Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal

विविध

वाह रे जालिम तेरे कानून की बंदिश… लब बंद, जुबा बंद कलम बंद!!

वाह रे जालिम तेरे कानून की बंदिश… लब बंद, जुबा बंद कलम बंद!! यह पंक्ति जिस सियासत की पहली सीढ़ी बनी, वही पंक्ति आज दुर्गाशक्ति निलंबन कांड में इमजेंसी के हालात देखकर फिर गूंजकर क्या संदेश देती देना चाहती है? एसडीएम दुर्गालक्ष्मी नागपाल प्रकरण पर राज्य सरकार के खिलाफ टिप्पणी करने पर रामपुर के एक साहित्यकार को गिरफ्तार किये जाने की सूचना मिलते ही मेरे जेहन में ये पंक्तियां ‘‘वाह रे जालिम तेरे कानून की बंदिश! लब बंद, जुबा बंद कलम बंद!!’’ मचलने लगी, जिनके सहारे ही नेताजी (युवा सीएम के पिताश्री) के राजयोग का अभ्युदय हुआ था।

वाह रे जालिम तेरे कानून की बंदिश… लब बंद, जुबा बंद कलम बंद!! यह पंक्ति जिस सियासत की पहली सीढ़ी बनी, वही पंक्ति आज दुर्गाशक्ति निलंबन कांड में इमजेंसी के हालात देखकर फिर गूंजकर क्या संदेश देती देना चाहती है? एसडीएम दुर्गालक्ष्मी नागपाल प्रकरण पर राज्य सरकार के खिलाफ टिप्पणी करने पर रामपुर के एक साहित्यकार को गिरफ्तार किये जाने की सूचना मिलते ही मेरे जेहन में ये पंक्तियां ‘‘वाह रे जालिम तेरे कानून की बंदिश! लब बंद, जुबा बंद कलम बंद!!’’ मचलने लगी, जिनके सहारे ही नेताजी (युवा सीएम के पिताश्री) के राजयोग का अभ्युदय हुआ था।

बात इमरजेंसी की है, मेरी उम्र लगभग 10 साल की थी, नासमझ था। लेकिन 15 साल बाद 25 वर्ष की अवस्था में देशधर्म का समाचार संपादक बना, तब प्रत्यक्ष देखा नेताजी प्रायः साबितगंज, इटावा स्थित चाचाजी (देशधर्म के तत्कालीन स्वत्ताधिकारी पं. देवीदयाल दुबे) के घर आते थे और सियासत की पाठशाला में दांवपेंच की दीक्षा लेते थे। नेताजी उन्हें अपना गुरू मानते थे। दुबेजी ने 1975-1977 के आपात्काल और उसके सियासी इफ्केट के संदर्भ में जो बताया, वह आज अति प्रासंगिक है। ‘‘वाह रे जालिम तेरे कानून की बंदिश! लब बंद, जुबा बंद कलम बंद!!’’ पंक्ति जिस सियासत की पहली सीढ़ी बनी, वहीं पंक्ति आज दुर्गाशक्ति निलंबन कांड में इमजेंसी के हालात देखकर फिर गूंजकर क्या संदेश देती देना चाहती है? क्या राजयोग का पराभव होने वाला है?

देश में इमरजेंसी लगी थी, इंदिराजी पर किसी तरह की टिप्पणी करने पर जेल में डाला जा रहा था, चाचाजी ने नेताजी से कहा- मौका है, सियासी प्रयोगात्मक परीक्षा का। नेताजी ने सवाल किया – क्या करूं? चाचाजी ने कहा-‘‘जाओ, साबितगंज चैराहे पर नुक्कड़ सवा करो, जमकर भाषण दो।’’ नेताजी घबराते हुए बोले – अंदर  हो जाऊंगा। चाचाजी जवाब दिया- घबराते क्यों हो? राजनीति करोगे तो डंडे भी खने पड़ेंगे और जेल भी जानी पड़ेगी। मैने ब्रिटिश हुकूमत से मोर्चा लिया था, कितना जुल्म झेला। चिंता मत करो तुम पहुंचो, हम भी आते हैं। यह सुनकर नेताजी ने चाचाजी के पैर छुए और साबितगंज चैराहे पर सभा करने लगे थोड़े से लोग थे पुलिस ने घेराबंदी कर नेताजी सहित सभी को गिरफ्तार कर लिया, मुहल्ले के लोगों ने सारा किस्सा तत्काल चाचाजी को बताया। चाचाजी ने देशधर्म के अगले अंक के लिए मात्र ‘‘वाह रे जालिम तेरे कानून की बंदिश! लब बंद, जुबा बंद कलम बंद!!’’ कम्पोज कराया, अखवार के सारे पृष्ठ कोरे थे।

सुबह अखबार वितरण हुआ, लोग अचम्भे में थे कोरा अखबार, मात्र कुछ शब्दों में कराया कटाक्ष बहुत कुछ कह रहा था। पुलिस ने छापा मारा चाचाजी गिरफ्तार होकर जेल भेजे गये, उनके पुत्र अभयकुमार दुबे (देश के जाने माने समीक्षक व पत्रकार) भी अंदर हो गये। जेल में कैदियों का जमघट बढ़ता जा रहा था उनमें एक बाबा भी गिरफ्तार होकर आया था, कैदी भीड़ लगाकर उस बाबा को हाथ दिख रहे थे, गुरू (चाचाजी) चेला (नेताजी) भी भीड़ में थे। नेताजी की जिज्ञासा हुई मैं भी हाथ दिखाऊं। उन्होंने हाथ बढ़ा दिया, बाबा ने देखा, आश्चर्य से नेताजी की चेहरे को देखा और हस्त रेखायें पढ़ते हुए बोला-‘‘राजयोग है। तुम्हें राजा होना चाहिए।’’ नेताजी उपहासात्मक अंदाज में मुस्कराये, चाचाजी ने बोले- बाबा की भविष्यवाणी सत्य होगी। वहां से छूटने के बाद चुनाव हुए, ‘‘इंद्रासन खाली करो कि जनता आती है’’ की लहर में इंदिरा हटाओ की मुहिम रंग लाई, गैर कांगे्रस सरकार बनी। केन्द्र में मोरारजी देसाई की और यूपी में रामनरेश यादव की सरकार बनी, जिसमें नेताजी का राजयोग सहकारिता मंत्री के रूप में फलीभूत होगया।

और तबसे राजयोग सभी के सामने है, पीएम के दावीदारी और पुत्र को सीएम बनाकर नेताजी वह स्थान पा चुके हैं जो उनका प्रारब्ध रहा और रहेगा।  ‘‘वाह रे जालिम तेरे कानून की बंदिश! लब बंद, जुबा बंद कलम बंद!!’’ पंक्ति जिस सियासत की पहली सीढ़ी बनी, वहीं पंक्ति आज दुर्गाशक्ति निलंबन कांड में इमजेंसी के हालात देखकर फिर गूंजकर क्या संदेश देती देना चाहती है? क्या राजयोग का पराभव होने वाला है?

देवेश शास्त्री का विश्लेषण.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadas … मोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia  …

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...