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सुख-दुख...

वीडियो में उस लड़की ने आंसुओं की धार के बीच उस रात का वर्णन किया है

Mayank Saxena : मौन तोड़ देने का समय… हाल के दो दिनों के प्रकरण में बहुत सारी चर्चाएं हुई, कुछ सार्थक और कुछ चकल्लसी…राहत देने वाली बात ये थी कि कई सारे सच सामने आए और कई प्रहसनों-अफ़वाहबाज़ों का पर्दाफ़ाश हुआ….अब सवाल ये कि मैं और इला चुप क्यों थे…चलिए मैं मौन (चुप्पी नहीं) तोड़ देता हूं…

Mayank Saxena : मौन तोड़ देने का समय… हाल के दो दिनों के प्रकरण में बहुत सारी चर्चाएं हुई, कुछ सार्थक और कुछ चकल्लसी…राहत देने वाली बात ये थी कि कई सारे सच सामने आए और कई प्रहसनों-अफ़वाहबाज़ों का पर्दाफ़ाश हुआ….अब सवाल ये कि मैं और इला चुप क्यों थे…चलिए मैं मौन (चुप्पी नहीं) तोड़ देता हूं…

इस पूरे मामले को लेकर कुछ मेरे अज़ीज़ साथी Samar Anarya लिख चुके हैं, बाकी मैं लिख देता हूं…शुरुआत से ही इस मामले में मेरे प्रहसन करने वाले प्रोपोगेंडाबाज़ साथियों की 'पीड़िता' का रुख हमारे सामने कुछ और ज़हरीलों के सामने कुछ और था…इस बारे में हम न केवल उस शख्स से मिले जिस पर आरोप लगाए गए…बल्कि हमने इस मामले को रोकने और प्रोपोगेंडे को हद पार करने से रोकने के लिए हर उपाय किया…हमको जब लगा कि बूंद की ओर से हमको उस शख्स की सार्वजनिक छवि की क्षति रोकने के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए तो हम ने माफ़ी मांगी…उस माफ़ीनामे के लिए मुझे आज भी कोई अफ़सोस नहीं है…लेकिन हां, ये भी सब जानते हैं, वो शख्स भी जिनसे माफ़ी मांगी गई थी…कि इस पूरी साज़िश में हमारी कहीं से कोई भूमिका नहीं थी, सिवाय इसके कि हमारी टीम के कुछ लोगों ने हमारा भरोसा तोड़ा…और वो कभी हमारे साथ काम करते थे…

ख़ैर इस बीच एक ख़बर और मिली कि एक वीडियो है जिसे कुछ लोग फिर से लेकर गली-गली घूम रहे हैं…हमारा दिमाग खराब हो चुका था…कई लोग हमें फोन कर के उस वीडियो के बारे में बता चुके थे…अंततः हमको Balendu Swami ने सुझाव दिया कि हम को ज़हरीलों से मिल कर उस वीडियो और इस प्रोपोगेंडा को फैलने से रोकना चाहिए…क्योंकि न केवल यह उस शख्स की छवि को धूमिल करने का शर्मनाक प्रयास था…साथ ही इनके हिसाब से 'पीड़िता' मानी जा रही लड़की की निजता का भी हनन था…न केवल यह ग़ैरइंसानी था बल्कि ग़ैरक़ानूनी भी…

1 अक्टूबर की रात हम कनॉट प्लेस में अपने साथियों के साथ इनसे मिले…इन्होंने कहा कि मीटिंग का मक़सद मतभेद दूर करना है…हम चाहते थे कि वीडियो और कुत्सित षड्यंत्र का दौर खत्म हो…हमको तब तक ये भी ख़बर नहीं थी कि इस वीडियो को एक मोदीवादी एनजीओ एक्टिविस्ट के दफ्तर पर शूट किया गया था…इस बीच वो 'पीड़िता' कहां थी इसका कोई पता नहीं था…न ही वो इस मामले में अपना कोई रुख साफ़ कर रही थीं…ख़ैर उस बैठक में क्या हुआ ये भी समझिए…

1. मीटिंग में शामिल इन सब लोगों में से ज़्यादातर ने कहा और माना कि 'पीड़िता' का जिस तरह का रवैया रहा है, उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

2. ज़्यादातर लोगों ने जानबूझ कर पीड़िता के संदिग्ध व्यवहार की बजाय हमारे माफ़ीनामे को एजेंडा बना दिया, इसमें वो लोग भी थे जो अब समर भाई की वॉल पर उनके और उस शख्स के ख़ैरख्वाह बन रहे हैं, ये लोग उनके भी करीबी हैं, जिन्होंने समर भाई को माफ़ीनामे वाली एक्सक्लूसिव जानकारी दी और उन ज़हरीलों के साथी भी जो ये कर रहे थे।

3. ज़हरीले भाई ने ख़ुद अपने श्रीमुख से कहा कि पीड़िता पर उनको भी भरोसा नहीं है, यही नहीं उन्होंने वीडियो दिखाने को को भी ग़लत माना।

4. इनमें से ज़्यादातर लोग ये मानते थे कि इनके पास न कोई सुबूत हैं न ही पीड़िता का स्टैंड साफ़ और विश्वसनीय है और न ही कोई लड़ाई लड़ी जा सकती है, हम भी ये चाहते थे कि ये नाटक-गंदा खेल खत्म हो।

5. ख़ैर हमारे सामने शर्त रखी गई कि अगर हम माफ़ीनामा हटा लें तो ये उस वीडियो को प्रचारित नहीं करेंगे और साथ ही फेसबुक पर अपना दुष्प्रचार भी बंद कर देंगे।

6. हमारे सामने ये एक अहम मुद्दा था कि आखिर कैसे जिस शख्स के खिलाफ़ दुष्प्रचार हमने एक सार्वजनिक माफ़ीनामे से रोका था, उसे अब फिर से रोका जाए…हमने अपने साथियों के साथ काफ़ी विचार विमर्श किया।

7. लेकिन तब तक फिर से ज़हरीले भाई और उनके साथियों ने दुष्प्रचार का खेल शुरु कर दिया, हालांकि वो ऐसा न करने का वादा कर चुके थे…हमने आपस में बैठ कर काफ़ी बात की और एक बात तय थी कि इस पूरे प्रकरण में ये लोग लगातार हम को भी निशाना बना रहे थे और हम पर भी उतने ही आरोप लग रहे थे, जितने कि उन सज्जन पर…हमारे सामने ये स्पष्ट था कि हमारा और उन सज्जन का सच साझा है…एक की छवि की हानि दूसरे की छवि की हानि है…और ऐसे में हमारी ग़लती कहीं से कोई भी नहीं है, हम तो ख़ुद पीड़ित थे।

8. हां, मैंने वो माफ़ीनामा हटाया, क्योंकि मैं चाहता था कि ये प्रहसन-प्रोपोगेंडा रुक जाए…और साथ ही इसलिए भी कि उस माफ़ीनामे को हम सार्वजनिक लिख चुके थे…उस पर तमाम कमेंट आ चुके थे और हमारी स्थिति साफ़ थी…लेकिन साथ ही ये भी कि शायद हम दोषी नहीं थे, दोषी कोई और था…

9. अफ़सोस कि शातिर लोगों की चालें ऐसी ही होती हैं, माफ़ीनामा हटा लेने के बाद भी इनका कुत्सित खेल जारी रहा, और अब इनके ही बीच के कुछ लोग पहले से तय खेल के मुताबिक उन सज्जन और समर भाई को चालाकी से तैयार किया हुआ सच बता रहे हैं…जबकि उस मीटिंग में वो य़ा उनके करीबी मौजूद थे, जो उन सज्जन के खिलाफ़ ही नहीं थे, बल्कि लगातार इशारों में उनके खिलाफ़ लिखते भी रहे…और ज़हरीले स्टेटस शेयर भी करते रहे…अब ये लोग नया खेल रच रहे हैं..

10 . हम ने सिर्फ एक शख्स की मानहानि रोकने और एक लड़की की निजता के लगातार उस वीडिये के ज़रिए हो रहे ग़ैरक़ानूनी निजता के हनन को रोकने के लिए वो माफ़ीनामा हटाया, हमारी नीयत साफ़ है…हां, ये ज़रूर है कि हम सामने वाले को रोकने के लिए ऐसा करने के लिए मजबूर थे।

यही नहीं अब इन ज़हरीलों का शातिराना रवैया देखने के बाद, उस माफ़ीनामे में लिखी गई ज़्यादातर बातों पर मैं फिर से सहमत हूं, सिर्फ एक बात को छोड़ कर कि इस पूरे प्रकरण में मेरा या बूंद का कहीं से कोई दोष है। हां, मेरा दोष है कि मैंने सरलता से लोगों पर भरोसा किया और धोखा खाया। लेकिन मैं फिर से कह रहा हूं कि इस मामले में मैं और Ila Joshi बराबर के पीड़ित हैं…उतनी ही मानहानि हमारी भी होती रही है, कोई दोष न होने के बावजूद…हां, हम छले गए और फिर भी बार बार लोगों पर भरोसा करने को मजबूर थे, ये हमारा दोष है।

हमने आज तक उस शख्स के खिलाफ़ एक शब्द नहीं लिखा, न ही इस मामले को लेकर कुछ लिखा, हम लगातार कोशिश करते रहे इस गंदे खेल को रोकने की, हम सब लोगो से मिलते रहे, शांतिपूर्ण तरीके से इस खेल को रोकने की कोशिश करते रहे, इस मामले को और गंदा होने से बचाते रहे…हम पर तमाम ऐसे आरोप लगे, जो हम स्वप्न में भी नहीं सोच सकते थे लेकिन हम चुप रहे…लेकिन अब मौन तोड़ देने का समय था…हम बोल रहे हैं…

और हां, हमने उस वीडियो और फेसबुकिया साज़िश के गंदे खेल को रोकने के लिए माफ़ीनामा ज़रूर हटाया पर उसे हटाने का मतलब उसका खंडन भी नहीं है, मैं फिर से कहता हूं कि मैं उसकी मानहानि पर उतना ही दुखी हूं, जितना चिंतित वह हमारे ऊपर हो रहे हमलों से हैं…इस प्रकरण में उनके साथ हमको भी लगातार फ्रेम ही किया गया…उनका साथी ही बताया गया…उम्मीद है कि वे भी समझते होंगे…

इस मामले में हमारी पिछले कुछ दिनों में लगातार कामरेड Girijesh Tiwari से भी बात हुई है और उन्होंने हमारे पक्ष को कितना समझा है वो भी आपको साफ़ कर सकते हैं…बल्कि हम मानते हैं कि कर ही देंगे…

ख़ैर ये हमारा सच है, इसके अलावा जो भी बातें हैं, वो और कई लोग जानते हैं…उस 1 अक्टूबर की मीटिंग में कई लोग थे, जो ये सब जानते हैं…वो भी सच कहेंगे…आप में से किसी को ठगा नहीं गया है…ठगे हुए तो लगातार हम महसूस करते रहे…हां, हम अपनी ओर से ये सब रोकने की कोशिश में नाकाम ज़रूर हुए हैं, इसके लिए हम ज़रूर माफ़ी चाहते हैं…

फिलहाल इतना ही…क्योंकि हम पर दोनों ओर से एक दूसरे का साथ देने का आरोप लग रहा है…आप ही तय करें कि आखिर हम हैं किसके साथ…

मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.


Balendu Swami मयंक भाई, मुझे जिस प्रकार आपने उद्धृत किया है, उसके पहले 'अगर' था, साथ ही हमारी आपकी इस विषय में बहुत से पहलुओं पर चर्चा हुई. मुझे आप बहुत मजबूर लगे उस समय! आप भी मेरे लिए उतने ही अपरिचित हैं जितने कि आरोपी, पीड़िता अथवा आरोप लगाने वाले तपन इत्यादि. मैंने उस वीडियो को बिना एडिट किया हुआ पूरा और बड़ी तसल्ली के साथ देखा है. पहले तो मुझे आप या कोई भी ये बताये कि किस किस ने वह वीडियो देखा है? मेरे समझ में नहीं आ रहा कि तपन और उनके साथी उसे अपलोड क्यों नहीं कर रहे हैं अभी तक!

वह वीडियो ऐसा नहीं है जिसे कि आसानी से ख़ारिज किया जा सके. उसमें कोई आरोप नहीं बल्कि उस लड़की ने आंसुओं की धार के बीच उस रात का विस्तृत वृत्तान्त का वर्णन किया है. उस वीडियो को देखकर कदापि भी यह नहीं लगता कि उसे छुपाकर, ब्रेनवाश करके या दबाव में या पुटिया कर बनाया गया है! जिस प्रकार से दावे किये जा रहे हैं कि वो लड़की सामने नहीं आना चाहती या अब वो सामने नहीं आएगी, परन्तु वो सामने तो आ ही चुकी है वीडियो के माध्यम से और यदि कल को वो आपके सामने आकर खड़ी भी हो गई तो क्या कीजियेगा? और मुझे लगता है कि वो आज नहीं तो कल सामने आ भी जायेगी.

मैंने तो तपन से भी कहा था कि कहानी लिखने से अच्छा तो यह है कि वो वीडियो को सामने लायें और लोगों को खुद फैसला लेने दें. मुझे पहले भी आप मजबूर दिखे थे आज भी मजबूर ही दिख रहे हो. एक बात बहुत ही अजीब मुझे सभी जगह दिखाई दे रही है कि उस लड़की की अनुपस्तिथी में बिना उसका पक्ष जाने सभी लोग एकतरफा निर्णय ले रहे हैं और उसके लिए जो मन में आ रहा है, कह रहे हैं. कल्पना करिए कि कल को अगर वो सामने आकर वही कहने लग जाए जो उसने वीडियो में कहा है, फिर क्या होगा!

खुर्शीद जी तथा अन्य साथियों से जैसा सुना कि वह पुलिस और कानूनी कार्यवाही पर विचार कर रहे हैं तो मैंने भी उनसे यही कहा था कि यदि सत्य आपके साथ है तो अवश्य ही आपको अपनी सुरक्षा की व्यवस्था और चिंता करनी चाहिए!

बालेंदु स्वामी के फेसबुक वॉल से.


Samar Anarya : शुक्रिया Mayank भाई, देर से ही सही बोल कर आपने हम तमाम दोस्तों का यकीन टूटने से बचा लिया वरना अब बात सच में हाथ से निकल रही थी. बस यह जरुर कहूँगा कि आपने माफ़ीनामा हटाने के पहले इस मुद्दे से जुड़े रहे हम तमाम लोगों में किसी एक को यकीन में ले लिया होता तो किसी जयकरण सिंह की बात से क्या ही भ्रम फैलता. खैर देर आयद दुरस्त आयद. अब आपके बयान के बाद स्थिति साफ़ हो गयी है. यह कि पीड़िता तो कोई है ही नहीं (वह अब भी सामने आ जाएँ तो और बात है.)) यह भी कि मधु किश्वर नामक मोदी भक्तिन के ऑफिस में बनाये गए वीडियो को लेकर शहर शहर घूम रहे लोगों को पैसा कहाँ से मिल रहा है यह भी बहुत कुछ साफ़ कर देता है.

सो जैसा कि हमेशा कहता रहा हूँ, आँधियाँ हाथ थामने का वक़्त होती हैं, अफ़सोस आपकी चुप्पी ने कुछ देर परेशान जरुर किया पर अब बोलने ने सब कुछ साफ़ कर दिया है. अब मिल के इन जह्रीलों का जहर उतारने का वक़्त आ गया है. और इन्ही का नहीं, उन तमाम निष्पक्ष/निष्कच्छ/सपच्छ/सकच्छ जन का भी जो मधु किश्वर के नेतृत्व में काम कर रहे "कामरेडों" के दम पर एक वरिष्ठ साथी के जीवन भर के संघर्षों पर मिटटी फेर उसके शिकार पर निकले थे.

मुझे लगता है कि अब उन पर कार्यवाही करने का वक़्त आ गया है. मिल के निपटते हैं अब इनसे.और इस निपटने में पहले सवाल..

१. ज़हरीला तपन: न्याय के सिपाही बनते घूमते हो (मधु किश्वर के पैसे से वह और बात है) हिम्मत हो तो सीधे नाम लो. भाग क्यों रहे हो? अदालत जाने से डर लगता है?

२. खद कामरेड होने के दावे वाले तुम लोगों ने यह वीडिओ चुन चुन के मोदी समर्थक पत्रकारों को ही क्यों दिखाया? ऐसे लोगों की तमाम पोस्ट्स हमने पढ़ी हैं मियाँ जिनसे तुम्हारे चेहरे का नकाब उतरता है.

३. कामरेड गिरिजेश तिवारी और Balendu Swami के अलावा तुमने सिर्फ और सिर्फ घोषित साम्प्रदायिक लोगों की मदद ली है. क्यों?

जवाब हों तो जरुर देना, बाकी अनंत काल तक तथ्य इकट्ठे करते रहने का फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा जहरीलों … किसी की जिंदगी भर के संघर्षों की कमाई इतनी सस्ती नहीं है कि मधु किश्वर जैसों को बिक गए लोगों पर लुटा दी जाय.

अविनाश पांडेय 'समर' के फेसबुक वॉल से.


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