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विधायक के दबाव में पत्रकार सुरेश गांधी को अपराधी बनाने में जुटी पुलिस

सपा सरकार में पत्रकारों पर जुल्‍म बढ़े हैं. पूरे राज्‍य में पत्रकारों पर हमले तथा पुलिसिया कहर लगातार जारी है. लोग अब यूपी सरकार की तुलना अनियंत्रित तथा अराजक सरकारों से करने लगे हैं. भदोही से खबर है कि पुलिस जनसंदेश टाइम्‍स के पत्रकार सुरेश गांधी के खिलाफ गुंडा एक्‍ट का मामला दर्ज करके उनकी तलाश कर रही है. पत्रकार का आरोप है कि पुलिस यह सब कुछ सपा के बाहुबली विधायक विजय मिश्र के इशारे पर कर रही है.

सपा सरकार में पत्रकारों पर जुल्‍म बढ़े हैं. पूरे राज्‍य में पत्रकारों पर हमले तथा पुलिसिया कहर लगातार जारी है. लोग अब यूपी सरकार की तुलना अनियंत्रित तथा अराजक सरकारों से करने लगे हैं. भदोही से खबर है कि पुलिस जनसंदेश टाइम्‍स के पत्रकार सुरेश गांधी के खिलाफ गुंडा एक्‍ट का मामला दर्ज करके उनकी तलाश कर रही है. पत्रकार का आरोप है कि पुलिस यह सब कुछ सपा के बाहुबली विधायक विजय मिश्र के इशारे पर कर रही है.

सुरेश ने अपने अखबार में पुलिस तथा विजय मिश्र के खिलाफ कुछ खबरें प्रकाशित की थी, जिससे ये लोग काफी कुपित थे. इसी का परिणाम था कि सुरेश गांधी के खिलाफ जौनपुर में व्‍यक्तिगत रंजिश में दर्ज कराए गए मुकदमे को आधार बनाते हुए पुलिस ने उनके विरुद्ध गुंडा एक्‍ट का मामला दर्ज कर लिया. आरोप है कि यह सब पुलिस ने स्‍थानीय सपा विधायक के दबाव में किया. इसके बाद से ही उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. 

सुरेश गांधी के घर पर भी गुंडा एक्‍ट की नोटिस चस्‍पा कर दी गई है. सूत्रों का कहना है कि नेताओं की रखैल बन चुकी . पुलिस सुरेश गांधी को जिलाबदर करने की भी तैयारी कर रही है पत्रकार को हिंदुस्‍तान जैसे तमाम अखबार रंगदार और अपराधी साबित करने में जुटे हुए हैं. इसका कारण है कि सुरेश गांधी इसके पहले हिंदुस्‍तान को ही अपनी सेवाएं दे रहे थे. बाद में जनसंदेश टाइम्‍स से जुड़ गए. इससे नाराज हिंदुस्‍तान जमकर बड़ी-बड़ी खबरें सुरेश गांधी के खिलाफ प्रकाशित कर रहा है.

पूर्वांचल में दल्‍लागिरी बन चुकी पत्रकारिता के चलते अन्‍य अखबार भी पत्रकार के साथ खड़ा होने की बजाय सिस्‍टम के साथ कदम ताल कर रहे हैं. जिस तरीके से एक साल के अंदर पुलिस ने पत्रकारों को प्रताडि़त किया है तथा फर्जी मामलों में फंसाया है उसकी कीमत सपा सरकार को चुकानी पड़ेगी. इस तरह की निरंकुश प्रशासन ने बसपा के हाथ से बागडोर छीनी थी, ऐसा ही हाल सपा का भी होता दिख रहा है. अगर अखिलेश यादव ने अनियंत्रित हो चुकी पुलिस पर लगाम नहीं कसी तो इसकी कीमत लोकसभा चुनावों में ही चुकानी होगी. 

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