आईआईएमसी दिल्ली के हिंदी पत्रकारिता विभाग में हर बैच का एक ग्रुप मेल आईडी बनाया जाता है। इस मेल आईडी में उस बैच के सारे प्रशिक्षुओं के ईमेल आईडी जुड़े होते हैं। जब भी आईआईएमसी की ओर से कोई सूचना आदि जारी करनी होती है तो इस ईमेल आईडी पर मेल किया जाता है। कई बार उस बैच के एल्मनाइज भी आपस में जुड़े रहने और अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ की बातें शेयर करने के लिए मेल करते हैं। 18 फरवरी को देर रात आईआईएमसी के असोसिएट प्रोफेसर और हिंदी पत्रकारिता के पूर्व कार्यक्रम निदेशक डॉ. आनंद प्रधान ने इस मेल आईडी पर एक ईमेल किया, जो इस प्रकार है…
प्रिय अनुग्रह
आपकी रूचि देखते हुए वेंडी डोन्जियर की किताब का पीडीएफ लिंक भेज रहा हूँ जहाँ से आप इसे डाउनलोड करके पढ़ सकते हैं:
http://hostb.org/207
http://www.amazon.in/The-Hindus-An-Alternative-History/dp/1594202052
आपका,
आनंद
Anand Pradhan
इस लिंक पर लॉगइन करने पर अमेजन वेबसाइट पर किताब ‘द हिंदू : एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री’ का पीडीएफ खुलता है। डॉ. प्रधान के इस मेल के जवाब में रविकांत शर्मा (पूर्व प्रशिक्षु, आईआईएमसी, हिंदी पत्रकारिता, 2010-11 बैच) ने 19 फरवरी को रात करीब 1.30 बजे मेल पर ये जवाब लिखा….
अभिव्यक्ति कि स्वतंत्रता का मतलब किसी का अपमान करना नहीं होता है और गलत तथ्य देना भी नहीं । किसी अमेरिकी से हमें हिन्दू धर्म के बारें में सीखने कि जरुरत भी नहीं …. और अगर किसी को कुछ आपत्ति है तो संविधान ने उसे कोर्ट में जाने का अधिकार भी दिया है तो कोई इस किताब को लेकर कोर्ट में गया तो आप को क्या आपत्ति है ??? अपने भारतीय के अधिकार की चिंता न करके विदेशियो कि चिंता करना आप जैसे लोगो कि पुरानी आदत है…कृपया आप की जानकारी के लिए बता दूं किताब के प्रकाशक ने भी किताब में तथ्य की गलती स्वीकार की हैं उसे लेकर ही शिक्षा बचाओं समिति कोर्ट में गयी थी…..जो उनका संवैधानिक अधिकार है…. आज आप ने किताब मेल की और तसलीम नसरीन ने CNN-IBN को दिये गये इंटरव्यू http://khabar.ibnlive.in.com/news/116216/1 में आप जैसे लोगो की पोल खोली है किताब तो आपने पढ़ ली होगी कृपया यह इंटरव्यू भी पढ़े और मंथन करें । मैं भगवान प्रार्थना करूंगा आपको गलत और सही का अन्तर समझ आये और आप लोगो कि भावना का समान करें…. मैं आप का और आप कि इस गलत मानसिकता का विरोध करता हूँ।
ravi
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ज्ञात हो कि लाल विचारों के डॉ. प्रधान और भगवा विचारों के रविकांत में आईआईएमसी के क्लासरूम में लेक्चर के दौरान भी कई वैचारिक भिड़ंत हुआ करती थी। अभी तक डॉ. प्रधान ने रविकांत के उपरोक्त ईमेल रिप्लाय का कोई जवाबी रिप्लाय नहीं किया है। आईआईएमसी के हिंदी पत्रकारिता विभाग में अक्सर तीन विचारों वाले खेमे होते हैं। वाम, दक्षिण और निष्पक्ष। निष्पक्ष तो इस ग्रुप मेल पर मूक दर्शक होते हैं। वाम और दक्षिण पंथ क्लासरूम में तो भिड़ा ही करता था लेकिन इस ग्रुप मेल पर भी इनकी भिड़ंत आम है। ग्रुप मेल पर पूर्व छात्रों का वैचारिक आमना-सामना तो सामान्य है लेकिन डॉ. प्रधान और पूर्व छात्र के बीच ये भिड़ंत क्या रुख लेगी और क्या डॉ. प्रधान रविकांत के ईमेल-रिप्लाय का जवाब देते हैं इसके लिए आईआईएमसी हिंदी पत्रकारिता सारे बैच के प्रशिक्षु इंतजार कर रहे हैं। सभी बैच इसलिए क्योंकि डॉ. प्रधान ने सभी बैच के ग्रुप-ईमेल आईडी और अन्य लोगों के आईडी पर ये मैसेज भेजा था और रविकांत ने इस सारी ईमेल आईडी पर जवाब भी दिया है।
आईआईएमसी से जुड़े एक शख्स द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित.
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