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विवादित पत्रकारों की शरणस्‍थली बना जनसंदेश टाइम्‍स, राहुल बने सोनभद्र के प्रभारी

जनसंदेश टाइम्‍स का बनारस यूनिट दागी पत्रकारों की शरण स्‍थली बनती जा रही है. इस अखबार से जुड़ने वाले कई लोगों पर पुलिस और कोर्ट की कार्रवाई हो चुकी है. अब खबर आ रही है कि हिंदुस्‍तान अखबार से सितम्‍बर 2011 में बर्खास्‍त किए जा चुके राहुल श्रीवास्‍तव को सोनभद्र का नया ब्‍यूरोचीफ बनाया गया है. अब तक यह जिम्‍मेदारी दैनिक जागरण से हटाए जा चुके चंद्रकांत त्रिपाठी देख रहे थे. इसके पहले मिर्जापुर की ब्‍यूरोचीफ रहीं मानसी सिंह ने भी इसी तरह की राजनीति से तंग आकर इस्‍तीफा दे दिया था. खबर है कि चंद्रकांत ने अखबार छोड़ दिया है.

जनसंदेश टाइम्‍स का बनारस यूनिट दागी पत्रकारों की शरण स्‍थली बनती जा रही है. इस अखबार से जुड़ने वाले कई लोगों पर पुलिस और कोर्ट की कार्रवाई हो चुकी है. अब खबर आ रही है कि हिंदुस्‍तान अखबार से सितम्‍बर 2011 में बर्खास्‍त किए जा चुके राहुल श्रीवास्‍तव को सोनभद्र का नया ब्‍यूरोचीफ बनाया गया है. अब तक यह जिम्‍मेदारी दैनिक जागरण से हटाए जा चुके चंद्रकांत त्रिपाठी देख रहे थे. इसके पहले मिर्जापुर की ब्‍यूरोचीफ रहीं मानसी सिंह ने भी इसी तरह की राजनीति से तंग आकर इस्‍तीफा दे दिया था. खबर है कि चंद्रकांत ने अखबार छोड़ दिया है.

जनसंदेश टाइम्‍स, वाराणसी के क्राइम रिपोर्टर पवन सिंह तथा भदोही के ब्‍यूरोचीफ सुरेश गांधी कोर्ट और पुलिस ने आरोपी बना रखा है. इसके पहले ही चंदौली के कमालपुर में संवाद सूत्र के रूप में काम देख रहे दिग्विजय सिंह को कोर्ट ने हत्‍या के प्रयास के मामले में सजा सुनाया था, बाद में प्रबंधन ने उनकी जगह उनके भाई को संवाद सूत्र बना दिया है. इतना ही नहीं धीना प्रतिनिधि के रूप में भी एक ऐसे आरोपी को पत्रकार बनाया गया है, जो आज के वरिष्‍ठ पत्रकार दिवाकर राय पर जानलेवा हमला करने का आरोपी है. इसके पहले मिर्जापुर में ब्‍यूरोचीफ बनाए गए नीरज सिंह की छवि भी विवादित पत्रकार की है.

ऐसा लग रहा है कि जनसंदेश टाइम्‍स विवादित और आपराधिक छवि के पत्रकारों को अपने यहां नियुक्‍त करने का धंधा खोल रखा है. वैसे सूत्रों का कहना है कि इनमें से ज्‍यादातर नियुक्तियां प्रबंधन के कुछ लोगों द्वारा मोटी रकम लेकर की गई है ताकि इन लोगों को अखबार के नाम पर पुलिस से शेल्‍टर मिल सके. व्‍यवस्‍था इस तरह की गई है कि किसी मामले में फंसने पर अखबार पर कोई आंच नहीं आए. इन में से ज्‍यादातर लोगों को लिखा-पढ़ी में अखबार से नहीं जोड़ा गया है बल्कि इन्‍हें एजेंसी देकर अखबार का पत्रकार बना दिया गया है.

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