सामाजिक कार्यकर्ता डा. नूतन ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री से 5 जून 2013 को सहारनपुर जिले के पुलिस कांस्टेबल राहुल ढाका को ड्यूटी के दौरान गोली मार कर ह्त्या करने के मामले में डिप्टी एसपी जिया उल हक़ की तरह आर्थिक सहायता और दो सदस्यों को नौकरी की मांग की है. डॉ ठाकुर ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की ऐसी कोई नीति नहीं होगी जो शहीदों की मौत में कर्मचारी के पद अथवा जाति अथवा धर्म के आधार पर भेद करती हो.
उनके अनुसार यह पूरा घटनाक्रम जिया उल हक़ की ह्त्या से मिलता-जुलता है. दोनों ही अपनी सेवा के दौरान अपना कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए. फर्क सिर्फ यह है कि इस मामले राहुल ढाका को छोड़ कर भागने वालों में उनके वरिष्ठ अधिकारी सीओ सदर उमेश यादव शामिल थे. अतः उन्हें छोड़ कर भाग जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ निश्चित समयावधि में जांचकर कार्यवाही की जाए.
भेजा गया पत्र—
सेवा में,
मा. मुख्य मंत्री
उत्तर प्रदेश
विषय:- पुलिस कांस्टेबल राहुल ढाका के मुआवजे से सम्बंधित
महोदय,
कृपया निवेदन है कि मैं डा. नूतन ठाकुर, पत्नी श्री अमिताभ ठाकुर, निवासी- 5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ, फोन नंबर- 9415534525 एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ. अपने इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान आज दिनांक 6 जून 2013 के समाचार पत्रों दैनिक जागरण (पृष्ठ संख्या 11), हिंदुस्तान (पृष्ठ संख्या 19) तथा अमर उजाला (पृष्ठ संख्या 4), लखनऊ संस्करण में छपी खबरों की ओर आकृष्ट करना चाहती हूँ. इन खबरों में यह बताया गया है कि किस प्रकार से बदमाशों ने जनपद सहारनपुर में सीओ सदर श्री उमेश यादव के साथ चल रहे पुलिस कांस्टेबल श्री राहुल ढाका की न सिर्फ गोली मार कर ह्त्या कर दी बल्कि उनका कार्बाइन भी ले कर फरार हो गए. इन सब में सबसे चौकाने वाली बात यह थी कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर रहे सीओ सदर श्री उमेश यादव व अन्य पुलिसकर्मी बदमाशों से मुठभेड़ करने की बजाय न सिर्फ छुप गए बल्कि ह्त्या होते व बदमाशों को बाईक लूट कर भागते हुए भी देखते रहे.
यह पूरा घटनाक्रम पिछले कुछ महीनों पहले प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र में हुए सीओ श्री जिया उल हक़ की ह्त्या की याद दिला देता है. इस पूरे घटनाक्रम में सिर्फ एक बात जो अलग है वह यह कि जहाँ श्री हक़ के मामले में मौके पर उन्हें छोड़ कर भागने वाले उनकी ही सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी व उनसे कनिष्ठ अधिकारी थे वहीँ श्री राहुल ढाका के मामले में उन्हें मौके पर छोड़ कर भागने वाले उनके सहकर्मी व उनके वरिष्ठ अधिकारी थे जिनकी सुरक्षा में वह तैनात थे. सिर्फ इस बात के अलावा दोनों की मौत में समानता है. दोनों ही अपनी सेवा के दौरान अपना कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए.
मुझे इस बात का पूरा विश्वास है कि उत्तर प्रदेश सरकार की ऐसी कोई नीति नहीं होगी जो शहीदों की मौत में भेद करती हो या फिर राज्य की ओर से दिए जाने वाले मुआवजे में कर्मचारी के पद अथवा जाति अथवा धर्म को आधार बना कर मुआवजे की राशि तय करती हो. इन्ही बातों को ध्यान में रख कर व उत्तर प्रदेश शासन का मुखिया होने के नाते मैं आपसे यह आशा करती हूँ कि इस मामले में भी आप उसी प्रकार की संवेदनशीलता का परिचय देंगे जैसा आपने श्री जिया उल हक़ के मामले में दिया था. साथ ही मैं आपसे निम्न प्रार्थना करती हूँ :-
1. श्री राहुल ढाका के परिवार की भी उसी प्रकार से आर्थिक सहायता की जाए व परिवार के दो सदस्यों को नौकरी दी जाए जिस प्रकार से श्री जिया उल हक़ के परिवार को दी गई थी.
2. श्री राहुल ढाका को मौके पर छोड़ कर भाग जाने वाले सीओ श्री उमेश यादव व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ निश्चित समयावधि में जांचकर दोषी पाए जाने पर उचित कार्यवाही की जाए.
भवदीया,
डा. नूतन ठाकुर
पत्रांक संख्या – NT/CM/PAWAN/01
दिनांक – 06 /06/2013





