Dilnawaz Pasha : इसमे कोई शक नहीं है कि कई संपादक महिला पत्रकारों का गलत फायदा उठाते हैं या उठाने की कोशिश करते हैं। लेकिन क्या इस तरह के मामलों में सिर्फ संपादक को ही जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। मीडिया वेबसाइट भड़ास4मीडिया पर एक खबर पढ़कर दुख भी हुआ और गुस्सा भी आया। एक संपादक की एक तथाकथित महिला पत्रकार से बातचीत को प्रकाशित कर दिया गया। मैंने अंतिम दो लाइनें ही पढ़ीं… पढ़कर लगा कि मुझे किसी की निजी बातचीत को पढ़ने का कोई अधिकार नहीं है….
दो बार खबर खोलकर बंद कर दी… लेकिन मानव स्वभाव… हमें दूसरे की इज्जत उतरते हुए अच्छी लगती है… दूसरों की निजी जिंदगी में झांकने की हमारी ललक ही तो आजकल खबरों और टीवी सीरियलों का आधार बन गई है… इसलिए… अलग-अलग वो चैट पढ़ी… पूरी तो नहीं पढ़ पाया लेकिन जो भी लिखा था वो प्रकाशन करने के लायक नहीं था… सोच रहा था लिंक शैयर करूं… लेकिन मैं उस चीज को कैसे प्रोत्साहित कर दूं जिसके प्रकाशन को ही मैं गलत मान रहा हूं….. बस इतना ही कहूंगा कि Yashwant Singh भाई को और थोड़ा जिम्मेदार होना चाहिए…..
उन्होंने संपादक का तो नाम प्रकाशित कर दिया… लेकिन जब चैट प्रकाशित की है तो महिला पत्रकार का भी नाम प्रकाशित करना चाहिए क्योंकि मामले को देखकर लग रहा है कि वो विक्टिम नहीं है…. उसने ही संपादक को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी…फिर निजी बातें की और संपादक को भी निजी बातें करने के लिए आकर्षित किया…. मैं मानता हूं कि इस तरह के रिश्तों में गलती इकतरफा नहीं होती…
लेखक दिलनवाज पाशा युवा और मेधावी पत्रकार हैं. उन्होंने अपना यह वक्तव्य फेसबुक पर प्रकाशित किया है.





