हैदराबाद। भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु सरकार तीन वर्ष पहले एक संपादक की गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तारी में शामिल 30 पुलिसकर्मियों को निलंबित करे या मुख्यमंत्री जे. जयललिता इस्तीफा दें। हालांकि इसमें दिलचस्प तथ्य यह है कि जब यह घटना घटित हुई थी तब प्रदेश में जे जयललिता की नहीं बल्कि करुणानिधि की सरकार थी।
पीसीआई के आदेश को पूरा कराने में सरकारी विफलता को गंभीरता से लेते हुए अध्यक्ष ने राज्य प्रशासन को पुलिसकर्मियों को अविलंब निलंबित करने, आरोप पत्र दायर करने और उन्हें गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। पीसीआई के अध्यक्ष ने कहा कि ऐसी मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए जो संविधान के मुताबिक काम करने में असमर्थ हैं। जांच समिति की खुली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति काटजू ने कहा कि यह अत्यंत खेद की बात है कि पिछले वर्ष पारित दो आदेशों के प्रति तमिलनाडु के अधिकारियों ने पूरी तरह से अनादर का भाव प्रदर्शित किया है। यह मामला मदुरै से प्रकाशित तमिल दैनिक 'थिनाबूमि' के संपादक एस. मणिमारन की शिकायत से संबंधित है।
संपादक ने आरोप लगाया है कि 21 जुलाई 2010 को पुलिसकर्मी उनके घर में जबरन घुस आए और उन्हें और उनके बेटे को बिना वारंट के गिरफ्तार कर लिया। उन्हें जेल में बद किया गया और अपराधियों की तरह धमकाया गया। मणिमारन ने आरोप लगाया कि मदुरै जिले में ग्रेनाइट के अवैध खनन के खिलाफ लिखने के कारण उनके साथ यह बर्ताव किया गया। तमिलनाडु सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील की इस दलील पर कि उस समय राज्य में डीएमके की सरकार थी, काटजू ने टिप्पणी की कि उनका आदेश किसी खास पार्टी के खिलाफ नहीं है।






