यशवंत जी प्रणाम, आम लोगों की आवाज़ को कलम के माध्यम से उठाने और एक मिशन के रूप में पत्रकारिता को एक दिशा देने का काम करने वाले पत्रकारिता के महानायक क्रन्तिकारी शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी के मिशन रूपी पत्रकारिता को आज क्या हो गया है? आज टीवी चैनलों व समाचार पत्रों की पत्रिकारिता में राजनैतिक दवाब इस कदर बढ़ गया है कि राजनैतिक लोगों की पसंद के आधार पर रिपोर्टरों को मौका दिया या छीना जा रहा है.
ये कितना उचित है ये तो मीडिया विशेषज्ञ ही जाने लेकिन मेरी अपनी राय से ये न्याय संगत नहीं है. शायद इसीलिए इस प्रथा के कारण आम लोगों का मीडिया से विश्वास उठता जा रहा है. उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की एक घटना कुछ इसी तरह घटी, यहाँ पर एक रिपोर्टर द्वारा एक विधायक की खबर दिखाए जाने का यह नतीजा निकला कि चैनल द्वारा उस रिपोर्टर को 10 दिनों के लिए निकाल दिया गया, क्या यह उचित है? भड़ास के चाहने वालों की उत्सुकता को समाप्त करते हुए हम वो खबर व उस विधायक एवं उस रिपोर्टर की भी जानकारी करा देते हैं. इस घटना के शिकार सिटी चैनल के रिपोर्टर सौरभ ओमर ने विधायक अजय कपूर की जो खबर चैनल पर दिखाई थी उस खबर को भी हम आप तक पंहुचा रहे हैं. अब आप ही बताये कि क्या ये न्याय संगत है? नीचे रिपोर्टर की खबर.
दबंग कह जाने वाले कांग्रेसी विधायक को जनता की चुनौती
सिर्फ अपराध की दुनिया में नाम कमाने वाले को दबंग कहना तो लाजमी है लेकिन हम एक ऐसे शख्स की बात कर रहे हैं जो कि राजनीति गलियारों का बाहुबली कहा जाता है. यह कोई और नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी से एक विधायक हैं, जिसे उसकी विधान सभा सीट में रहने वाली जनता धनबल का दबंग कहती है और दो बार विधायक बनाने वाली जनता ने ही इस बार इस बाहुबली विधायक के खिलाफ एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है.
उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कहा जाने वाला कानपुर जिला, जो न केवल अपने आप में ही नाम रखता है बल्कि यहाँ का अपराध भी काली दुनिया में जाना जाता है, जिससे यहाँ के कई ऐसे कई नाम हैं जिन्हें दबंग के नाम से जाना जाता है, लेकिन इन्हीं के बीच एक ऐसा नाम हैं जिसने कभी भी अपराध की दुनिया में कदम नहीं रखा और न ही कभी उसे अंजाम दिया फिर भी वह दबंग कहलाता है, क्योंकि यह है राजनीति के गलियारों का दबंग. मुंह में प्यारी बोली, धन का घमंड और अपनी मजबूत पकड़ की वजह से लगातार 10 साल से विधायक की कुर्सी पर कब्ज़ा जमाये इस व्यक्ति का नाम है अजय कपूर, जो कानपुर की गोविन्द नगर विधान सभा सीट से कांग्रेस पार्टी के विधायक हैं.
पहले कभी टूटी स्कूटर से चलने वाले अजय कपूर ने धीरे-धीरे राजनीति में कदम रखा तो आगे बढ़ाते चले गए और दूसरो के नारे लगाने वाले अजय कपूर ने 2002 में पहली बार भाजपा के विधायक बाल चन्द्र मिश्रा को हराकर विजय पायी थी. बस उस दिन से अजय कपूर बन गया था धन बल और बाहुबली, जिसने लोगों को पालना शुरू कार दिया. अपने क्षेत्र में जब वह निकलते हैं तो जनता न चाहते हुए भी जयकारे लगाने में नहीं चूकती है लेकिन 2012 के चुनाव में हुए नए परसीमन ने विधायक की मुश्किलें बढ़ा दी है. एशिया की सबसे बड़ी विधान सभा गोविन्द नगर से कुछ हिसा काट कर बनी किदवई नगर विधान सभा परसीमन में सामने आ गयी और इस बार विधायक अजय कपूर को यहीं से चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमानी है, जिसके बाद जनता ने भी अपना मोर्चा खोल दिया और चिल्ला चिल्ला कर विधायक की पोल खोलना शुरू कर दिया है.
अजय कपूर के सामने मोर्चा लिए खड़े हैं, भारतीय जनता पार्टी से प्रत्याशी विवेक शील शुक्ला, बसपा से श्याम सुन्दर गर्ग और सपा से ओम प्रकाश मिश्रा. सभी इस विधान सभा में अपनी जीत की ताल ठोंक रहे हैं, लेकिन इन तीनों पार्टियों के प्रत्याशियों के मुंह और मन में बस एक ही नाम है, जिसे इस बार किसी भी हालत में नहीं जीतने देना है उसका नाम है अजय कपूर.
ब्रिजेश शर्मा






