Om Thanvi : अपने क़सबे में हूँ तो सुबह-सुबह राजस्थान के अख़बार ही हाथ लगते हैं।तो आज एक ख़बर पर ध्यान अटका है: 'वसुंधरा राजे ने पलटे अशोक गहलोत के फ़ैसले'। ख़ैर, यह तो चलता रहता है। पर एक फ़ैसला पलटने की जो वजह बताई है, वह गले नहीं उतरती।
पेड़ काटने-छांगने पर पच्चीस हज़ार रुपये का ज़ुर्माना होता था। नई मुख्यमंत्री ने उसे पांच सौ कर दिया है, ताकि "आदिवासियों" को फ़ायदा हो। इससे फ़ायदा आदिवासियों को ज़्यादा होगा या वन-माफ़िया को? आदिवासियों का हित सोचते हैं तो पांच सौ का ज़ुर्माना भी क्यों? ज़ुर्माने का प्रावधान रोकथाम के लिए क़ायम किया जाने वाला भय होता है, अपराध की क़ीमत तो नहीं!
जनसत्ता के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.
Surendra Grover : राजस्थान में भाजपा सरकार की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने पेड़ काटने पर किये जाने वाले जुर्माने की रकम पच्चीस हज़ार रुपये से घटा कर मात्र पाँच सौ रुपये कर दी है.. अब इसे क्या कहा जाए..? इससे पेड़ों का सफाया बड़ी तेज़ी से बढ़ेगा और भूमाफियाओं का कारोबार भी.. गौरतलब है कि वसुंधरा का पिछला शासनकाल भी भूमाफियाओं का स्वर्णिम काल रहा है..
वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र ग्रोवर के फेसबुक वॉल से.






