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विज्ञापन में ऑनलाइन मीडिया का तीन सालों में होगा बोलबाला

भारत में इंटरनेट और मोबाइल फोन यूजर्स की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में विज्ञापन में ऑनलाइन मीडिया की बड़ी भूमिका रहेगी। ऑनलाइन मीडिया के जरिए कंपनियां ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच सकेंगी। राजधानी में चल रहे चार दिवसीय 'एडएशिया 2011' में यह बात निकलकर सामने आई। इस कार्यक्रम में विज्ञापन और कॉरपोरेट जगत की 25 देशों की जानी-मानी हस्तियां शिरकत कर रही हैं।

भारत में इंटरनेट और मोबाइल फोन यूजर्स की रफ्तार जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में विज्ञापन में ऑनलाइन मीडिया की बड़ी भूमिका रहेगी। ऑनलाइन मीडिया के जरिए कंपनियां ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच सकेंगी। राजधानी में चल रहे चार दिवसीय 'एडएशिया 2011' में यह बात निकलकर सामने आई। इस कार्यक्रम में विज्ञापन और कॉरपोरेट जगत की 25 देशों की जानी-मानी हस्तियां शिरकत कर रही हैं।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय विज्ञापन जगत की दो हस्तियों बाल मुंदकुर एवं गार्सन डि कुन्हा ने बताया कि क्यों उन्होंने 1948 से 2010 तक की यात्रा को किताब का रूप दिया है। कई लेखकों के सहयोग से तैयार इस किताब 'एडकथा' का विमोचन करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा कि समाज जैसे-जैसे उपभोक्ता बाजार की तरफ जा रहा है, एडवर्टाइजिंग का महत्व भी बढ़ रहा है। इस मौके पर कुन्हा ने कहा कि भारत में विज्ञापन उद्योग का आकार भले ही 30,000 करोड़ का हो गया है, इसके बावजूद इसमें वृद्धि की गुंजाइश है।

सम्मेलन में भाग लेने आए मैकिंजे एंड कंपनी के डायरेक्टर लक्ष्मण नरसिंहन ने कहा, 'इस समय देश में करीब 10 करोड़ लोग मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। अगले तीन से पांच साल में यह संख्या 35 करोड़ तक पहुंच जाएगी। इससे ऑनलाइन एडवर्टाइजिंग को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि कंपनियां इन उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंचना चाहेंगी।'

समान विचार रखते हुए यूनिलीवर के चीफ ऑपरेटिंग अफसर (सीओओ) और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के चेयरमैन हरीश मनवानी ने कहा कि अभी बहुत लोग मोबाइल फोन पर इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इन तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश करनी होगी। उन्होंने कहा, 'मोबाइल के जरिए इंटरनेट के इस्तेमाल के पावर को हमें समझना होगा।

हम जितना सोचते हैं, उससे कहीं अधिक गति से डिजिटाइजेशन इस दुनिया को बदलेगी।' भारत में ऑनलाइन एडवर्टाइजिंग के विकास पर टिप्पणी करते हुए इंटरपब्लिक ग्रुप के चेयरमैन एवं सीईओ माइकल रॉथ ने कहा, 'मेरे विचार से डिजिटल मीडिया भारत में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।' मोबाइल इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए एडवर्टाइजिंग एजेंसियां भी डिजिटल मीडिया पर अपना फोकस बढ़ा रही हैं।

ओगिल्वी एंड मैथर इंडिया के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन पीयूष पांडे ने कहा कि उनकी कंपनी ने नए मीडिया के साथ कदमताल मिलाने के लिए कई ढांचागत बदलाव किए हैं। उन्होंने बताया, 'कंपनी ने डिजिटल मीडिया के लिए एक नए डायरेक्टर, नए क्रिएटिव डायरेक्टर और पीआर हेड की नियुक्ति की है। इसके अलावा कंपनी नए लोगों की तलाश कर रही है। हमारे बिजनेस में डिजिटल मीडिया का योगदान अभी सिर्फ पांच फीसदी है और हम इसमें सबसे ऊपर जाना चाहते हैं।' पांडे ने कहा कि भारत में एडवर्टाइजिंग अब उपभोक्ताओं के हित में होती जा रही है।

मुद्रा ग्रुप के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर मधुकर कामथ ने बताया कि भारत में अभी एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये का है। इसमें 47 फीसदी हिस्सेदारी प्रिंट मीडिया की और 44 फीसदी टेलीविजन की है। शेष नौ फीसदी में आउटडोर, डिजिटल और न्यू मीडिया की हिस्सेदारी है। एडएशिया ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के सदस्य कामथ ने कहा इससे पहले सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और कुआलालंपुर में आयोजित एडएशिया सम्मेलन में भाग लेने वालों की संख्या 650 से 850 के बीच रही थी। इस बार यह तादाद 1200 के करीब पहुंच गई है। इससे पता चलता है कि जैसे-जैसे बड़े बाजार के रूप में भारत उभर रहा है, एडएशिया में भारतीयों की हिस्सेदारी भी बढ़ रही है। साभार : भास्‍कर

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