हरिभूमि रायपुर में कार्यरत ब्रह्मवीर सिंह के उपन्यास दंड का अरण्य के विमोचन समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर में शांति के लिए वे खलनायक बनने के लिए भी तैयार हैं। कभी-कभी फिल्में भी खलनायक की वजह से हिट हो जाती हैं। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने आज कहा कि राज्य में शांतिपूर्ण विकास के लिए बेहतर वातावरण बनने तक नक्सल हिंसा से निबटने की अपनी नीति और संकल्प पर सरकार हमेशा कायम रहेगी। हम एक पल के लिए भी राह से नहीं भटकेंगे। इन प्रयासों को गलत बताते हुए कतिपय लोग मुझे खलनायक कहते हैं। अगर शांति की बहाली के लिए खलनायक बनना पड़े तो इसके लिए भी तैयार हूं।
हरिभूमि के युवा पत्रकार ब्रह्मवीर सिंह के नक्सल समस्या पर आधारित उपन्यास दंड का अरण्य के विमोचन समारोह में शुक्रवार को डा. रमन ने इस मसले पर बेबाक राय रखी। समारोह सर्किट हाउस में हुआ। इस गरिमामय समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डा. चरणदास महंत ने की। मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर थे। इस अवसर पर प्रभात प्रकाशन दिल्ली के संचालक प्रभात कुमार विशेष तौर पर मौजूद थे।
समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद डा. रमन ने डॉ. सिंह ने उपन्यास के प्रकाशन पर पत्रकार ब्रह्मवीर सिंह को बधाई देते हुए कहा कि स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और पुल-पुलियों को नष्ट करके आम जनता को कष्ट पहुंचाने वाली नक्सल हिंसा को क्रांति या आंदोलन कहना गलत होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने वाला यह कैसा आंदोलन है, जो बेगुनाह और मासूम इंसानों की हत्या करने और बिना किसी अधिकार के, ग्रामीणों के बीच कथित जन अदालत लगाकर लोगों के हाथ-पैर काटने, उन्हें मौत की सजा देने से भी परहेज नहीं करता।

डॉ. सिंह ने नक्सल समस्या के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता से जुड़े ब्रह्मवीर सिंह ने इस गंभीर मसले पर अपने उपन्यास में काफी अच्छे तरीके से और हिम्मत के साथ कथानक को विकसित किया है। उन्होंने एक बेहतर किताब लिखने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद और बस्तर की पृष्ठभूमि पर वैसे तो कई लोगों ने काफी कुछ लिखा है, पर विगत एक माह में दो महत्वपूर्ण उपन्यास सामने आए हैं, जिनमें से एक डॉ. राजीव रंजन सिंह का आमचो बस्तर और दूसरा ब्रह्मवीर का दंड का अरण्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है। समारोह का संचालन छालीवुड कलाकार अनुज शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन प्रभात कुमार ने किया।
बस्तर यात्रा कर लिख लेते हैं किताब… : डॉ. सिंह ने बस्तर और नक्सल समस्या का विशेषज्ञ बनने का दावा करने वाले दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के कुछ लोगों पर तीखा व्यंग्य प्रहार करते हुए कहा कि ऐसे लोग हवाई जहाजों से रायपुर आकर सड़क मार्ग से जगदलपुर जाते हैं और अगले ही दिन घर वापस जाकर बस्तर तथा नक्सलवाद के विशेषज्ञ के रूप में तीन सौ-चार सौ पन्नों की किताब लिख देते हैं, जबकि उन्हें इस समस्या की गहराई का कुछ भी पता नहीं होता। डॉ. सिंह ने कहा कि स्वयं नक्सलवाद के प्रवर्तक कहे जाने वाले उनके अनेक नेताओं ने भी बाद में यह स्वीकार किया है कि उनका यह कथित आंदोलन रास्ते से भटक गया है।
मुझे सच्ची खुशी मिली : स्वागत भाषण हरिभूमि के प्रबंध संपादक व समारोह के आयोजक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने दिया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक विमोचन से मुझे वह खुशी मिली है जो एक पिता को अपने पुत्र की सफलता पर मिलती है। उन्होंने पुस्तक के लेखक ब्रह्मवीर सिंह को अपना छोटा भाई बताते हुए कहा कि आनंद के क्षण अविस्मरणीय होते हैं और आज वह आनंद मुझे मिला, जो मेरी खुद की पुस्तक के विमोचन में भी नहीं मिला था।
लेखक की बात : दंड का अरण्य के युवा उपन्यासकार और पत्रकार ब्रह्मवीर सिंह ने अपनी पुस्तक को विशुद्ध रूप से नक्सलवाद पर निष्पक्ष होने का दावा करते हुए कहा कि इस पुस्तक में यथार्थ है। बेबाकी से व्यक्त किए गए वह विचार हैं जो काफी कड़वाहट का अहसास कराते हैं और सच्चाई कड़वी ही होती है।






