आदरणीय यशवंत जी, भड़ास मीडिया, नमस्कार। आपके मीडिया पोर्टल ने हम जैसे मारे-हारे हुए को एक नया जोश-खरोश दिया है। यह तो कल ही तय करेगा कि हम जैसों को इससे कितना सहारा मिल पायेगा? परन्तु एक बात तो सत्य है कि इस पोर्टल के माध्यम से अपनी भड़ास निकाल कर काफी संतुष्ट होते हैं हम। इसके लिए मैं हारे-मारे लोगों की तरफ से आपको कोटि-कोटि धन्यवाद देता हूँ।
शशि शेखर, प्रधान संपादक, हिन्दुस्तान, ने मुझे साइबर क्राइम डिपार्टमेंट से धमकी दिलवाई की खबर किसी अखबारों ने नहीं छापी और आपने सत्य को अपने पोर्टल में जगह दी। इसके लिए पुनः धन्यवाद। मैंने शशि शेखर के इस कारनामे के खिलाफ लड़ाई ठान चुका हूँ और जब तक इसे मुकाम तक, आपके सहयोग से न पहुँचाऊँ तबतक चैन की नींद न लूँगा। साइबर क्राइम डिपार्टमेंट से इस संबंध में सूचनाधिकार अधिनियम 05 के तहत उस समय तक पूछता रहूँगा जबतक विभाग द्वारा शशि शेखर पर कार्रवाई नहीं की जाती।
मैंने अपने 03/05/13 के पत्र में उन्हें 'चोर टाइप पत्रकारों का सरदार' कहा था, जिससे चिढ़ कर शशि शेखर द्वारा साइबर क्राइम डिपार्टमेंट का अवैध सहारा लिया गया! मैंने शशि शेखर को 'चोर' या 'चोर का सरदार' कभी नहीं कहा। जबकि साइबर क्राइम डिपार्टमेंट ने अपनी धमकी के पत्र में कहा कि आपने शिकायतकर्ता को 'चोर' या 'चोर का सरदार' कहा। यह आरोप सरासर गलत लगाया गया है मुझ पर! यह तो धन्यवाद देता हूँ भड़ास मीडिया पोर्टल का जिसके माध्यम से मुझे यह ज्ञात हुआ कि कुंभ के मेले में हिन्दुस्तान इलाहाबाद एवं हिन्दुस्तान टाईम्स द्वारा 1 कंबल, 1 चादर, 1 आलमारी, 1 कुर्सी हाथदार, 11 दर्री, 4 मग, 4 बाल्टी की चोरी की गई है जिसकी सूची मेला प्रशासन द्वारा जारी की गई है।
यदि मैं 03/05/13 के पहले इस समाचार को जान लेता तो शशि शेखर को उपाधि कुछ और दी जाती। कितना आश्चर्य होता है ऐसी हस्ती के अंदर कार्यरत पत्रकार चोर निकले, वह भी दरी और चादर जैसे मामूली चीजों के! घृणा होती है ऐसे पत्रकारों पर और ऐसे पत्रकारों के सरदार पर! इसके बावजूद भी अपनी हस्ती दिखाने हेतु एक मामूली आदमी पर साइबर क्राइम डिपार्टमेंट से धमकी दिलवाने का घृणित कार्य करते हैं।
क्या शशि शेखर ऐसे पत्रकारों के सरदार नहीं हैं? क्या कंबल, दरी, बाल्टी इत्यादि की चोरी, चोरी नहीं है? क्या शशि शेखर इसे नकार सकते हैं? क्या हिन्दुस्तान का प्रबंधकीय बोर्ड इस मामले की सुध ले रहा है? या शशि शेखर को बढ़ावा दे रहा है? पत्रकारिता के नाम पर ऐसे जुल्म क्यों? क्या एक आम आदमी पत्रकारिता के नाम पर भी पीड़ित होता रहेगा?



आवेदक
प्रमोद कुमार सिंह
आर टी आई कार्यकर्ता
गौसगंज, आरा, बिहार
वर्तमान- भुरकुण्डा बाजार,
रामगढ़, झारखण्ड
मूल खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें – शशिशेखर ने मुझे साइबर क्राइम डिपार्टमेंट से धमकी दिलवाई!






