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बिहार

वीरेंद्र यादव की चुनाव यात्रा (दो) : उपचुनाव की घोषणा की थी प्रतीक्षा

: ऑफ में जाकर करता था जनसंपर्क : प्रभात खबर में मेरा स्थानांतरण पटना से गया हो गया था। गया से औरंगाबाद जाना काफी आसान था। ट्रेन में टिकट की कोई बाध्यता नहीं थी। गया से अनुग्रह नारायण रोड जाने के लिए काष्टा तक और अनुग्रह नारायण से गया आने के लिए फेसर तक का टिकट ले लेता था। एक स्टेशन का किराया मात्र दो रुपये लगते थे। यानी दो रुपये में 11 रुपये की यात्रा का आनंद। मेरे पास पटना से गया तक एमएसटी था। इस कारण गया जंक्शन में धर-पकड़ की आशंका से दूर रहता था।

: ऑफ में जाकर करता था जनसंपर्क : प्रभात खबर में मेरा स्थानांतरण पटना से गया हो गया था। गया से औरंगाबाद जाना काफी आसान था। ट्रेन में टिकट की कोई बाध्यता नहीं थी। गया से अनुग्रह नारायण रोड जाने के लिए काष्टा तक और अनुग्रह नारायण से गया आने के लिए फेसर तक का टिकट ले लेता था। एक स्टेशन का किराया मात्र दो रुपये लगते थे। यानी दो रुपये में 11 रुपये की यात्रा का आनंद। मेरे पास पटना से गया तक एमएसटी था। इस कारण गया जंक्शन में धर-पकड़ की आशंका से दूर रहता था।

औरंगाबाद लगातार जाने के कारण बभनडीहा पंचायत के उपचुनाव में मेरी रुचि बढ़ने लगी थी। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 20 दिसंबर, 12 को चुनाव कराने की घोषणा ने मेरे उत्साह को और बढ़ाया। चुनाव की घोषणा अक्टूबर में की गई थी। घोषणा के बाद मैं आफ के दिन बभनडीहा पंचायत के विभिन्न गांवों में जाकर लोगों से मुलाकात करता था और उन्हें चुनाव लड़ने की इच्छा से अवगत भी कराता था। इस दौरान स्थानीय और जातीय समीकरणों के अनुसार लोगों से मिलना-जुलना जारी था। वार्ड पार्षदों से मुलाकात करता था। उनसे  वहां के मतदान व्यवहार (वोट विहैवियर) को भी समझने की कोशिश करता था। दूसरी पंचायत से चुनाव लड़ने का साहस जुटाने में सबसे बड़ी ताकत व आत्मबल साबित हुआ था हमारी जाति यादव।

औरंगाबाद जिले का दाउदनगर अनुमंडल यादव प्रभाव वाला माना जाता है। ओबरा प्रखंड इसी श्रेणी में आता है। मेरी अपनी ग्राम पंचायत डिहरा से बभनडीहा पंचायत की दूरी लगभग 8 किलोमीटर है। आने-जाने का मुख्य मार्ग है कारा-डिहरा रोड। सड़क की स्थिति जर्जर है। यही कारण डिहरा का मुख्य बाजार दाउदनगर या डेहरी (जिला रोहतास) है। हालांकि डिहरा भी एक कस्बा बन गया है। दाउदनगर से बारुण तक जाने वाली सड़क डिहरा होकर गुजरती है और प्रतिदिन डिहरा से होकर कम से कम 20 गाड़ियां दाउदनगर व बारुण के लिए खुलती हैं, जबकि ओबरा के लिए मात्र एक गाड़ी खुलती है। प्रखंड मुख्यालय होने के बाद भी ब्लॉक के काम से ही लोग ओबरा आते-जाते हैं। सड़क जर्जर होने के कारण ही चुनाव के दौरान मैंने अपना चुनाव अभियान दाउदनगर प्रखंड के मायापुर से चलाया। यह सड़क एनएच 98 के पास स्थित है। मायापुर जिनोरिया के पास पड़ता है और जिनोरिया से बभनडीहा का बसों से किराया मात्र पांच रुपया था। बस से यह दूरी 15 से 20 मिनट तक की थी।

यह पूरा इलाका यादव बहुल माना जाता है। बभनडीहा पंचायत में भी यादवों की संख्या काफी है। हालांकि यहां मुसलमानों के बाद पासवान की संख्या है और उसके बाद यादवों की। यानी वोट की संख्या के हिसाब से यादव तीसरे स्थान पर है। यहां पैक्स अध्यक्ष भी यादव गौरी शंकर सिंह हैं। हालांकि पंचायत में कोई वार्ड पार्षद यादव नहीं हैं। नामांकन के पूर्व अपने जनसंपर्क में मेरी यह कोशिश रहती थी कि हर जाति के लोगों के पास जाएं और उनके रुझान को समझने की कोशिश करें। यादव, भूमिहार, पासवान, रविदास, कुम्हार, कहार, डोम, ब्राह्मण सभी जातियों के लोगों से मिलता था। इस दौरान उनके यहां कम से कम पानी पीने का जरूर प्रयास करता था, ताकि परिचय को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सके। भूख लगने पर खाना भी मांग कर खा लेता था। बातचीत में लोग इस बात पर अधिक बल देते थे कि आप अपनी जाति को ठीक कीजिए।

जनसंपर्क में ओबरा के साथी ब्रजेश द्विवेदी से काफी सहयोग मिल रहा था। वह पत्रकार हैं और स्थानीय राजनीति में अपनी पहचान भी रखते हैं। उन्होंने कई बार अपनी बाईक से कई गांवों में ले गए और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं तथा जनप्रतिनिधियों से परिचय भी कराया। यादवों के साथ परिचय को प्रगाढ़ करने में मेरा नाम ही काफी था। पंचायत चुनावों में कुछ पराजित उम्मीदवारों से संपर्क किया और उनसे सहयोग मांगा। इसी दौरान कई प्रतिनिधि पतियों से भी मेरा परिचय हुआ। कार्य व्यवहार में वही प्रतिनिधि होते हैं। गांव के लोग भी उन्हें अपना प्रतिनिधि मानते हैं। बभनडीहा पंचायत की पंचायत समिति सदस्य के पति से काफी सक्रिय हैं। उन्होंने भी मेरी इच्छा पर अपनी सहमति जताई। चुनाव पूर्व अभियान में पंचायत के सभी गांवों की गलियों को खंगाल चुका था। काफी लोगों से परिचय भी हो चुका था। वोट देने व मिलने का विश्वास सभी लोगों ने दिया। कुछ लोगों ने समीकरण को मेरे प्रतिकूल भी बताया। लेकिन इतना जरूर कहा कि चुनाव लड़ने का सबको अधिकार है और आप भी लड़ सकते हैं। जो लड़ेगा, वही न हारेगा या जीतेगा।

(जारी)

 इसके पहले के भाग को पढ़ने के लिए दिए गए शीर्षक पर क्लिक करें –

वीरेंद्र यादव की चुनाव यात्रा (एक) : बभनडीहा की पहचान हैं जगतपति कुमार

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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