गांवों में सामाजिक रूप से प्रभावी और सक्रिय लोगों से मदद मिलने की उम्मीद थी हमें। इस कारण अपने जनसंपर्क के दौरान उनसे प्राथमिकता से मिलता था। इस क्रम में जाति का हिसाब भी रखना पड़ता था। पूरे पंचायत में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं था, जिसका अपने गांव व समाज पर असर हो। लेकिन हर व्यक्ति का अपने परिवार पर असर से इंकार नहीं किया जा सकता है। मैं अपने अभियान में बिना सूचना के किसी के दरवाजे पर पहुंच जाता था।
कुराईपुर में एक हैं महावीर सिंह यादव। बड़ी जोत वाले हैं। उनका मकान ओबरा में भी है। वहां उनके लड़के सरोज से मुलाकात हुई। उनकी पत्नी पंचायत में न्याय मित्र हैं। इस कारण सरपंच और पंचों से उनका बेहतर संबंध था। उन्होंने कहा भरोसा दिलाया कि चुनाव प्रचार के दौरान आप मेरे घर पर रह सकते हैं। हालांकि बाद में उनके भाई मनोज सिंह भी मैदान में आ गए। सरोज के कहने पर मैं सरपंच नारायण जी के घर गया। वहां उनके भाई दुर्गा प्रसाद गुप्ता से मुलाकात हुई। उनके एक भाई राजेश्वर प्रसाद गुप्ता मेरे गांव डिहरा में डॉक्टर हैं। इस कारण उनलोगों से थोड़ा गहरा लगाव हो गया। उन्हीं के परामर्श पर मैं पिछले चुनाव में मुखिया के उम्मीदवार रहे इंद्रदेव सिंह से मिलने खरांटी बिगहा पर गया। धान की कटनी चल रही थी। वे खलिहान बना रहे थे। उन्होंने कहा कि इस बार वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन किसका समर्थन करेंगे, यह अभी तय नहीं है। क्योंकि अभी नामांकन ही शुरू नहीं हुआ है।
खरांटी में वीरेंद्र पांडेय से मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि हम लोग तो जोरन हैं। आप अपनी जाति को ठीक रखिए। कुराईपुर में गौरीशंकर सिंह से मुलाकात की। वे पंचायत के पैक्स अध्यक्ष हैं। उन्होंने भी अपने पते नहीं खोले, लेकिन इतना जरूर कहा कि हम एक जिम्मेवार पद पर हैं और हल्के में कोई बात नहीं कह सकता हूं। इसी गांव के महेंद्र सिंह हैं। उनकी पत्नी पंचायत समिति की चुनाव हार चुकी थीं। उनसे चुनाव को लेकर चर्चा हुई। इसी गांव का बिगहा है रामलगन बिगहा। यहां वार्ड पार्षद रहते हैं विश्वकर्मा पासवान। यह बिगहा मूलत: पासवानों का है। यह गांव से थोड़ी दूरी पर है। इस गांव में जाकर लोगों से मिला। उनसे मिला और अपने चुनाव लड़ने के बारे में बताया। यहां एक मिले सुरेंद्र पासवान। बाद में वह भी मैदान में थे।
पूर्णाडीह गांव की वार्ड पार्षद एक महिला हैं, जो उपमुखिया भी हैं। उपमुखिया पति अनिल शर्मा से मिलने उनके गांव गया। उनसे भी मिला। वे पहले से भी उपचुनाव की तैयारी में लगे हुए थे। मुखिया की हत्या के बाद प्रभार में उपमुखिया पति ने सत्ता का आनंद करीब से देखा था। इस कारण मुखिया बनने की इच्छा होना स्वाभाविक था।
(जारी)
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वीरेंद्र यादव की चुनाव यात्रा (एक) : बभनडीहा की पहचान हैं जगतपति कुमार
वीरेंद्र यादव की चुनाव यात्रा (दो) : उपचुनाव की घोषणा की थी प्रतीक्षा
वीरेंद्र यादव की चुनाव यात्रा (तीन) : स्थानीय नेता और अधिकारियों से समझा समीकरण






