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विधानसभा स्पीकर बोलता है- मीडिया मेरे कंट्रोल में है… कश्मीर में पत्रकारों की ‘आज़ादी’ की लड़ाई

भारत प्रशासित कश्मीर में पत्रकारों ने उन पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों के खिलाफ एक विरोध मुहिम जारी की है. उनका कहना है कि उन्हें मंत्रियों के भ्रष्टाचार से जुड़ी ख़बरें सामने लाने से रोका जा रहा है. इस बीच भारतीय प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष ने इस मामले में जांच की मांग की है. सैंकड़ों पत्रकारों ने विधानसभा के बाहर एक धरना दिया. दरअसल स्पीकर मुहम्मद अकबर लोन के एक ‘आपत्तिजनक’ बयान दिए जाने से घाटी के पत्रकार काफी नाराज़ हैं.

भारत प्रशासित कश्मीर में पत्रकारों ने उन पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों के खिलाफ एक विरोध मुहिम जारी की है. उनका कहना है कि उन्हें मंत्रियों के भ्रष्टाचार से जुड़ी ख़बरें सामने लाने से रोका जा रहा है. इस बीच भारतीय प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष ने इस मामले में जांच की मांग की है. सैंकड़ों पत्रकारों ने विधानसभा के बाहर एक धरना दिया. दरअसल स्पीकर मुहम्मद अकबर लोन के एक ‘आपत्तिजनक’ बयान दिए जाने से घाटी के पत्रकार काफी नाराज़ हैं.

स्थानीय पत्रकार तरुण उपाध्याय ने कहा, “स्पीकर ने कहा कि प्रेस का नियंत्रण उनके हाथों में है और पत्रकारों को अपनी ख़बर के सूत्रों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.” पत्रकारों की मांग है कि स्पीकर अपना बयान वापस लें और इस वक्तव्य को विधानसभा के रिकॉर्ड से मिटाया जाए. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन उनकी कोशिशें नाकाम रहीं.

पत्रकारों का कहना है कि जब तक स्पीकर अपना बयान वापस नहीं लेते, वे विधानसभा का बहिष्कार जारी रखेंगें. विश्लेषकों का कहना है कि स्पीकर का ये कहना कि हर खबर के पीछे के सूत्र को सार्वजनिक किया जाए, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है. ग़ौरतलब है कि भारत प्रशासित कश्मीर में पत्रकारों पर पिछले कई सालों से कई प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं. भारतीय प्रेस काउंसिल ने ये मुद्दा कई बार अंतरराष्ट्रीय गुटों के समक्ष उठाया है. इसके अलावा इंटरनेश्नल फेडरेशन ऑफ़ जर्नलिस्ट ने भी इस मुसले पर चिंता जताई है.

जम्मू से बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर की रिपोर्ट.

'मीडिया मेरे कंट्रोल में, सूत्रों की देनी ही होगी जानकारी…' और मचा बवाल

जम्मू. विधानसभा स्पीकर मोहम्मद अकबर लोन ने कहा कि ‘मीडिया मेरे कंट्रोल में है। समाचार पत्रों में छपी स्टोरी के सूत्रों की जानकारी सदन को देनी होगी। स्पीकर द्वारा यह बात कहने पर प्रेस गैलरी में मौजूद मीडिया कर्मियों ने सोमवार को सदन की कार्यवाही की रिपोर्टिग का बहिष्कार किया। सेंट्रल हाल के बाहर धरने पर बैठे मीडिया कर्मियों ने मांग की कि जब तक स्पीकर अपने ये शब्द वापस नहीं लेते तब तक बहिष्कार जारी रहेगा। विपक्ष की नेता महबूबा मुफ्ती भी मीडिया के समर्थन में आ गई। महबूबा ने कहा कि जब तक मीडिया का बहिष्कार समाप्त नहीं होगा तब तक पीडीपी भी सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेगी। इसके साथ ही इस विषय पर स्थगन प्रस्ताव भी लाएगी। स्पीकर लोन के रूख के चलते मीडिया कर्मी इससे पहले भी सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर चुके हैं। तब स्पीकर को मीडिया से माफी मांगनी पड़ी थी।

स्पीकर ने सोमवार को कार्यवाही के दौरान इन शब्दों को इस्तेमाल तब किया जब स्वास्थ्य मंत्री शाम लाल शर्मा ने उनके तथा विभाग के खिलाफ एक समाचार पत्र में छपी स्टोरी का मामला सदन में उठाया। शाम ने समाचार पत्र के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। शाम ने इस स्टोरी पर समाचार पत्र से जबाव लेने की अपील स्पीकर से की। शर्मा का साथ देने के लिए पीएचई मंत्री ताज मोहयुद्दीन भी खड़े हो गए। इस पर स्पीकर ने कहा कि इस मामले पर बाद में अपना निर्णय देंगे और मीडिया को भी निर्देश जारी करेंगे।

इस पर पीडीपी के निजामुद्दीन बट ने कहा कि इस मामले को विधानसभा में नहीं उठाया जा सकता। इसकी शिकायत प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को की जानी चाहिए। इस पर स्पीकर ने कहा,‘ मीडिया मेरे अधीन है और उन्हें अपने सूत्रों की जानकारी देनी ही होगी।’ बाद में स्पीकर ने कहा कि मीडिया सदन के अधीन है। इस पर प्रेस गैलरी में मौजूद रिपोर्टर विरोध स्वरूप बाहर आ गए। कार्यवाही से स्पीकर के शब्दों को हटाने की मांग करते हुए विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए।मीडिया ने मंगलवार को भी बहिष्कार जारी रखने की बात कही है। पीडीपी अध्यक्ष ने भी मीडिया के बहिष्कार तक पीडीपी द्वारा सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करने की घोषणा पत्रकार वार्ता में कही। इसके बाद हुई पार्टी की बैठक में मंगलवार को इसी विषय पर स्थगन प्रस्ताव लाने का फैसला किया।

स्पीकर मोहम्मद अकबर लोन का मीडिया के साथ विवाद पहले भी हो चुका है। गठबंधन सरकार के सत्ता में आने के बाद पहले बजट सत्र के दौरान वर्ष 2009 में भी उनके व्यवहार के चलते मीडिया ने कार्यवाही की रिपोर्टिग का बहिष्कार किया।उस समय विपक्ष के नेता महबूबा मुफ्ती ने विधानसभा से वाक आउट किया था। इस पर मीडिया कर्मी महबूबा की प्रतिक्रिया लेने के लिए मीडिया गैलरी से बाहर चले गए। बाहर गए रिपोर्टरों को प्रेस गैलरी में न आने देने के निर्देश जारी कर दिए। बाद में मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार ने मध्यस्थता की थी।उस समय स्पीकर ने विधानसभा परिसर में प्रेस वार्ता कर अपनी गलती मानी थी। और मीडिया को रिपोर्टिग करने को कहा था।

मिन्नते हुईं बेकार, मीडिया ने नहीं सुनी उनकी गुहार!

जम्मू. विधानसभा स्पीकर मोहम्मद अकबर लोन द्वारा मीडिया के खिलाफ की गई टिप्पणी के विरोध में सदन की कार्यवाही की रिपोर्टिग का बहिष्कार दूसरे दिन भी जारी रहा। स्पीकर ने सोमवार को कहा था कि मीडिया उनके कंट्रोल में है। मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सभी मीडियाकर्मी कार्यवाही से स्पीकर के शब्दों को हटाने की मांग करते हुए विधानसभा परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए।

मुख्यमंत्री के सलाहकार देवेंद्र राणा, सीपीआई के विधायक मोहम्मद युसुफ तारीगामी ने धरने पर बैठे पत्रकारों को बहिष्कार समाप्त करने की अपील की। लेकिन उनकी अपील को नकार दिया गया। इसके बाद संसदीय कार्य एवं कानून मंत्री अली मोहम्मद सागर, पैंथर्स पार्टी के विधायक हर्ष देव सिंह भी पत्रकारों को मनाने के लिए आए। उन्होंने बताया कि स्पीकर इस मामले को सुलझाने के लिए तैयार हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री के सलाहकार मुबारक गुल, सूचना निदेशक फारूक रेंजू तथा विधानसभा के सचिव मोहम्मद रमजान ने आकर बताया कि स्पीकर पत्रकारों के साथ दोपहर दो बजे बैठक करना चाहते हैं। लेकिन स्पीकर ने दो बजे बैठक नहीं की। इसके बाद मीडियाकर्मियों की प्रेस क्लब में बैठक हुई। इसमें फैसला किया गया कि बुधवार को भी बहिष्कार जारी रहेगा।

एडिटर्स एंड जर्नलिस्ट काउंसिल का पुनर्गठित : एडिटर्स एंड जर्नलिस्ट काउंसिल राजौरी का पुनर्गठन किया गया है। प्रिंट और इलैक्ट्रानिक मीडियाकर्मियों की बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से श्याम सूद को दोबारा से प्रधान चुना। इसके बाद प्रधान 31 सदस्यीय समिति का गठन किया। शक्ति शर्मा को काउंसिल का महासचिव, शफकत वानी व जब्बार चौधरी को वरिष्ठ उपप्रधान, इमरान कय्यूम को उपप्रधान बनाया गया। सूद ने सभी को भरोसा दिलाया कि मीडियाकर्मियों के हितों के लिए वो संघर्ष करते रहेंगे।

पीसीआई को अवगत करवाएंगे पत्रकार

पत्रकारों का कहना है कि स्पीकर का यह कथन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्ल्घंन के साथ पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर भी हमला है। पत्रकारों ने कहा कि उनका टकराव विधायिका के साथ नहीं है। वे स्पीकर की कुर्सी की पूरी तरह इज्जत करते है लेकिन इसके साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता के साथ समझौता भी नहीं चाहते। इस पूरे प्रकरण की जानकारी प्रेस कांउसिल ऑफ इंडिया को भी भेजने का भी फैसला किया गया। पीडीपी के विधायक निजामुद्दीन बट ने कहा कि पीडीपी मीडिया के साथ है।

(उपरोक्त दोनों खबरें दैनिक भास्कर से साभार)

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