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शशि शेखर के ‘हिंदुस्तान’ में आपराधिक प्रवृत्ति के कई पत्रकार!

शशि शेखर जिस हिंदुस्तान अखबार के समूह संपादक हैं, उस अखबार में आपराधिक प्रवृत्ति के पत्रकारों की भरमार है। जघन्य अपराधों को अंजाम दे चुके अपराधियों को क्राइम रिपोर्टिंग जैसा अहम दायित्व दे रखा है, जो आज कल चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। बात फिलहाल हिंदुस्तान अखबार की बरेली यूनिट की करते हैं, यहाँ रिपोर्टिंग जैसी अहम जिम्मेदारी आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के हाथों में हैं। बरेली शहर में क्राइम बीट कवर करने वाले अवनीश पांडेय पर पुलिस जांच में गंभीर आरोप सिद्ध हो चुके हैं, इसके बावजूद उसे क्राइम रिपोर्टर बना रखा है।

शशि शेखर जिस हिंदुस्तान अखबार के समूह संपादक हैं, उस अखबार में आपराधिक प्रवृत्ति के पत्रकारों की भरमार है। जघन्य अपराधों को अंजाम दे चुके अपराधियों को क्राइम रिपोर्टिंग जैसा अहम दायित्व दे रखा है, जो आज कल चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। बात फिलहाल हिंदुस्तान अखबार की बरेली यूनिट की करते हैं, यहाँ रिपोर्टिंग जैसी अहम जिम्मेदारी आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के हाथों में हैं। बरेली शहर में क्राइम बीट कवर करने वाले अवनीश पांडेय पर पुलिस जांच में गंभीर आरोप सिद्ध हो चुके हैं, इसके बावजूद उसे क्राइम रिपोर्टर बना रखा है।

पीलीभीत जिले में स्थित पूरनपुर थाना क्षेत्र के गाँव सबलापुर निवासी अवनीश पांडेय पिता भगवान स्वरूप पांडेय पांच वर्ष पहले तक फर्जी ड्रग इंस्पेक्टर बन कर झोलाझाप डॉक्टरों और मेडिकल स्टोर पर छापा मारता था। 8 नंबवर 2007 को भी इसने अपने दो अन्य साथियों के साथ एक मेडिकल स्टोर पर ड्रग इंस्पेक्टर बन कर छापा मारा था, लेकिन इस बार मेडिकल स्टोर स्वामी बलजिन्दर सिंह पुत्र हरी सिंह निवासी नवदिया सुल्तानपुर थाना गजरौला ने इसे पकड़ लिया और जूते-चप्पलों व थप्पड़ों से मार लगाने के बाद गजरौला थाना पुलिस के हवाले कर दिया। 8 नवंबर 2007 को ही बलजिंदर सिंह की ओर से धारा 170/419/420/386 आईपीसी के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया, जो 722/2007 के रूप में थाना गजरौला में दर्ज है। पुलिस ने अवनीश पांडेय और उसके दो अन्य साथियों को जेल भेजा था, साथ ही जिला न्यायालय से जमानत अर्जी खारिज होने के कारण हाईकोर्ट से जमानत मंजूर हुई थी और लगभग एक वर्ष के बाद तीनों जेल से बाहर आये थे।

इस प्रकरण में जांच के बाद पुलिस ने 17-11-2007 को जुडिशियल मजिस्ट्रेट पीलीभीत के न्यायालय में अवनीश पांडेय सहित तीन लोगों के विरुद्ध चार्ज शीट दाखिल की थी, जो मुकदमा संख्या- 2593/2010 के रूप में विचाराधीन है और 14 अप्रैल 2010 को न्यायालय में भी आरोप पत्र जारी हो चुका है, इसके बाद अवनीश पांडेय पुलिस की नज़र में आ गया, जिससे बच कर धोखाधड़ी कर पाना आसान नहीं था, तो अपनी क्राइम हिस्ट्री छुपा कर उत्तराखंड में हल्द्वानी स्थित दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग करने लगा, इसके बाद बरेली स्थित अमर उजाला में आ गया और बरेली में लांच होने के बाद हिंदुस्तान में भी जगह पा गया, तब से हिंदुस्तान अखबार में क्राइम जैसी अहम बीट कवर कर रहा है, जो अपने आप में एक स्तब्ध कर देने वाली घटना है। सूत्रों का यह भी कहना है कि अपनी क्राइम हिस्ट्री छुपा कर अखबार में पत्रकारिता करने वाले अवनीश पांडेय ने हरदोई जिले के गाँव बेनीगंज निवासी एक परिवार में वरिष्ठ क्राइम रिपोर्टर का प्रभाव दर्शा कर अपनी शादी के रिश्ते की भी सेटिंग कर ली है। आगामी 8 फरवरी को इसकी बारात भी जाने वाली है, ऐसे में सवाल यह उठता है कि खुलासा होने पर अखबार तो नौकरी से निकाल कर गलती में सुधार कर सकता है, लेकिन वो लड़की क्या करेगी, जो इसके साथ सात फेरे ले चुकी होगी।

इसी तरह तीन दिन पहले बरेली के न्यायालय ने एक महिला की अर्जी पर हिंदुस्तान बरेली में ही क्राइम रिपोर्टिंग करने वाले नबी हसन के विरुद्ध बलात्कार का मुकदमा दर्ज करने का आदेश बरेली पुलिस को दिया है, जिससे नबी हसन भूमिगत बताये जा रहे हैं, ऐसे ही अन्य कई मामले हैं, जिनका एक साथ उल्लेख कर पाना संभव नहीं है।

खैर, सवाल फिर वही उठ रहा है कि पत्रकारिता में नैतिकता और गुणवत्ता को लेकर चिंता का अक्सर प्रदर्शन करने वाले देश के जाने-माने संपादक शशि शेखर भी क्राइम बीट जैसी अहम जिम्मेदारी देने से पहले संबंधित रिपोर्टर की एलआईयू जांच क्यूं नहीं कराते या यह माना जाये कि उन्होंने क्राइम बीट को अच्छे से कवर करने के लिए अपराधियों को वरीयता देनी शुरू कर दी है।

बरेली से प्रदीप रावत की रिपोर्ट. संपर्क: [email protected]

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