: 1942 में सचिवालय पर झंडा फहराते समय हुए थे शहीद : समन्वयवादी है पंचायत की सामाजिक संरचना : मुखिया की हत्या के बाद हो रहा था उपचुनाव : औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड की बभनडीहा ग्राम पंचायत एनएच 98 पर स्थित है। ओबरा प्रखंड मुख्यालय से सटी हुई है यह पंचायत। इस पंचायत में कुल तीन राजस्व गांव हैं- बभनडीहा, खरांटी व कुराईपुर। बभनडीहा से जुड़ा है पूर्णाडीह और कुराईपुर से जुड़ा है रामलगन बिगहा। इन पांच गांवों में कुल 11 वार्ड हैं। इस पंचायत में कुर्मी व राजपूत जाति का कोई घर नहीं है। पूर्णाडीह में दो वार्ड हैं। उपमुखिया भी इसी गांव की हैं। इस गांव में यादव व मुसलमान परिवार नहीं रहता है। लेकिन यहां के दोनों बूथों पर मुसलमान वोटरों की संख्या काफी है। ये मुसलमान वोटर बभनडीहा के निवासी हैं। इस गांव में कुशवाहा, पासवान, भूइयां की काफी तादाद है। कुछ घर बढ़ई मिस्त्रियों के है।
बभनडीहा पूरी तरह मुसलमानों का गांव है। यहां मात्र पांच घर तेली और एक घर पासवान जाति के लोग रहते हैं। इन दोनों जाति के वोटरों की संख्या 60 से ज्यादा नहीं है। यहां मुसलमानों में अगड़ा-पिछड़ा का भेदभाव चुनाव में साफ दिखता है। यह गांव एनएच के किनारे बसा हुआ है। यहां भी दो वार्ड हैं और दो बूथ भी। पंचायत का सबसे बड़ा गांव है खरांटी। पुनपुन नदी और नहर के बीच में बसे इस गांव में एक भी मुसलमान परिवार नहीं रहता है। इस गांव में चार वार्ड और चार बूथ हैं। वोटरों की संख्या करीब 1600 है। यह गांव भूमिहार प्रभाव वाला माना जाता है। इस गांव में भूमिहारों के साथ यादव, ब्राह्मण, कुम्हार, कहार, पासवान, रविदास जाति लोग बड़ी तादाद में रहते हैं। हालांकि खत्री, डोम, बनिया जाति के लोगों की संख्या भी है।
पुनपुन नदी के किनारे बसा है कुराईपुर। गांव के बीच से निकलती है नहर। इस गांव में तीन बूथ और तीन वार्ड हैं। यहां यादव, मुसलमान, कुशवाहा, मलाह की बड़ी तादाद है। दूसरी जातियां भी हैं। इसी गांव का बिगहा है रामलगन बिगहा। इस बिगहा पर अधिकांश लोग पासवान जाति के ही हैं। हालांकि कुछ घर रविदासों का भी है। पंचायत के 11 बूथों में से खरांटी में स्थित चार बूथों पर एक भी वोटर मुसलमान नहीं हैं। जबकि बभनडीहा व पूर्णाडीह के चार बूथों पर एक भी वोटर यादव व भूमिहार नहीं हैं। कुराईपुर के तीनों बूथों पर कोई वोटर भूमिहार नहीं है। यह पूरा इलाका पूर्वी सोन नहर से सिंचित है। मूलत: यहां धान व गेहूं की फसल होती है। कुछ दहलन भी हो जाता है। गेहूं के साथ पैरा के रूप में सरसों भी खूब होता है। वसंत में सरसों अपने उफान पर होता है और बधार पीला ही नजर आता है।
पुनपुन की कलकल धारा ओबरा व बभनडीहा पंचायत की सीमा है। स्थानीय जरूरतों के लिए बाजार ओबरा ही है। शिक्षा का केंद्र भी ओबरा है। बभनडीहा पंचायत में कोई हाई स्कूल नहीं है। यह पांच पंचायतों से घिरा है। ओबरा, रतनपुर, कारा, डिहरी और इमलौना पंचायत इसकी सीमा को स्पर्श करती है। इस पंचायत की पहचान है शहीद जगतपति का स्मारक। 1942 में सचिवालय पर झंडा फहराने के दौरान शहीद हुए जगतपति कुमार इसी पंचायत के खरांटी गांव के निवासी थे। उनकी याद में खरांटी में पुनपुन नदी की गोद में एक पार्क बनाया गया है, जिसमें जगतपति की प्रतिमा लगाई गई है। यह स्मारक पूर्व विधायक राजाराम सिंह ने अपने विधायक कोटे की राशि से बनवाया था।
रोजी-रोटी व रोजगार की यहां समस्या नहीं है। सिंचित इलाका होने के कारण मजदूरों को काम मिल जाता है। बहुत सारे युवा रोजगार की तलाश में बाहर भी गए हुए हैं। बगल में प्रखंड मुख्यालय ओबरा होने के कारण रोजगार के अनेक अवसर हैं। ओबरा अब बड़ा बाजार बन गया है। यहां से करीब पांच किलो मीटर की दूरी अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन है। बाजार के लिए आवागमन भी सुलभ है। शिक्षा के लिए ओबरा में तीन हाई स्कूल हैं, जबकि एक निजी कॉलेज भी संचालित हो रहा है। ट्यूशन का कारोबार भी यहां खूब चल रहा है। कुल मिलाकर बभनडीहा पंचायत की सामाजिक संरचना और आर्थिक आत्मनिर्भरता उसे एक प्रगतिशील पंचायत के रूप में निरूपित करता है। हालांकि राजनीतिक रूप से जाति व गांवों में बंटी पंचायत यह बताने के लिए पर्याप्त है कि यहां का सामाजिक व राजनीतिक तानाबाना राज्य की अन्य पंचायतों से अलग नहीं है। उल्लेखनीय है कि मुखिया की हत्या के बाद बभनडीहा पंचायत में उपचुनाव हो रहा था।
(जारी)






