नई दिल्ली : हरियाणा में रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के बीच जमीन के लेन-देन की जांच बिठाने के लिए वरिष्ठ आईएएस अफसर डॉ. अशोक खेमका का तबादला कर दिया गया है। खेमका हरियाणा के भू-राजस्व विभाग में थे लेकिन अब उन्हें बीज विकास विभाग में महानिदेशक बना कर भेज दिया गया है। उन्हें पहले भी ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ी है। वह गुड़गांव में हजारों करोड़ रुपये की जमीन को बिल्डरों के नाम किए जाने का घोटाला उजागर कर चुके हैं और जल्दी-जल्दी तबादले की उन्हें आदत पड़ चुकी है।
जब केजरीवाल और इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने वाड्रा और डीएलएफ के बीच भ्रष्टाचार के आरोप लगाए तो अशोक खेमका ने इन सौदों की जांच के आदेश दिए। इसके तीन दिन बाद उनका तबादला कर दिया गया। अशोक खेमका ने चार जिलों गुड़गांव, फरीदाबाद, पलवल और

डॉ. अशोक खेमका
15 अक्तूबर को अपने कार्यकाल के आखिरी दिन मानेसर-शिकोहपुर की उस साढ़े तीन एकड़ जमीन का म्यूटेशन रद्द किया था, जिसे वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने डीएलएफ को 58 करोड़ में बेचा था। जांच में इस सौदे में अनियमितता पाई गई थी। जमीन डील को रद्द करने वाले दस्तावेज बताते हैं कि जमीन बिक्री के कागजात पर अनाधिकृत ऑफिसर के हस्ताक्षर पाए गए हैं। अशोक खेमका ने अपने तबादले का विरोध भी किया है।
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