Yashwant Singh : चले गए पत्रकार साथी क्रांति किशोर मिश्र Kranti Mishra. लखनऊ के ऐसे पत्रकार साथी जिनसे फोन और मेल पर लगातार संपर्क-संबंध कई वर्षों से बना हुआ था, भड़ास के चलते. इनका एक दुर्घटना में तीन दिन पहले निधन हो गया. आज मैं क्रांति भाई के मेल सर्च कर रहा था. कई मेल पढ़ डाला. ये साथी इतना सपाट और साफ लिखते थे कि लगता था कि मेरे जैसा ही कोई बंदा है… पर ऐसे चले जाएंगे, मुलाकात भी न हो पाएगी, एक बार भी नहीं.. मैंने कतई कल्पना नहीं की थी…
क्रांति भाई सुदर्शन टीवी के यूपी ब्यूरो चीफ थे. उसके पहले कई चैनलों अखबारों में काम किया. पत्रकारिता की गरिमा और सरोकार से पूरी तरह बिंधे हुए थे. जब कभी उन्हें चीजें खराब, गलत, अमार्यिदत और असंवेदनशील होती दिखीं तो उन्होंने तुरंत मेल कर भड़ास को सूचित किया. उनके लिखे खतों को पढ कर मुझे उर्जा मिलती. मैंने कई बार सोचा कि अबकी लखनऊ जाउंगा तो क्रांति भाई को फोन करके उनसे मिलूंगा लेकिन ये हसरत दिल में ही रह गई… जाने क्या हो गया है मुझे कि अब लगने लगा है कि ऐसे ही किसी रोज मैं भी चला जाऊंगा.. जाने में कोई दिक्कत नहीं लेकिन जब आसपास के जाने वालों को देखता हूं तो लगता है कि अरे, इससे पहले तो मुझे जाना चाहिए थे, ये क्यों कैसे चले गए दुनिया छोड़ के…
क्रांति भाई, कसम से. अब मुझे अपराध बोध हो रहा है कि आपसे क्यों नहीं मिला.. आपके प्रति मेरे मन में गहरा सम्मान और प्यार है.. मैंने अपना एक ऐसा साथी खो दिया जिन्होंने समय समय पर मुझे निजी पत्र लिखकर न सिर्फ गाइड किया बल्कि मेरा हौसला भी बढ़ाया… क्रांति और मैंने, दोनों ने कभी अपने रिश्ते प्रेम स्नेह लगाव जुड़ाव का किसी के सामने जिक्र या प्रदर्शन या दिखावा नहीं किया.. हम किसी प्लैटोनिक चाहत से जुड़े हुए थे.. ऐसे लोगों को जाना तोड़ देता है..

क्रांति किशोर मिश्र
लखनऊ से अपने साथी Anil Singh ने मुझे फोन पर जब बताया कि क्रांति किशोर मिश्र का निधन हो गया तो मुझे लगा कोई ये दूसरे सज्जन होंगे, वो नहीं जिन्हें मैं जानता हूं, जिनको मैं मानता हूं, जिनसे मैं कई वर्षों से फोन व मेल से जुड़ा हुआ हूं.. पर बाद में पता चला कि ये तो वही क्रांति मिश्रा हैं … ऐसी स्थिति में न रोना आता है ना कुछ कहना… बस यही समझ में आता है कि जो कुछ दिख रहा है हो रहा है चल रहा है वह कितना क्षणिक और तात्कालिक है.. जिन चीजों को हमने अपना बना रखा है, अपना मान रखा है वह बिना कोई बात कहे, बिना बताए, बिना एलर्ट किए हमसे यूं दूर चले जाते हैं मानो कभी इस धरती पर रहे ही न हों, मानो कोई रिश्ता हम लोगों से था ही नहीं.. क्रांति भाई को आखिरी सलाम… 18 अगस्त को क्रांति भाई ने एक मैसेज भेजा था मुझे, जो अब भी मेरे मोबाइल में सेव पड़ा है.. उसे बार-बार पढ़ रहा हूं.. लग ही नहीं रहा कि क्रांति नहीं रहे….
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Yashwant ji, saare singh geedad bn ke dubak gaye hain IBN7 Chhatni ke matter pr, ek aap bole hai, dusre vikram rao, ek mail kiya hai, dekhiye agar uchit lage to publihs kariye.. awaiting for ur reply yashwant ji… kranti kishore mishra, bureau head, sudarshan news, Lucknow
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ये मैसेज आईबीएन में छंटनी की खबर आने के दूसरे रोज आया था.. विक्रम राव के बयान का जो मेल क्रांति ने भेजा था, उसे भड़ास पर प्रकाशित करने के बाद मैंने क्रांति को जवाब भी दे दिया था.. पर क्या पता था कि ये उनका मेरा आखिरी संवाद साबित होगा..
12 जुलाई को मैंने क्रांति को मेल से आए उनके एक राइटअप के जवाब में लिखा था कि ''आपने जोरदार लिखा है भाई, लखनऊ आउंगा तो अबकी जरूर मिलूंगा…'', तो क्रांति ने जो रिप्लाई दिया था, वो ये है…
Kranti Mishra ([email protected])
to me
you are most welcome at lucknow yashwant ji . and thanks for publishing
क्रांति भाई के हालिया लिखे और भड़ास पर प्रकाशित दो पोस्ट पढ़ें…
http://bhadas4media.com/article-comment/12982-vikram-rao-and-journalism.html
http://bhadas4media.com/article-comment/13837-ifwj-condem-chhatni.html
क्रांति की उम्र ज्यादा नहीं थी.. उनका फेसबुक प्रोफाइल अभी देखा तो उनकी जन्मतिथि वहां दर्ज मिली… Born on 21 February 1981
क्या कहा जाए..
..साथी को मेरी श्रद्धांजलि….
यशवंत
लेखक यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया के संपादक हैं.
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