सिटी भास्कर के इंदौर संस्करण की प्रतिष्ठा को बचाने के लिए नेशनल एडिटर कल्पेश याज्ञनिक ने पूरी ताकत झोंक दी है। दो महीने में छह संपादकीय सहयोगियों द्वारा सिटी भास्कर को अलविदा कहने के बाद बंद होने के कगार पर खड़े इस पुलआउट को बचाने के लिए कल्पेश ने अब विभास साने, अन्नया मिश्रा तथा सोनिया को दांव पर लगाया है। ये सब लोग इन दिनों भोपाल के नेशनल न्यूज रूम में कल्पेश के अधीन काम कर रहे थे।
मंगलवार को सिटी भास्कर के डेस्क हेड गजेंद्र शर्मा के सिटी भास्कर छोडऩे के बाद कल्पेश ने ताबडतोड़ भोपाल से तीन साथियों को इंदौर भेजने का निर्णय लिया। इन लोगों को साफ शब्दों में हिदायत दी गई की आप तत्काल इंदौर जाएं। वहां सलोनी बहुत संघर्ष कर रही हैं उसकी मदद करें और इस बात का ध्यान रखे कि किसी तरह की परेशानी न हो। कल्पेश के फरमान के बाद ये तीनों साथी इंदौर पहुंचकर काम शुरू कर चुके हैं। विभास जिन्हें डेस्क हेड की भूमिका निभाने को कहा गया है, पांच साल पहले नई दुनिया के सिटी संस्करण में रिपोर्टर थे। वे बाद में पीटीआई दिल्ली में चले गए और वहां से नवभारत टाइम्स में सेवाएं दी। एक महीने पहले ही उन्हें दैनिक भास्कर के नेशनल न्यूज रूम में नियुक्ति मिली थी और वे लगातार अच्छी खबरें कर रहे थे।
अन्नया इंदौर के ख्यात शिक्षाविद् प्रो मंगल मिश्रा की बेटी हैं और दो साल से नेशनल न्यूज रूम में सेवाएं दे रही थीं। वे इंदौर आने के लिए काफी समय से प्रयासरत थी लेकिन सिटी भास्कर में नहीं। प्रबंधन की वाहवाही हासिल करने के लिए अपने सहयोगियों को दांव पर लगान कल्पेश का पुराना शौक है। चार साल पहले प्रबंधन ने जब भोपाल से डीबी स्टार निकालने का निर्णय लिया था तब कल्पेश रातोंरात जयपुर से इंदौर आकर रूमनी घोष, विजयसिंह चौहान तथा महेश लिलोरियो को भोपाल ले गये थे। वहां स्टेट ब्यूरो में काम कर रही जयश्री पिंगले जैसी सीनियर रिपोर्टर को उन्होंने इस टीम के साथ जोड़ दिया। इन लोगों की वहां क्या दुर्गति हुई और कल्पेश ने इस टीम से किस तरह पल्ला झाड़ा, यह किसी से छुपा नहीं है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






