पश्चिम बंगाल से पत्रकारों के लिए बहुत बुरी खबर है. हिंदी-अंग्रेजी-बंगाली तथा उर्दू अखबार का संचालन करने वाले शारदा समूह ने अपने सभी अखबारों को बंद कर दिया है. हिंदी, अंग्रेजी तथा उर्दू अखबार को उसने पहले ही बंद कर दिया था. अब उसने अपने बंगाली अखबार को भी बंद करने का ऐलान करते हुए कर्मचारियों को नोटिस थमा दिया है. 15 दिन में अखबार बंद करने की नोटिस मिलने से नाराज पत्रकार ऑफिस से कम्प्यूटर व अन्य सामान लेकर घर चले गए.
बताया जा रहा है कि समूह के समस्त अखबार बंद होने से नाराज कर्मचारी अब प्रबंधन के खिलाफ सड़क से लेकर कोर्ट तक में आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं. तमाम पत्रकार तथा गैर पत्रकार कर्मचारियों की सैलरी तथा पीएफ कंपनी ने चुकता नहीं किया है. उल्लेखनीय है कि शारदा समूह हिंदी में 'प्रभात वार्ता', अंग्रेजी में 'बंगाल पोस्ट', उर्दू में 'कलम' तथा बंगाली में 'साकाल बेला' का प्रकाशन कोलकाता तथा सिलीगुड़ी से कर रहा था.
कंपनी ने कुछ दिन पहले आर्थिक दिक्कतों को गिनाते हुए अपने अंग्रेजी, उर्दू तथा हिंदी अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया था. परन्तु बांग्ला अखबार का प्रकाशन कंपनी द्वारा जारी था, परन्तु दो दिन पहले प्रबंधन ने बांग्ला अखबार को भी बंद करने का निर्णय लेते हुए कर्मचारियों को 15 दिन की नोटिस पकड़ा दी. इस से नाराज पत्रकार तथा गैर पत्रकार कर्मचारी पन्द्रह दिन बाद काम बंद करने की बजाय सोमवार को काम बंद करके ऑफिस में पड़े सामानों को अपने साथ ले गए.
बताया जा रहा है कि इस समूह सभी अखबार में कर्मचारियों का लंबे समय का वेतन बकाया है. तमाम कर्मचारियों का पीएफ का पैसा भी प्रबंधन ने हड़प लिया है. प्रबंधन के फैसले से नाराज कर्मचारी अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के साथ ही सड़क पर भी लड़ाई को ले जाने की तैयारी कर रहे हैं. गौरतलब है कि पत्रकार कोटे से तृणमूल कांग्रेस द्वारा राज्यसभा सांसद बनाए गए कुणाल घोष शारदा समूह के अखबार में सीईओ के रूप में जुड़े हुए हैं. अब देखना है कि बंगाल सरकार पत्रकारों का साथ देती है या प्रबंधन का.






