: हिन्दुस्तान का फर्जीवाड़ा : पुलिस ने एफआईआर लिखकर जांच शुरू कर दी : मुंगेर । देश की जानी-मानी मीडिया मालकिन एचटी व हिंदुस्तान वाली और बिड़ला खानदान वाली शोभना भरतिया के खिलाफ नामजद एफआईआर लिख दी गई है. सिर्फ इन्हीं के खिलाफ नहीं, इनके कंटेंट व बिजनेस के प्रमुखों का नाम भी एफआईआर में है. मीडिया कोरपोरेट हस्ती और दैनिक हिन्दुस्तान की प्रमुख शोभना भरतिया, प्रकाशक अमित चोपड़ा, प्रधान संपादक शशि शेखर, पटना संस्करण के संपादक अकु श्रीवास्तव और भागलपुर संस्करण के उप-स्थानीय संपादक बिनोद बंधु अब बिहार के मुंगेर के कोतवाली थाना की कांड संख्या -445।2011 के नामजद अभियुक्त बन गए हैं.
कोतवाली पुलिस ने 20 नवंबर की शाम वर्णित सभी अभियुक्तों के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420।471 व 476 और प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट, 1867 की धारा 8 बी, 14 और 15 के तहत कोतवाली पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की है. सब -इंस्पेक्टर अमरजीत झा इस सनसनीखेज आर्थिक अपराध से जुड़े देशव्यापी कांड की जांच करेंगे.
यह प्राथमिकी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार सिन्हा के न्यायिक आदेश के आलोक में पुलिस अधीक्षक पी. कन्नन के निर्देश पर कोतवाली में दर्ज की गई है. बिहार की पुलिस दैनिक हिन्दुस्तान के अवैध प्रकाशन और कथित दो सौ करोड़ रुपए के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा के मामले की अब विधिवत रूप से जांच करेगी. कोतवाली के थाना-प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने आज इस संवाददाता को बताया कि जांचकर्ता सर्वप्रथम वादी व सूचक मंटू शर्मा का बयान दर्ज करेंगे. तत्पश्चात आरक्षी अधीक्षक या आरक्षी उपाधीक्षक स्तर के जिले के पुलिस अधिकारी इस मामले में पर्यवेक्षण करेंगे और अपनी पर्यवेक्षण रिपोर्ट देंगे.
फिर इस मुकदमे के अनुसंधानकर्ता अमरजीत झा संबंधित अभियुक्तों से पूछतछ करने के लिए भागलपुर, पटना और दिल्ली रवाना होंगे. स्मरणीय है कि सामाजिक कार्यकर्ता मंटू शर्मा ने मुंगेर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनोज कुमार सिन्हा के न्यायालय में दैनिक हिन्दुस्तान के फर्जीवाड़ा का मामला दायर किया था. दैनिक हिन्दुस्तान के मुंगेर संस्करण के अवैध प्रकाशन और लगभग 200 करोड़ के सरकारी विज्ञापन घोटाला में शामिल सभी अभियुक्तों और विगत दस वर्षों से मीडिया के इस देशव्यापी आर्थिक अपराध को बढ़ावा देने वाले आईएएस अधिकारी, सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय के निदेशक और सचिव स्तर के अधिकारी, प्रेस रजिस्ट्रार (नई दिल्ली) और डीएवीपी (नई दिल्ली) के संलग्न शीर्ष अधिकारियों को अविलंब गिरफ्तार करने की मांग उठने लगी है.
मीडिया जगत के इस सनसनीखेज विज्ञापन घोटाले को न्यायालय के माध्यम से उजागर करने वाले वरीय अधिवक्ता अशोक कुमार, काशी प्रसाद, अजय तारा, बिपिन मंडल ने मुख्यमंत्री नीतिश कुमार और पुलिस महानिदेशक अभ्यानन्द से इस देशव्यापी मामले में अनुसंधान का दायित्व आरक्षी उपाधीक्षक या आरक्षी अधीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपने की मांग की है. उनका तर्क है कि कांड की व्यापकता और गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार के आरक्षी अधीक्षक या आरक्षी उपाधीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी इस कांड का दायित्व संभालें, यही तकाजा है.
मुंगेर से काशी प्रसाद की रिपोर्ट





