श्रीगंगानगर। राजस्थान सरकार ने रियायती दरों पर भूखंड देने की योजना चला रखी है, तो जरूरतमंद पत्रकार इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रयासरत हैं। अब जब गंगानगर में नगर विकास न्यास ने 62 भूखंड पत्रकारों के लिए आरक्षित कर दिये, तो एक पत्रकार, जो प्रिंट मीडिया से लम्बे समय से जुड़ा हुआ है तथा एक राष्ट्रीय समाचार पत्र में कार्यरत है। इसके अलावा वह अपने आप को इलेक्ट्रानिक मीडिया का रिपोर्टर भी बताता है, यही पत्रकार अन्य पत्रकारों का दुश्मन बन गया है।
चापलूसी करने में आगे रहने वाले इस पत्रकार ने अब यूआईटी के अधिकारियों के कान भरने शुरू कर दिये हैं। यह पत्रकार शायद यह भूल गया है कि भूखंडों का आवंटन नियमों के अनुसार होगा, न कि उसके कहे अनुसार। अन्य पत्रकारों को भूखंड ना मिले, ऐसी मंशा रखने वाले इस पत्रकार को पूर्व में पत्रकार कॉलोनी में भूखंड मिला भी हुआ है, जिस पर अभी तक निर्माण नहीं किया है। जबकि राज्य सरकार आदेशों में साफ है कि भूखंड के आवंटन के बाद शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू करवाए, लेकिन इस पत्रकार ने इन आदेशों को हवा में उड़ा दिया। अब जब पत्रकार ही पत्रकार का दुश्मन बन जाए, तो राज्य या केन्द्र सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र पत्रकारों को कैसे मिले? ऐसे पत्रकारों को नौसिखिया पत्रकार की संज्ञा दी जाए, तो गलत नहीं होगी।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





