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संजय गुप्ता के नए फरमान से दैनिक जागरण एनसीआर के रिपोर्टर कर रहे त्राहिमाम

दैनिक जागरण के मालिकों की दुविधा अदभुत है. कभी वे इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की पत्रकारिता की बात करने-कराने लगेंगे तो कभी संसाधन देने के मामले में निम्न स्तर का बनियापा दिखाने लगेंगे. ताजी सूचना है कि टाइम्स आफ इंडिया से दैनिक जागरण की तुलना करते रहने वाले दैनिक जागरण के संपादक संजय गुप्ता ने अपने एनसीआर के सभी रिपोर्टरों के लिए फरमान जारी कर दिया है कि उन्हें प्रतिदिन 2700 वर्ड तक का आउटपुट देना होगा. इससे कम देने पर अबसेंट मान लिया जाएगा.

दैनिक जागरण के मालिकों की दुविधा अदभुत है. कभी वे इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की पत्रकारिता की बात करने-कराने लगेंगे तो कभी संसाधन देने के मामले में निम्न स्तर का बनियापा दिखाने लगेंगे. ताजी सूचना है कि टाइम्स आफ इंडिया से दैनिक जागरण की तुलना करते रहने वाले दैनिक जागरण के संपादक संजय गुप्ता ने अपने एनसीआर के सभी रिपोर्टरों के लिए फरमान जारी कर दिया है कि उन्हें प्रतिदिन 2700 वर्ड तक का आउटपुट देना होगा. इससे कम देने पर अबसेंट मान लिया जाएगा.

यानि रोजाना आठ-नौ ठीकठाक खबरें रिपोर्टरों को लिखनी होगी. कुल खबरों के वर्ड गिनकर 2700 नहीं हुए तो रिपोर्टर को गैरहाजिर मानकर उसका वेतन काट लिया जाएगा. इस नए फरमान के बाद रिपोर्टर बेहद परेशान हैं. इन्हीं सब वजहों से जागरण में अच्छे पत्रकार टिक नहीं पाते. लोगों का कहना है कि ये सारी कवायद मजीठिया देने से पहले छंटनी के उद्देश्य से की जा रही है. हालांकि ये भी शक है कि जागरण वाले मजीठिया देंगे या नहीं क्योंकि वे कई तरह के बहानों, तरीकों, ट्रिकों के दम पर हर बार हर वेतन आयोग की सिफारिशों को नकारते आए हैं.

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