगे। राय को दुबारा अवसर न देने के लिए हम महामहिम राष्ट्रपति जी के आभारी हैं। 'अंबेडकर स्टूडेंट्स फोरम' ने विभूति राय के भ्रष्टाचार के बारे में राष्ट्रपति को सूचित किया था और अनुरोध किया था कि ऐसे जातिवादी आदमी को दुबारा कार्यकाल नहीं दिया जाए। सबसे अच्छी बात यह रही कि राय को अपने कार्यकाल में यूजीसी का 12वां प्लान भी नसीब नहीं हुआ। जबकि इसके लिए वे लगातार दिल्ली का चक्कर काटते रहे और मंचों से डींगें भी हाँकते रहे लेकिन बेचारे दरोगा जी को कुछ हाथ नहीं लगा और नियुक्ति में ''कमाई'' का एक बड़ा चांस चला गया। कैंपस में भी राय की वापसी को लेकर उनके चापलूस चर्चा गरमाए रहे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। विभूति राय अब बीते जमाने की बात है !!!
'अंबेडकर स्टूडेंट्स फोरम' नामक फेसबुक पेज से.
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