भोपाल : मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में सरेआम एक पत्रकार को उसके पूरे परिवार के साथ मौत के घाट उतार दिया जाता है। मुख्यमंत्री हरकत में आते हैं। पुलिस सक्रिय होती है लेकिन हाथ कुछ भी नहीं आता है। दूसरी ओर, राज्य गृहमंत्री इस हत्याकांड को जरा सी बात कह रहे हैं। उमरिया के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रिका राय बरसों से खनन माफिया के निशाने पर थे। उनकी कलम से कई माफिया की तिजोरियां खाली हो चुकी थी और कईंयों की होने वाली थी। अवैध कोयला खनन को लेकर कई रिपरेटों ने न सिर्फ खनन माफियाओं को मुश्किल में डाला था, बल्कि स्थानीय प्रशासन के साथ सरकार भी कई बार मुसीबत में फंस चुकी थी।
सबसे अधिक प्रभावित भाजपा के स्थानीय नेता हुए थे। १७ फरवरी को उमरिया में चंद्रिका को उनके घर में ही घुस उनकी पत्नी और दो बच्चों के साथ बड़ी बेदर्दी के साथ मौत की आगोश में पहुंचा दिया गया। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ है कि जिसने भी व्यवस्था, भष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का आवाज की, उसे मौत के घाट के उतार दिया। पिछले साल अगस्त में आरटीआई एक्टिविस्ट शेहला मसूद को उनके घर के सामने ही गोली मार दी है। महीनों बीत गए लेकिन आज तक हत्यारा पुलिस की पकड़ से बाहर है। मामला सीबीआई के पास है।
पूरे देश में सबसे शांत प्रदेश का खिताब पा चुके मध्य प्रदेश ऊपर से भले ही भला शांत दिखता हो लेकिन सतह के अंदर की सच्चई कुछ और है। पूरे प्रदेश के पत्रकारों में चंद्रिका राय हत्याकांड के बाद से ही रोष है। स्थानीय पत्रकार जिले के पूरे पुलिस अमले को बदलने की मांग कर रहे हैं। पत्रकार संघ ने चंद्रिका राय की हत्या की जांच के लिए गृहमंत्री उमा शंकर गुप्ता से सीबीआई की मांग की तो गुप्ता का कहना है कि जरा सी बात पर आज कल सीबीआई जांच की मांग होने लगी है, जो ठीक नहीं है। वाह रे प्रदेश के संवदेनशील गृहमंत्री। यदि यही घटना किसी भाजपा के नेता के साथ होती तो क्या गुप्ता को यह जरा सी बात लगती है।
लेखक आशीष महर्षि युवा व प्रतिभाशाली पत्रकार हैं.





