महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति एवं साहित्यकार विभूति नारायण राय को हिंदी साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए हिमालय हेरिटेज रिसर्च एवं डेवलपमेंट सोसाइटी, सिक्किम द्वारा वर्ष 2013 का हिमालय अंतरराष्ट्रीय साहित्य सृजन सम्मान प्रदान किया गया है।
यह सम्मान श्री राय को हिमालय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव 2013 के अवसर पर तीसरे दिन 8 अगस्त, 2013 को सिक्किम गवरमेंट कॉलेज के प्रेक्षागृह में सिक्किम के पर्यटन मंत्री भीम प्रसाद धुंगेल द्वारा सिक्किम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.टी.बी.सुब्बा, सिक्किम कॉलेज के प्राचार्य डॉ.एम.पी.खरेल तथा पद्मश्री सोनम छिरिंग लेप्चा के गरिमामय उपस्थिति में प्रदान किया गया। इस दौरान नेपाली साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए प्रो.टी.बी.सुब्बा ने शंकर देव ढकाल को भी हिमालय अंतरराष्ट्रीय साहित्य सृजन सम्मान से सम्मानित किया।
उद्घाटन वक्तव्य में पर्यटन मंत्री श्री धुंगेल ने कहा वर्तमान समय में हिमालय के पर्यावरण तथा संस्कृति को बचाना भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व समाज के लिए चुनौती है। हिमालय केवल एक पर्वत नहीं संस्कृति का संवाहक है। सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रथम प्रस्तुति नेपाल के गंधर्व द्वारा गायन गीत से हुई।
तत्पश्चात तिब्बत के ग्रुप तेंजिंग दोनियो ने तिब्बत का पारंपरिक गीत, सिक्किम के लिम्बू ग्रुप, नटराज कला केंद्र द्वारा कत्थक नृत्य, सायरी द्वारा लेप्चा पारंपरिक नृत्य, भूटान के पारो द्वारा भुटिया डांस, गंगा मुखिया द्वारा नेपाली लोकगीत, सिक्किम विश्वविद्यालय के छात्रों तथा नटराज कला केंद्र द्वारा नेपाली पारंपरिक नृत्य, सिक्किम के सोम्ब्रे ग्रुप द्वारा चेबरुंग नृत्य, सिक्किम विश्वविद्यालय के छात्र पार्थो द्वारा बांसुरी वादन, सिक्किम गवरमेंट कॉलेज द्वारा नेपाली लोकगीत जैसे एक के बाद एक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर विभुति नारायण राय ने सम्मान के लिए संस्था का आभार व्यक्त किया तथा सिक्किम की सांस्कृतिक परंपरा को विशिष्ट बताया। शंकर देव ढकाल ने सम्मान के लिए संस्था का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिमालय की पहचान उसकी अपनी अद्भुत सांस्कृतिक परंपरा से है जिसे बचाए जाने के लिए संस्था द्वारा किए जाने वाले प्रयासों की उन्होंने सराहना की। कार्यक्रम के दौरान हिमालय के पारंपरिक परिधानों को लेकर प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ, जिसमें हिमालय के विभिन्न समुदायों के पारंपरिक परिधानों को प्रस्तुत किया गया। इन परिधानों के माध्यम से हिमालय की परंपरागत संस्कृति को दर्शकों से रूबरू कराना इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य है।
अतिथियों का स्वागत एच.एच.आर.डी.एस.(हिमालय हेरिटेज, रिसर्च डेवलपमेंट सोसाइटी) के अध्यक्ष तथा महोत्सव के परिकल्पक डॉ.ओमप्रकाश भारती ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष जयंत कुमार बर्मन ने किया। कार्यक्रम की उद्घोषणा पारसमणी दंगाल ने की तथा संचालन डॉ.महेन्द्र कुमार, समीर मित्र, कैलाश जीवानी, कुमार गौरव मिश्रा, धर्मप्रकाश मंटो, भोला दयाल, रवीन्द्र कुमार मुंढे, अभिषेक त्रिपाठी, सुषमा पाण्डेय, डॉ.अनुजा, सुप्रिया, शताब्दी बर्मन आदि ने किया।
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